93 मिनट लखनऊ के चक्कर काटकर दिल्ली लौटी फ्लाइट, क्यों नहीं लैंड कर पाया विमान?
लखनऊ के चक्कर काटकर वापस फ्लाइट दिल्ली लौट गई। दिल्ली से लखनऊ पहुंचा एक विमान एयरपोर्ट पर उतर नहीं सका। विमान में 93 मिनट आसमान में चक्कर काटता रहा।

लखनऊ के आसमान पर छाए घने कोहरे की वजह से दिल्ली से लखनऊ पहुंचा एक विमान उतर नहीं सका। पायलट ने कई चक्कर काटे पर दृश्यता 50 मीटर तक भी नहीं आई। इतनी दृश्यता पर इंस्ट्रूमेंटल लैंडिंग सिस्टम काम करने लगता है और विमान उतर जाता है। दृश्यता इससे कम रहने पर एटीसी ने उसे दिल्ली वापस भेज दिया।
एयरपोर्ट सूत्रों के मुताबिक, एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट आईएक्स 2171 दिल्ली से सुबह 6:18 बजे लखनऊ के ऊपर पहुंची थी। उस समय कोहरा काफी घना था। दृश्यता 10 मीटर के करीब थी। नतीजतन यह फ्लाइट चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट पर लैंड नहीं हो सकी। एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने कम दृश्यता के कारण इसे उतरने की अनुमति नहीं दी। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विमान को लंबे वक़्त तक होल्ड पर रखा गया, लेकिन हालात अनुकूल न होने पर यह फ्लाइट 7:51 बजे दिल्ली के लिए वापस लौट गई। यही विमान फ्लाइट संख्या आईएक्स 189 बनकर सुबह 8 बजे रियाद के लिए उड़ान भरता है। विमान की समय पर लैंडिंग न हो पाने और ऑपरेशनल समस्याओं के कारण रियाद जाने वाली एयर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ान आईएक्स 189 को रद्द करना पड़ा।
घने कोहरे का प्रभाव अब केवल इसी विमान तक सीमित नहीं रहा। बल्कि मुंबई से रात 12:35 बजे लखनऊ आने वाली इंडिगो की उड़ान 6ई-5264 करीब 45 मिनट की देरी से पहुंची। वहीं, रियाद से सुबह 9 बजे आने वाली फ्लाइनेस की उड़ान एक्सवाई 333 भी लेट हुई। हैदराबाद से लखनऊ की फ्लाइट 6ई 453 दो घंटा देरी से पहुंची। किशनगढ़ से लखनऊ की फ्लाइट एस 5-222 दो घंटे 18 मिनट लेट हुई। झारसुगुड़ा से लखनऊ की फ्लाइट एस 5-229 तीन घंटे लेट हुई। एयर इंडिया एक्सप्रेस की राजकोट से लखनऊ की फ्लाइट आईएक्स 124 दो घंटे पांच मिनट देरी से पहुंची।
कोहरे में उतरने के लिए भी थोड़ी दृश्यता जरूरी
कैट 3 बी में तीन बिंदुओं पर बीकन के जरिए दृश्यता बढ़ाई जाती है। टच डाउन, मिड प्वाइंट और स्टॉप एंड। एविएशन एक्सपर्ट के अनुसार यदि सामान्य दृश्यता 50 मीटर है तो उसे कैट 3 बी की मदद से 150 तक बढ़ाया जाता है जिसे आरवीआर यानी रनवे विजुअल रेंज कहा जाता है। यह रनवे पर लगे उपकरणों से मापी गई वह दूरी है, जितनी दूर तक एक पायलट को रनवे की हाई-इंटेंसिटी लाइट्स या मार्किंग साफ दिखाई देती है। यह लाइट्स बहुत चमकदार होती हैं, इसलिए कोहरे में भी ज्यादा दूर तक दिखती हैं। एयर इंडिया एक्सप्रेस के पायलट को तीन बिंदुओं पर कम से कम 175, 125, 125 दृश्यता चाहिए थे। इतनी देर चक्कर काटने के बावजूद दृश्यता नहीं बढ़ी।

लेखक के बारे में
Deep Pandeyदीप नरायन पांडेय लाइव हिन्दुस्तान में पिछले आठ सालों से यूपी टीम में हैं। दीप का डिजिटल, टीवी और प्रिंट जर्नलिज्म में 15 साल से अधिक का अनुभव है। यूपी के लखनऊ और वाराणसी समेत कई जिलों में पत्रकारिता कर चुके हैं। यूपी की राजनीति के साथ क्राइम की खबरों पर अच्छी पकड़ है। सामाजिक, इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, शिक्षा और हेल्थ पर भी लिखने का शौक है। मास कम्युनिकेशन में बीए और एमए हैं। सरल भाषा में खबरों को पाठकों तक पहुंचाते हैं। खबर लिखने के अलावा साहित्य पढ़ने-लिखने में भी रुचि रखते हैं।
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