

वाराणसी और प्रयागराज में एक बार फिर गंगा विकराल रूप धारण कर चुकी हैं। वाराणसी में बुधवार की सुबह गंगा ने चेतावनी बिंदु को पार कर लिया और खतरे के निशान की ओर बढ़ चली हैं। इससे अब बड़ी आबादी के जनजीवन पर असर पड़ रहा है। गंगा का पानी घाटों से गलियों की ओर आ गया है। श्मशान घाटों पर अंतिम संस्कार के लिए भी लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। मणिकर्णिका घाट पर शवों को नावों से लेकर जाना पड़ रहा है। घाट के पास अंत्येष्टि स्थल डूब जाने से यहां बने प्लेटफॉर्म पर ही अंतिम संस्कार का विकल्प बचा है। अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू होने में पहले तीन से चार घंटे का इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं, हरिश्चंद्र घाट पर गली में अंतिम संस्कार हो रहा है। गली में एक समय में अधिकतम तीन चिता ही लग पा रही है। ऐसे में यहां भी इंतजार करना मजबूरी बनी हुई है।
उधर प्रयागराज में बाढ़ का पानी अब निचले इलाकों में घुस गया है। इससे वहां के लोगो को अब अपने सामानों के साथ बाढ़ राहत शिविरों में जाना पड़ रहा है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार छोटा बघाड़ा, बेली कछार, राजापुर, के निचले इलाकों में पानी आ गया है, जिससे वहाँ पर रहने वालों को काफी दक्कितों का सामना करना पड़ रहा है। बीते 24 घंटे में गंगा नदी का फाफामऊ में जलस्तर 260 सेंटीमीटर और छतनाग में 104 सेंटीमीटर बढ़ा,जबकि नैनी में यमुना नदी का जलस्तर बीते 24 घंटे में 97 सेंटीमीटर बढ़ा है।
गंगा नदी का पानी लगभग 11 सेंटीमीटर प्रति घंटा और यमुना नदी का पानी 4.5 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। दोनों नदियां डेंजर लेवल 84.734 से बमुश्किल एक मीटर नीचे बह रही हैं। सिंचाई विभाग के कंट्रोल रूम से लगातार जलस्तर की मॉनीटरिंग की जा रही है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और जल पुलिस की तैनाती की गई है। वहीं, जिलाधिकारी ने सभी बाढ़ राहत शिविरों में लोगों के रहने के लिए व्यवस्था पूरी कर ली गई है और अब धीरे धीरे बाढ़ पीड़ित राहत शिविरों में आने भी लगे है।
योगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।
पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।