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बोले प्रयागराज

बोले प्रयागराज

संक्षेप:

Gangapar News - यमुनापार के गौरा और गिधौरा गांव में सड़कें और नालियां जर्जर हो गई हैं। विकास की योजनाएं भ्रष्टाचार का शिकार हैं और ग्रामीणों की शिकायतें अनसुनी हैं। स्कूल जाने वाले बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग रोज़ाना खतरनाक रास्तों से गुजरने को मजबूर हैं। अधिकारियों की लापरवाही से गांव की स्थिति बिगड़ती जा रही है।

Nov 14, 2025 04:40 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गंगापार
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यमुनापार के तहसील करछना के विकास खंड कौंधियारा अंतर्गत आने वाली ग्रामसभा गौरा और उसका मजरा गिधौरा को अब तक विकास के नाम पर सिर्फ़ आश्वासन मिला है। गांव की सड़कों पर अब डामर नहीं गड्ढे बोलते हैं, और नालियों में पानी नहीं, बल्कि उपेक्षा बहती है। कभी जिला पंचायत निधि से लगभग दस लाख रुपये की लागत से बनी सड़क आज मिट्टी में मिल चुकी है। बरसात के मौसम में रास्ते तालाब बन जाते हैं, जिनसे होकर स्कूली बच्चे, महिलाएं और वृद्ध लोग रोज़ अपनी जान जोखिम में डालकर गुजरते हैं। नाली बनाने के नाम पर सड़क को जेसीबी से खोद दिया गया, जो एक महीने में ही टूटकर दलदल में तब्दील हो गई।

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ग्रामीणों की शिकायतें महीनों से फाइलों में धूल खा रही हैं, जबकि अधिकारी और प्रधान चुप हैं। विकास के नाम पर निकले लाखों रुपये कहां गए, इसका जवाब किसी के पास नहीं। गिधौरा और गौरा की ये टूटी सड़कें और बंद नालियां अब केवल रास्ते नहीं, बल्कि गांव की टूटती उम्मीदों और व्यवस्था की नाकामी की गवाही देती हैं। गौरा-गिधौरा गांव ●गिधौरा की टूटी सड़क और जर्जर नाली बनी ग्रामीणों की मुसीबत गांव की विकास योजनाएं बनी भ्रष्टाचार की शिकार नौ साल बाद भी सड़क और नाली मरम्मत की राह देख रही जनता यमुनापार के विकासखंड कौंधियारा के अंतर्गत आने वाली ग्रामसभा गौरा और इसका मजरा गिधौरा इन दिनों अव्यवस्था, लापरवाही और भ्रष्टाचार का प्रतीक बन चुके हैं। कुल जनसंख्या लगभग 5500, जबकि मजरा गिधौरा की जनसंख्या लगभग 1500 है। परंतु इतनी बड़ी आबादी वाले इस क्षेत्र की दुर्दशा यह बयान करती है कि कैसे सरकारी योजनाएं, फंड और पंचायत व्यवस्था कागज़ों में विकास का दावा करती हैं, जबकि ज़मीन पर जनता की तकलीफें बढ़ती जा रही हैं। गांव के ही निवासी रामायण तिवारी बताते हैं कि करीब नौ वर्ष पहले 2015 में जिला पंचायत निधि से लगभग 10 लाख रुपये की लागत से यह सड़क बनाई गई थी। सड़क गांव को चौकठा, सेहरा और रामगढ़वा जैसे कई गांवों से जोड़ती है। यह मार्ग ग्रामीणों, स्कूली बच्चों और प्राइमरी विद्यालय गिधौरा के अध्यापकों के लिए मुख्य संपर्क मार्ग है। लेकिन आज हालत यह है कि सड़क का नामोनिशान मिट चुका है। ग्राम प्रधान ने सड़क के बीचों-बीच जेसीबी से खुदाई कर नाली बनवाने का कार्य करवाया जो शुरू से ही विवादों में रहा। नाली अधूरी रही और एक महीने के भीतर ही पूरी तरह टूट कर गड्ढों में तब्दील हो गई। सड़क की मिट्टी बह गई, जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए और बरसात में यह पूरा मार्ग दलदल में बदल जाता है। ●शिकायतों पर प्रशासन मौन गांव के लोगों ने बताया कि कई बार ग्राम प्रधान, सचिव और संबंधित अधिकारियों को शिकायत की गई, लेकिन किसी ने संज्ञान नहीं लिया। नतीजा यह हुआ कि आज यह डेढ़ किलोमीटर की सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। गांव के भीतर एंबुलेंस तक नहीं पहुंच पाती, जिससे बीमारों को अस्पताल ले जाना मुश्किल हो जाता है। वृद्ध और दिव्यांग व्यक्ति कई बार रास्ते में गिरकर चोटिल हो चुके हैं। गांव की महिलाएं, छोटे बच्चे और बुजुर्ग रोज़ाना इस खतरनाक रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं। बरसात के मौसम में सड़क तालाब जैसी दिखती है। चारों ओर कीचड़, बदबू और गड्ढे। ऐसे में ग्रामीणों का कहना है कि विकास के नाम पर सिर्फ़ धोखा मिला है। ●स्कूली बच्चों और शिक्षकों की परेशानी गांव के प्राइमरी विद्यालय गिधौरा के प्रधानाध्यापक आशीष तिवारी बताते हैं कि नाली बनाने के लिए सड़क को तोड़ा गया था। लेकिन निर्माण कार्य इतनी लापरवाही से किया गया कि एक महीने में नाली और सड़क दोनों टूट गए। आज हालत यह है कि शिक्षक अपनी गाड़ियां एक किलोमीटर दूर खड़ी कर पैदल स्कूल आते हैं। बरसात में बच्चों को कीचड़ और पानी से होकर गुजरना पड़ता है। बच्चों के माता-पिता बताते हैं कि कई बार बच्चे फिसलकर गिर चुके हैं। बरसाती दिनों में स्कूल जाना खतरनाक हो जाता है, लेकिन विकल्प कोई नहीं। यही वह मार्ग है जिससे पूरा गांव शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़मर्रा की ज़रूरतों के लिए जुड़ा है। ●जिला पंचायत निधि का हुआ दुरुपयोग साल 2015 में जिला पंचायत निधि से इस सड़क के लिए लगभग 10 लाख रुपये खर्च किए गए थे। लेकिन अब इसका कोई निशान नहीं बचा। ग्रामीणों का कहना है कि काम में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया, जिससे सड़क कुछ महीनों में ही खराब हो गई। गांव के बुजुर्ग जवाहर लाल बताते हैं कि हमारे बच्चों ने भी यही सड़क देखी और अब उनके बच्चे भी उसी टूटी सड़क से गुजर रहे हैं। प्रधान बदलते गए, अधिकारी आते-जाते रहे, पर सड़क की हालत कभी नहीं सुधरी। ●स्वच्छ भारत मिशन की खुली पोल केंद्र और राज्य सरकार की स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) योजना के तहत हर गांव को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन गिधौरा और गौरा की तस्वीर देखकर लगता है कि यहां स्वच्छता योजनाएं केवल पोस्टरों और रिपोर्टों में सीमित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नाली और सड़क के रखरखाव की कोई व्यवस्था नहीं है। प्रधान और सचिव सालाना फंड का उपयोग दिखाकर रिपोर्ट भेज देते हैं, जबकि जमीनी स्तर पर काम या तो अधूरा रहता है या सिर्फ़ दिखावे के लिए किया जाता है। वरिष्ठ नागरिकों में मायूसी ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने खंड विकास अधिकारी कौंधियारा, ग्राम प्रधान और सचिव से कई बार शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। नाली की सफाई नहीं होती, न सड़क की मरम्मत। अधिकारी सर्वे के नाम पर आते हैं, फोटो खींचते हैं और फाइल बंद कर देते हैं। गांव के बुजुर्ग लोग अब निराश हैं। उनका कहना है कि योजनाएं आती हैं, लेकिन जनहित के बजाय ठेकेदारों और प्रधान-सचिव की जेबें भरती हैं। प्रधान और सचिव दोनों ने विकास के नाम पर हमें अंधेरे में रखा है। ●जनप्रतिनिधियों की चुप्पी शर्मनाक स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी ग्रामीणों ने मदद की उम्मीद की थी, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। न विधायक पहुंचे, न ब्लॉक के अधिकारी। ग्रामीणों का कहना है कि वोट मांगने के समय सब आते हैं, पर जब असली विकास की बात होती है तो सब गायब हो जाते हैं। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि “अगर यही विकास है तो पिछड़ापन बेहतर था। कम से कम सड़क तो चलने लायक थी।” ●शिकायतें- 1. नौ साल में सड़क पूरी तरह टूट गई, मरम्मत के लिए कोई कार्रवाई नहीं हुई। 2. नाली निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया, जिससे पानी सड़कों और घरों में भर जाता है। 3. बारिश में रास्ते तालाब बन जाते हैं, बच्चे कीचड़ से होकर स्कूल जाते हैं। 4. ग्राम प्रधान और सचिव शिकायतों पर ध्यान नहीं दे रहे, ग्रामीण परेशान हैं। 5. एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती, बीमार और वृद्धों को भारी दिक्कत होती है। ●सुझाव 1. सड़क और नाली की तुरंत मरम्मत कर स्थायी पक्के निर्माण कराए जाएं। 2. जिम्मेदार अधिकारियों की जांच कर धन व्यय का लेखा-जोखा सार्वजनिक किया जाए। 3. बारिश से पहले नालियों की नियमित सफाई और जल निकासी की व्यवस्था हो। 4. गांव में एंबुलेंस मार्ग और स्कूल तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित की जाए। 5. ग्राम विकास कार्यों की निगरानी के लिए स्थानीय समिति गठित की जाए। इनकी भी सुनिए गांव की सड़क इतनी टूटी है कि पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। बरसात में कीचड़ और पानी भर जाता है। कई बार शिकायतें करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई। -1. जवाहर लाल मिश्रा 2. नौ साल पहले बनी सड़क अब गड्ढों में बदल चुकी है। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं रोज़ गिरते हैं। अधिकारी और प्रधान सिर्फ आश्वासन देते हैं, लेकिन सुधार का नाम नहीं लेते। रामकृष्ण पांडेय 3. हर बरसात में सड़क तालाब बन जाती है। बच्चों को स्कूल जाने में बहुत परेशानी होती है। ग्राम प्रधान और सचिव सब जानते हैं, फिर भी किसी को सुधार की चिंता नहीं। . मनोज पांडेय 4. नाली टूटकर सड़कों में मिल गई है। गंदा पानी घरों तक पहुंच रहा है। लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। गांव में कोई सफाई व्यवस्था नहीं है, सब लापरवाह बने हैं। डब्लू मिश्रा 5.सड़कें टूटी, नाली ध्वस्त और रास्तों में गंदगी फैली है। गांव की बदहाल तस्वीर देखकर दिल टूट जाता है। अफसरों और जिम्मेदारों को जनता की तकलीफों से कोई सरोकार नहीं। अरुण तिवारी 6.गांव की हालत लगातार बिगड़ रही है। सड़क और नाली दोनों जर्जर हैं। युवाओं ने कई बार ध्यान दिलाया, पर हर बार आश्वासन ही मिला। प्रधान और सचिव दोनों लापरवाह हैं। दीपक पांडेय 7.नाली का गंदा पानी घरों के बाहर बहता है। बच्चों और महिलाओं के लिए चलना मुश्किल है। गांव की सफाई और मरम्मत का कोई ध्यान नहीं, लोग मजबूरी में जी रहे हैं। ईशरावती देवी 8.मुख्य सड़क गड्ढों में तब्दील है, जिससे रोज़ हादसे हो रहे हैं। ग्रामीण कई बार अधिकारियों को सूचना दे चुके हैं, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। लगता है, प्रशासन आंख मूंदे बैठा है। रामायण प्रसाद तिवारी 9. हर ओर गड्ढे और गंदगी है। ग्रामीणों की शिकायतें वर्षों से अनसुनी हैं। गांव का विकास सिर्फ कागज़ों में दिखाई देता है। समस्या के निदान के लिए कई बार गुहार लगाई गई लेकिन सुनवाई नहीं हुई। शोभा लाल भारतीया 10. सड़कें टूटीं, नालियां भरीं और सफाई व्यवस्था खत्म है। बच्चे स्कूल जाने से डरते हैं। कई लोग फिसलकर चोट खा चुके हैं। सरकारें बदलती रहीं, लेकिन हालात जस के तस हैं। राम सलोने मिश्रा बोले जिम्मेदार- ●ग्रामसभा गौरा और मजरा गिधौरा की सड़क व नाली से संबंधित मामला संज्ञान में आया है। संबंधित क्षेत्र का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाएगा। जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। रवि शंकर द्विवेदी-जिला पंचायत राज अधिकारी ●ग्रामसभा गौरा और मजरा गिधौरा की सड़क व नाली की समस्या पर बीडीओ कौंधियारा को अवगत करा दिया गया है। सरकार की योजनाओं का लाभ गांव-गांव तक पहुंचे, यह उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि ग्रामीणों को जल्द ही समस्या से राहत दिलाई जाएगी। इंद्रनाथ मिश्र - ब्लॉक प्रमुख कौंधियारा ●गिधौरा गाँव के मुख्य मार्ग को तोड़कर अधूरा छोड़ देना बेहद गंभीर लापरवाही है। यह सड़क जिला पंचायत निधि से बनी थी, इसलिए संबंधित विभाग की जिम्मेदारी बनती है कि तुरंत जांच कराए। विभागीय अधिकारियों से वार्ता कर समस्या का शीघ्र समाधान कराया जाएगा, ताकि ग्रामीणों, बच्चों और राहगीरों को हो रही कठिनाइयों से राहत मिल सके। डॉ वाचस्पति- विधायक बारा फोटो 1-ग्रामसभा गौरा के मजरा गिधौरा में बीच सड़क बनी क्षतिग्रस्त नाली व टूटी सड़क और बदहाली की स्पष्ट तस्वीर। । फ़ोटो 2- गौरा गांव की कच्ची और टूटी नालियां, सफाई न होने से उगी झाड़ियां। प्रस्तुति- अमित पांडेय