IIT की रिपोर्ट से डीपफेक का पर्दाफाश; 50 पोर्न वीडियो निकले फर्जी, मां-बेटियों को मिला इंसाफ
एक पति ने अपनी ही पत्नी और दो बेटियों पर सेक्स रैकेट चलाने और पोर्न वीडियो बनाने का आरोप लगा दिया। उसके इन आरोपों से हर कोई हैरान था। पुलिस के अनुरोध पर न्यायालय ने आईआईटी वैज्ञानिकोंं से पोर्न वीडियो की जांच कराई। 42 दिन तक 50 से अधिक पोर्न वीडियो की जांच की गई।
UP News: उत्तर प्रदेश के कानपुर आईआईटी के चार वैज्ञानिकों ने 42 दिन की कड़ी मशक्कत के बाद 50 से अधिक पोर्न वीडियो का सच खोज निकाला। इस सच ने एक मां और उसकी दोनों बेटियों को सम्मान की नई जिंदगी दी है। ये सभी वीडियो डीपफेक निकले, जो अत्याधुनिक तकनीक की मदद से तैयार किए गए थे। महिला पर उसके ही पति ने सेक्स रैकेट चलाने और पोर्न वीडियो बनाने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। आईआईटी की रिपोर्ट पर हाईकोर्ट ने इस याचिका खारिज कर दिया है।
कानपुर के कोहना थाना क्षेत्र में रहने वाले एक युवक ने पुलिस से अपनी ही पत्नी और दो बेटियों के खिलाफ शिकायत की थी। वह कानपुर शहर में चल रहे सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ करने और पोर्न वीडियो का गिरोह चलाने वालों का पर्दाफाश करने का दावा करता रहा। युवक ने अपनी ही पत्नी पर सेक्स रैकेट चलाने का आरोप लगाया। आरोप लगाने के बाद उचित कार्रवाई से संतुष्ट न होने के कारण युवक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की और पत्नी के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। युवक ने कोर्ट में बताया कि पत्नी सेक्स रैकेट चलाती है। इंटरनेट पर उसके सैकड़ों पोर्न वीडियो हैं। जिसमें से कुछ अश्लील तस्वीरें और 50 से अधिक पोर्न वीडियो भी सबूत के रूप में प्रस्तुत किए। एक पति द्वारा अपनी ही पत्नी पर ऐसे सनसनीखेज आरोप लगाए जाने से हर कोई हैरान था।
पुलिस ने उक्त मामले में आईआईटी कानपुर से जांच कराने की प्रार्थना की। पुलिस की इस मांग पर कोर्ट के आदेश दिया। कोर्ट के आदेश पर 10 फरवरी को पुलिस ने सभी वीडियो और फोटो जांच के लिए आईआईटी में स्थापित सी3आई हब के वैज्ञानिकों को दिया। आईआईटी के वैज्ञानिकों ने करीब 42 दिन तक 50 से अधिक पोर्न वीडियो की जांच की। जांच करने के बाद आईआईटी ने 25 मार्च को अपनी रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की। यह जांच सी3आई हब के चीफ स्ट्रेटजी ऑफिसर आनंद हाण्डा की अगुवाई में हुई।
आनंद ने बताया कि वीडियो में दिखाई छवि और स्क्रीनशॉट में दिखाई देने वाले व्यक्ति के बीच कोई सीधा मेल नहीं दिख रहा है। साथ ही, उपलब्ध मेटाडेटा और कलाकृतियों की समयरेखा के आधार पर बरामद मीडिया फाइलें लगभग 10-12 वर्ष पुरानी हैं। हाईकोर्ट ने आईआईटी की रिपोर्ट के आधार पर ही याचिका खारिज की है। इससे आरोपों का सामना कर रहीं मां-बेटी को बड़ी राहत और एक तरह से नई जिंदगी मिली है।
कृपया अपने अनुभव को रेट करें
लेखक के बारे में
Ajay Singhअजय कुमार सिंह पिछले आठ वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पूर्वांचल के बड़े हिस्से से खबरों का कोआर्डिनेशन देख रहे हैं। वह हिन्दुस्तान ग्रुप से 2010 से जुड़े हैं। पत्रकारिता में 27 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले अजय ने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। हिन्दुस्तान से पहले वह ईटीवी, इंडिया न्यूज और दैनिक जागरण के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। अजय राजनीति, क्राइम, सेहत, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ी खबरों को गहराई से कवर करते हैं। बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट अजय फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में असिस्टेंट एडिटर हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति और क्राइम की खबरों पर विशेष फोकस रखते हैं।
और पढ़ें

