
अयोध्या में पहली बार सावन में आएगी ऐसी घड़ी, राममंदिर में माता सीता संग झूला झूलेंगे श्रीराम
राम मंदिर में राजा राम के पदार्पण के बाद पहला सावन आ रहा है जब युगल सरकार के रूप में राजा राम देवी मां सीता के संग झूले पर विराजित होकर झूलेंगे। मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव बताते हैं कि यह बहुत बड़ा दिन होगा लेकिन निर्माण कार्यों की अस्त-व्यस्त स्थिति में आयोजन को वृहत्तर बनाना संभव नहीं होगा।
रामनगरी में इस बार झूलनोत्सव विशेष होगा। पांच सौ साल की प्रतीक्षा के बाद राम मंदिर में एक तरफ रामलला विराजमान हुए। राजा राम के पदार्पण के बाद पहला सावन आ रहा है जब युगल सरकार के रूप में राजा राम देवी मां सीता के संग झूले पर विराजित होकर झूलेंगे। मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव कहते हैं कि निश्चित रूप से यह बहुत बड़ा दिन होगा लेकिन निर्माण कार्यों की अस्त-व्यस्त स्थिति में आयोजन को वृहत्तर बनाना संभव नहीं होगा। फिलहाल उत्सव को पूरी भव्यता से मनाया जाएगा। इसके लिए रत्न जड़ित स्वर्ण झूले के निर्माण कराया जाएगा।
बताया गया कि रामलला और उनके अनुजों के लिए रत्न जड़ित झूला पहले बनवाया गया था लेकिन अब उनके लिए भी नये झूले का निर्माण होगा। इस विषय में काम चल रहा है और समय आने पर उत्सव की भव्यता दिखाई देगी। फिलहाल अभी कुछ बताना जल्दबाजी होगी। सावन माह में झूलनोत्सव अयोध्या धाम का वह सांस्कृतिक उत्सव है जहां अध्यात्म के साथ गीत-संगीत की त्रिवेणी प्रवाहमान होती है। इस उत्सव को लेकर अलग-अलग मंदिरों की अलग-अलग आचार्य परम्परा है जिसके अनुसार आयोजन किया जाता है। यह उत्सव कहीं पूरे महीने चलता है तो अधिकांश में सावन शुक्ल तृतीया से पूर्णिमा यानी 13 दिनों तक चलता है। इसके अलावा बाकी मंदिरों में एकादशी से पूर्णिमा तक पांच दिनों का उत्सव होता है। राम मंदिर में पांच दिनों के उत्सव की परम्परा चली आ रही है। जनवरी 1993 से यह परम्परा कायम है।
भवन निर्माण समिति की बैठक 27 से होगी
राम मंदिर निर्माण की प्रगति की समीक्षा के लिए हर पखवाड़े होने वाली भवन-निर्माण समिति की तीन दिवसीय बैठक 27 जून से होगी। इस बैठक के लिए समिति चेयरमैन नृपेन्द्र मिश्र 26 जून को यहां पहुंचेंगे। राम मंदिर परियोजना से सम्बन्धित अधिकांश कामों को अक्तूबर -नवम्बर तक पूरा कराने का लक्ष्य है। इसमें परकोटा से सबसे प्रमुख है।
11 सौ नित्य दर्शनार्थियों ने किया राम दरबार का दर्शन
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की ओर से रामलीला के नित्य दर्शनार्थियों के लिए दो दिन का समय तय किया गया था जब सभी नित्य दर्शनार्थियों के लिए राम दरबार खोला गया। सभी नित्य दर्शनार्थियों ने बारी-बारी से राजा राम के चरणों में अपनी श्रद्धा निवेदित की। बताया गया कि नित्य दर्शनार्थियों की संख्या 11 सौ है। हालांकि यह संख्या दो हजार के ऊपर थी लेकिन नवीनीकरण के बाद इनकी संख्या घटकर 11 सौ रह गई है।
मणि पर्वत के झूलनोत्सव से मंदिरों में होती है उत्सव
राम नगरी झूलनोत्सव की शुरुआत मणि पर्वत के उत्सव से होती है। सावन शुक्ल तृतीया तिथि को यहां विभिन्न मंदिरों से भगवान के श्रीविग्रह व स्वरूपों को लाकर झूले पर बैठाया जाता है और फिर मधुर उपासना परम्परा के आचार्यों के द्वारा रचित पदों का गायन होता है। यह युगल सरकार अर्थात भगवान श्रीसीताराम के स्मृति का पर्व है। सैकड़ों सालों से कायम परम्परा संतों के उस श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है जिसके पांच सौ सालों की प्रतीक्षा का अंत हो सका। तीर्थ क्षेत्र की धार्मिक न्यास समिति के सदस्य व हनुमत निवास महंत मिथिलेश नंदिनी शरण कहते हैं कि सत संकल्प की पूर्ति अवश्य होती है।





