बोले फिरोजाबाद: रील बनाने में भूलते जा रहे समाज में रोल
Firozabad News - सोशल मीडिया पर रील बनाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। धार्मिक स्थलों पर रील बनाने से लोगों की भावनाएं आहत हो रही हैं। कई लोग इसे जागरूकता के लिए उपयोग कर रहे हैं, जबकि कुछ विवादों का कारण बन रहे हैं। अभिभावकों को अपने बच्चों की निगरानी करनी चाहिए और धार्मिक स्थलों पर रील बनाने पर पाबंदी लगनी चाहिए।
वर्तमान में रील बनाने का चलन दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। लोग अपनी दिनचर्या भी सोशल मीडिया के माध्यम से एक दूसरे तक पहुंचा रहे हैं। वीडियो बनाने वाले कई सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर को सही और गलत का अंदाजा तक नहीं होता कि वह क्या कर रहे हैं? कई बार ऐसे मामलों में मुकदमें तक दर्ज हो जाते हैं। इसके बाद भी इसमें सुधार नहीं है। सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा रील धार्मिक स्थलों पर बनाई जाती है। जब भी मोबाइल खोलो तो उसमें किसी न किसी देवता की मूर्ति के साथ वायरल रील दिखाई देती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने के बाद तो और ज्यादा खिलवाड़ होने लगा है।
इसमें हर वर्ग की है भागीदारी है। हिन्दुस्तान की टीम ने बोले फिरोजाबाद के तहत बच्चू बाबा आश्रम पर मृत्युंजय मां पीतांबरा महायज्ञ के अक्षत पुष्प एवं मंगल कलश वितरण कार्यक्रम में श्रद्धालुओं से इस विषय पर संवाद किया। श्रद्धालुओं ने कहा कि सोशल मीडिया पर धार्मिक स्थलों और धर्म को लेकर रील बनाना एक आम बात हो गई है। कई लोग इसे अपने विचार व्यक्त करने और जागरूकता फैलाने के लिए उपयोग करते हैं, जबकि कुछ लोग इसे विवादों को जन्म देने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं। इसमें युवाओं के साथ वरिष्ठजन भी शामिल हैं। अपने चैनल बनाकर अभद्र शब्दों के साथ समाज में सामग्री परोसी जा रही है। इससे समाज के मानिसक स्तर में बड़ा बदलाव हो रहा है। जिन शब्दों को बच्चों के सामने बोलने से लोग कतराते थे, अब वह सोशल मीडिया के माध्यम से सीधे उन तक पहुंच रहे हैं। आने वाले समय में इसके भयानक परिणाम हो सकते हैं। अभिभावक अपने बच्चों की करें नियमित निगरानी मोबाइल उस टूल्स की तरह काम करता है, जिससे अच्छी चीजों सीख सकते हैं। ऑन लाइन क्लास ले सकते हैं। पुस्तकों का भंडार मोबाइल में मिल जाएगा। ज्ञान पाने के लिए कहीं जाने की भी जरूरत नहीं है। पढ़ाई से लेकर रोज का अखबार तक मोबाइल पर उपलब्ध रहता है लेकिन लोगों द्वारा उसका उपयोग रील बनाने में किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर धार्मिक स्थलों और धर्म को लेकर रील बनाने से पहले लोगों को सावधानी और समझदारी बरतनी चाहिए। ताकि वे किसी को नुकसान न पहुंचाएं और समाज में शांति व एकता को बढ़ावा दें। श्रद्धालुओं का मानना है कि इसके लिए अभिभावक अपने बच्चों की निगरानी करें। जो लोग धार्मिक स्थलों पर रील बना रहे हैं, उन पर भी नजर रखी जाए। धार्मिक स्थलों पर बनाई गई रील या भजन मंत्रों के साथ खिलवाड़ करते उच्चारण की रील पर पाबंदी लगाई जानी चाहिए। अपमानजनक चित्रण होने से धार्मिक भावनाएं होती हैं आहत सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो भी छाए हुए हैं, जिनमें वैदिक मंत्रोच्चारण व भजनों को एक मजाक के साथ प्रस्तुत किया गया है। जबकि उनका अर्थ बहुत ही गंभीर होता है। दूसरों का मार्ग दर्शन करने के लिए होता है। लेकिन रील में मजाक के रूप में चलने से शब्दों की गरिमा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। धर्म और धार्मिक स्थलों को लेकर रील बनाने से पहले लोगों को यह सोचना चाहिए कि उनके शब्द और चित्रण दूसरों को कैसे प्रभावित कर सकते हैं। यदि रील में धार्मिक स्थलों या धर्म का अपमानजनक चित्रण होता है तो यह समाज में तनाव और विवाद को बढ़ावा दे सकता है। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर धार्मिक स्थलों और धर्म को लेकर रील बनाने से पहले लोगों को यह भी सोचना चाहिए कि क्या यह रील वास्तव में आवश्यक है और क्या यह किसी को नुकसान पहुंचा सकती है। हमारी भी सुनिए धार्मिक स्थलों पर रील बनाना उचित नहीं है। यह अपमानजनक है। रील बनाने वालों को यह सोचना चाहिए कि वे लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसे लोगों पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि दूसरे लोग भी सबक ले सकें। - शशी जो लोग रील बनाते हैं या फिर बनाना चाहते हैं, वे बनाएं लेकिन उन्हें धार्मिक स्थलों पर नहीं बनानी चाहिए। धार्मिक स्थलों पर अपनी मर्यादाएं होती हैं। ये इन स्थलों पर ठीक नहीं है। धार्मिक स्थलों की प्रबंध समितियों को निगरानी करानी चाहिए। - विनीता धार्मिक स्थलों पर रील बना रहे हैं, तो वह सम्मानजनक होनी चाहिए। एआई से किसी प्रतिमा के साथ खिलवाड़ करना बिल्कुल उचित नहीं है। इस पर प्रशासन को सख्ती करनी चाहिए। इसके साथ ही ऐसे लोगों पर मुकदमा भी दर्ज कराना चाहिए। - रश्मि धार्मिक स्थलों पर रील बनाना एक प्रकार का अपमान है। जब रील में प्रतिमाओं के साथ खिलवाड़ करते हुए दिखाया जाता है, तो भगवान का अपमान ही माना जाना चाहिए। इसे बंद करना चाहिए। आम लोगों को भी ऐसी रील नहीं बनाने देनी चाहिए। - चंद्रलता रील के चलन में लोग संस्कृति भूलते जा रहे हैं। उनका मोबाइल के माध्यम से मजाक बनाया जा रहा है। इसमें महिलाओं, पुरुषों, युवा, युवतियों और बच्चों का भी पूरा सहयोग है। इस पर रोक लगनी चाहिए। एक दायरे में रहकर ही रील बनानी चाहिए। - जाह्न्वी शासन द्वारा छात्रों को मोबाइल व टेबलेट बांटे जा रहे हैं। ताकि वे मोबाइल का उपयोग शिक्षा ग्रहण करने के रूप में सकें, लेकिन महिलाओं, पुरुषों, युवा, युवतियों ने इसकी परिभाषा ही बदल दी है। ऐसे ही रहा तो मोबाइल खतरनाक हालात पैदा कर देगा। - सोनम पहले के जमाने में जब मोबाइल नहीं था, तो आपसी संबंध गहरे बने रहते थे। मोबाइल आने से समाज में बदलाव हुए हैं। स्मार्ट मोबाइल ने पूरा सूरत बदल दी है। अब लोग इसका सदुपयोग नहीं करके, अधिकांश समय रील बनाने में व्यर्थ करते रहते हैं। - प्रीति सोशल मीडिया पर अब रील बनाने की बाढ़ सी आई हुई है। सुबह उठते ही मोबाइल उठाओ तो उस पर कई सोशल साइटों पर नई-नई रील दिखती हैं। लोग सबसे अधिक समय अब मोबाइल को देने लगे हैं। जिससे परिवारों में भी विघटन होने लगे हैं। - विमलेश

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