प्रकाश नारायण हत्याकांड में पूर्व विधायक विजय मिश्र को उम्रकैद, 46 साल पुराने केस में आया फैसला
46 साल तीन महीने पहले 1980 में जिला कचहरी परिसर में जब यह घटना हुई थी, आरोपी संतराम की उम्र 40 वर्ष से कम की थी। व्हीलचेयर पर जेल से पेश किए गए संतराम ने कोर्ट को अपनी वर्तमान उम्र 85 वर्ष बता कर कम दंड देने की अपील की। आरोपी जीत नारायण की उम्र घटना के वक्त 30 वर्ष से कम की थी।
UP News : 46 साल पहले कचहरी परिसर में हुई प्रकाश नारायण पांडेय की हत्या में पूर्व विधायक विजय मिश्रा सहित चारों दोषियों को बुधवार को उम्रकैद और एक लाख जुर्माना और हत्या की कोशिश में 10 वर्ष की कैद और 50 हजार जुर्माने की सजा सुनाई गई। प्रयागराज की एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष जज योगेश कुमार ने कहा कि मामला विरल से विरलतम नहीं है, इसलिए इतनी सजा से दंड का उदेश्य पूरा हो जाएगा। हालांकि अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक सुशील कुमार वैश्य और वीरेंद्र कुमार सिंह ने तर्क दिया कि घटना न्याय के मंदिर परिसर में हुई थी। इसलिए कठोर दंड मिलना उचित होगा।
आरोपियों ने सजा कम करने की अपील की
46 वर्ष 3 माह पूर्व 1980 में जिला कचहरी परिसर में जब यह घटना हुई थी, आरोपी संतराम की उम्र 40 वर्ष से कम की थी। व्हीलचेयर पर जेल से अदालत में पेश किए गए संतराम ने अदालत को अपनी वर्तमान उम्र 85 वर्ष बता कर कम दंड देने की अपील की। आरोपी जीत नारायण की उम्र घटना के वक्त 30 वर्ष से कम की थी। उन्होंने अदालत को अपनी वर्तमान उम्र 75 वर्ष बता कर रहम बरतने की अपील की। पूर्व विधायक विजय मिश्रा के अधिवक्ता ने रहम बरतने की अपील की। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि घटना के समय वह अपनी जवानी के पहले कदम 21 वर्ष की आयु के थे।
विशेष अदालत ने 22 माह में किया निस्तारित
इस हत्याकांड की पत्रावली एमपी एमएलए की अदालत को जुलाई 2024 में प्राप्त कराई गई। इस पत्रावली में तब कोई भी गवाही नहीं दर्ज हुई थी क्योंकि पत्रावली में कागजात का अभाव था। फिर कागजात तलाश कर पत्रावली का पुनरुद्धार किया गया। गवाही शुरू हुई। इस तरह 2024 के जुलाई में विशेष अदालत को प्राप्त हुई इस पत्रावली का 2 वर्ष से कम की अवधि में मई 26 में निस्तारण कर दिया गया।
हाई कोर्ट में अपील करेंगे विजय मिश्रा
अदालत में हत्याकांड और उसके साथ हत्या की कोशिश दोनों ही आरोप में विजय मिश्रा को दंडित किए जाने का फैसला सुनाया गया और दंडादेश पर उनके हस्ताक्षर कराए गए। इसके उपरांत पूछने पर उन्होंने कहा कि फैसले की प्रति मेरे वकील को मिल जाएगी, वह उसका अध्ययन करेंगे। उसके बाद इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगे और हाईकोर्ट से न्याय मांगेंगे।
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लेखक के बारे में
Ajay Singhअजय कुमार सिंह पिछले आठ वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पूर्वांचल के बड़े हिस्से से खबरों का कोआर्डिनेशन देख रहे हैं। वह हिन्दुस्तान ग्रुप से 2010 से जुड़े हैं। पत्रकारिता में 27 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले अजय ने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। हिन्दुस्तान से पहले वह ईटीवी, इंडिया न्यूज और दैनिक जागरण के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। अजय राजनीति, क्राइम, सेहत, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ी खबरों को गहराई से कवर करते हैं। बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट अजय फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में असिस्टेंट एडिटर हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति और क्राइम की खबरों पर विशेष फोकस रखते हैं।
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