12 की जगह छह घंटे में मेरठ से प्रयागराज, रैपिड-मेट्रो ट्रेन के बाद गंगा एक्सप्रेसवे की बारी, काम पूरा
मेरठ-प्रयागराज गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। यूपीडा अब ट्रायल रन और फिनिशिंग को अंतिम रूप दे रहा है। इस एक्सप्रेसवे से मेरठ से प्रयागराज की दूरी 12 की जगह मात्र 6 घंटे में तय की जा सकेगी।

मेरठ, मुख्य संवाददाता। मेरठ के लिए परिवहन के क्षेत्र में एक और बड़ी क्रांति होने वाली है। नमो भारत और मेरठ मेट्रो की शानदार सौगात के बाद अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश को पूर्वांचल से जोड़ने वाला गंगा एक्सप्रेसवे अपने संचालन के बेहद करीब है। यूपीडा (UPEIDA) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मेरठ से प्रयागराज तक के इस महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। वर्तमान में केवल फिनिशिंग कार्य, साइनबोर्ड लगाने और रोड मार्किंग जैसे कार्यों को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जिसे अगले कुछ दिनों में पूरा कर लिया जाएगा। इसके बन जाने से मेरठ से प्रयागराज की दूरी 12 की जगह छह घंटे में पूरी हो सकेगी।
ट्रायल रन जारी, शासन की हरी झंडी का इंतजार
मेरठ से प्रयागराज तक बन रहा यह 594 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे धरातल पर उतरने के लिए पूरी तरह तैयार है। अधिकारियों के अनुसार, गंगा एक्सप्रेसवे के विभिन्न खंडों पर वर्तमान में ट्रायल रन किया जा रहा है ताकि सुरक्षा मानकों, मोड़ (Curves) की स्थिति और सड़क की गुणवत्ता की गहन जांच की जा सके। शासन स्तर से आधिकारिक उद्घाटन की तिथि का इंतजार है, और विभाग की पूरी तैयारी है कि मार्च-अप्रैल 2026 तक इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाए। उद्घाटन समारोह की भव्यता के लिए प्रशासन ने अभी से जमीनी स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं।
आर्थिक विकास का नया गलियारा और सामरिक महत्व
यह एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क मात्र नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश के आर्थिक गलियारे को नई मजबूती देने वाली लाइफलाइन साबित होगा। 594 किलोमीटर की लंबाई वाला यह एक्सप्रेसवे मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज समेत 12 जिलों को आपस में जोड़ेगा। इसकी एक और बड़ी खासियत शाहजहांपुर में बनाई गई हवाई पट्टी (Airstrip) है, जिसका उपयोग युद्ध या आपातकालीन स्थिति में वायुसेना के लड़ाकू विमानों की लैंडिंग के लिए किया जा सकेगा। एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक क्लस्टर्स, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स और वेयरहाउस विकसित करने की भी योजना है, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे।
हाईटेक सुरक्षा और ग्रीन एक्सप्रेसवे का मॉडल
सुरक्षा के लिहाज से गंगा एक्सप्रेसवे पर एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) लगाया गया है, जो तेज रफ्तार और हादसों पर नजर रखेगा। एक्सप्रेसवे के हर 10 किलोमीटर पर आपातकालीन कॉल बॉक्स और एम्बुलेंस सेवा की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही, इसे 'ग्रीन एक्सप्रेसवे' बनाने के लिए इसके दोनों ओर लाखों की संख्या में वृक्षारोपण किया गया है, जो पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद करेगा। एक्सप्रेसवे पर सफर के दौरान यात्रियों की सुविधा के लिए आधुनिक वे-साइड एमेनिटीज (WSA) भी विकसित की गई हैं, जहाँ खान-पान और विश्राम की विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी।
मेरठ से प्रयागराज: अब 12 नहीं, मात्र 6 घंटे में पूरा होगा सफर
वर्तमान में मेरठ से प्रयागराज जाने में यात्रियों को नेशनल हाईवे के जरिए 11 से 12 घंटे का समय लगता है, लेकिन गंगा एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद यह सफर घटकर मात्र 6 घंटे रह जाएगा। 100 से 120 किमी प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड वाले इस मार्ग पर वाहन न केवल तेज दौड़ेंगे, बल्कि ईधन की भी भारी बचत होगी। यह कनेक्टिविटी मेरठ और दिल्ली-एनसीआर के लोगों के लिए संगम नगरी प्रयागराज पहुंचना बेहद आसान बना देगी, जिससे पर्यटन, कुंभ मेला कनेक्टिविटी और व्यापार दोनों को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा।
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लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।
पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।


