
103 ट्यूबवैल आपरेटरों के खिलाफ दायर याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज
संक्षेप: Firozabad News - सुप्रीम कोर्ट ने फिरोजाबाद नगर निगम द्वारा 103 ट्यूबवैल आपरेटरों की सेवाएं समाप्त करने की याचिका खारिज कर दी। यह मामला 2011 से चल रहा था, जब इन आपरेटरों को मनमाने तरीके से हटाया गया था। श्रम न्यायालय और हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में निर्णय दिया। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी उन्हें बहाल करने का आदेश दिया है।
फिरोजाबाद। सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगम फिरोजाबाद के 103 ट्यूबवैल आपरेटरों की सेवाओं को समाप्त किए जाने के मामले को लेकर दायर नगर निगम की याचिका को खारिज कर दिया। इन ट्यूबवैल आपरेटरों की सेवाओं को समाप्त करने को लेकर आरोप था कि मनमाने तरीके से इनको हटाया गया है। ट्यूबवैल आपरेटर जो तत्कालीन नगर पालिका फिरोजाबाद में कार्यरत थे उनको हटाने के बाद मामले को श्रम न्यायालय में ले जाया गया था और इस मामले में श्रमिकों के पक्ष में निर्णय हुआ था। ट्यूबवैल आपरेटरों के खिलाफ दायर याचिका के खारिज होने पर तत्कालीन ट्यूबवैल आपरेटरों और उनके परिजनों के चेहरों पर खुशी देखी गई।

मामला वर्ष 2011 से जुड़ा है। नगर पालिका परिषद फिरोजाबाद में शासन द्वारा ग्रांट खत्म कर दिए जाने पर 103 पंप ऑपरेटरों की छुट्टी कर दी गई थी। इस पर पंप ऑपरेटर फिरोजाबाद के श्रम न्यायालय में चले गए थे। श्रम न्यायालय में जब मामला चला तो फैसला पंप आपरेटरों के पक्ष में आ गया था। इसी दौरान नगर पालिका फिरोजाबाद को नगर निगम फिरोजाबाद का दर्जा मिल गया था। पंप आपरेटरों को जब नौकरी पर बहाली नहीं मिल सकी तो श्रम न्यायालय के फैसले को आधार बनाकर सभी हाईकोर्ट में पहुंचे। पंप ऑपरेटरों को यहां भी बड़ी राहत मिली और हाई कोर्ट ने 103 पंप आपरेटरों को बहाल करने व नौकरी से हटाए जाने से लेकर आदेश होने तक वेतन का 40 फीसद भुगतान करने के नगर निगम को निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट के आदेश को लेकर पंप ऑपरेटरों ने नगर निगम दफ्तर पहुंचकर अपनी ज्वाइनिंग और 40 फीसद भुगतान की मांग को लेकर अपर आयुक्त को प्रार्थना पत्र दिया तो तत्कालीन अपर आयुक्त नगर निगम प्रमोद कुमार ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर दी गई है। यह सुनकर फिर पंप आपरेटरों को नौकरी पर वापसी को लेकर झटका लग गया था। सुनवाई को लेकर नगर निगम और सभी पंप आपरेटरों को अपना पक्ष रखना था। जब नगर निगम ने अपनी कैविएट दाखिल की तो पंप आपरेटरों ने भी अपनी कैविएट दाखिल करने की तैयारी की थी। पंप आपरेटरों ने अपने हक को पाने के लिए लगातार सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ी। अब सभी 103 ट्यूबवैल आपरेटरों की सेवाएं समाप्त करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका को मंगलवार को खारिज कर दिया है। एडवोकेट धर्मसिंह यादव ने बताया कि सभी ट्यूबवैल आपरेटरों की सेवाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर निगम की याचिका खारिज हो गई है। वहीं मामले में अपर नगर आयुक्त नगर निगम अब्बास हसन नकवी ने बताया कि उनके पास इस तरह का कोई आर्डर अभी नहीं आया है। मामले में उनको जानकारी नहीं है। हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेश को बरकरार रखा है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा है कि अगर इससे संबंधित कोई और याचिका है तो वह भी खारिज हो जाएगी। ट्यूबवैल आपरेटर बोले लम्बी लड़ाई के बाद जीत नगर पालिका से नगर निगम का सफर करते हुए करीब 13 साल से अपने हक के लिए 103 ट्यूबवैल आपरेटरों के मामले में लड़ाई लड़ी जा रही थी। कभी श्रम न्यायालय की जीत का जश्न मनाते तो फिर हाईकोर्ट में याचिका दायर होने पर मायूसी छा जाती। फिर हाईकोर्ट में जीत दर्ज हुई तो फिर जीत का जश्न मनाया लेकिन सुप्रीम कोर्ट में नगर निगम पहुंच गया तो फिर खुशी पर ब्रेक लग गया। अब सुप्रीम कोर्ट में जीत दर्ज होने से सभी ट्यूबवैल आपरेटरों में खुशी का माहौल है। उनका कहना है कि जीत सच की हो गई है। अब आदेश का पालन होने के बाद ही सच्ची खुशी का अहसास होगा।

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