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18 सितम्बर, 2020|3:50|IST

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हिंदू चिकित्सक को मुस्लिमों ने कंधा देकर दी मुखाग्नि

हिंदूचिकित्सक को मुस्लिमों ने कंधा देकर दी मुखाग्नि

1 / 3कोरोना काल में सुहागनगरी में हिंदू-मुस्लिम एकता का संगम देखने को मिला। हिंदू चिकित्सक की मौत के बाद परिवार नहीं होने पर मुस्लिम भाइयों ने उनकी अंतिम संस्कार की रस्में पूरी कराईं। राम नाम सत्य है कहते...

हिंदूचिकित्सक को मुस्लिमों ने कंधा देकर दी मुखाग्नि

2 / 3कोरोना काल में सुहागनगरी में हिंदू-मुस्लिम एकता का संगम देखने को मिला। हिंदू चिकित्सक की मौत के बाद परिवार नहीं होने पर मुस्लिम भाइयों ने उनकी अंतिम संस्कार की रस्में पूरी कराईं। राम नाम सत्य है कहते...

हिंदूचिकित्सक को मुस्लिमों ने कंधा देकर दी मुखाग्नि

3 / 3कोरोना काल में सुहागनगरी में हिंदू-मुस्लिम एकता का संगम देखने को मिला। हिंदू चिकित्सक की मौत के बाद परिवार नहीं होने पर मुस्लिम भाइयों ने उनकी अंतिम संस्कार की रस्में पूरी कराईं। राम नाम सत्य है कहते...

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कोरोना काल में सुहागनगरी में हिंदू-मुस्लिम एकता का संगम देखने को मिला। हिंदू चिकित्सक की मौत के बाद परिवार नहीं होने पर मुस्लिम भाइयों ने उनकी अंतिम संस्कार की रस्में पूरी कराईं। राम नाम सत्य है कहते हुए श्मशान घाट तक लाए और भतीजे संग मुस्लिमों ने हाथ आगे बढ़ाकर मुखाग्नि दी। अब आगे की रस्मों को भी ये लोग पूरा कराएंगे।
मुस्लिम क्षेत्र में नाले की पुलिया पर डा.विनोद गुप्ता (65) की तबियत बिगड़ गई। उन्हें बुधवार रात में ट्रॉमा सेंटर लाए लेकिन हार्ट अटैक के चलते चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। विनोद के पिता डा.बच्चन लाल गुप्ता फिरोजाबाद में करीब 90 साल पहले आए थे। तब से उन्होंने नाले की पुलिया पर अपना क्लीनिक बनाया और बेटे विनोद ने जब एमबीबीएस कर ली तो उसे भी लखनऊ से समाजसेवा के लिए शहर बुला लिया।

चंद रुपयों में मिलता था क्लीनिक पर उपचार
हिंदू हो या मुस्लिम कोई भी विनोद की क्लीनिक पर आता तो पिता की समाजसेवा को आगे बढ़ाते हुए वर्तमान समय में भी 30 से 40 रुपये में वे मरीजों को दवा देते थे। यहां तक कि बोतलें चढ़ाई जातीं तो 50 रुपये ही लेते थे। पिता- पुत्र की समाजसेवा का ही असर रहा कि उन्होंने मुस्लिमों के दिलों में जगह बना ली। विनोद ने समाजसेवा के लिए शादी नहीं की थी।

अपने हाथों से मुस्लिमों ने बनाई अर्थी
मुस्लिम भाइयों ने शव को घर ले जाने के बाद अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी। मुस्लिमों ने बांस, कफन और अन्य सामग्री एकत्रित की। स्वयं ही उन्होंने अर्थी तैयार की।

अंतिम यात्रा में सैकड़ों मुस्लिम शामिल
अंतिम यात्रा में मुस्लिम क्षेत्र से सैकड़ों लोग शामिल हुए। मुस्लिम भाइयों ने राम नाम सत्य है कहते हुए शव यात्रा को आगे बढ़ाया। अर्थी को लेकर भी मुस्लिम भाई ही चल रहे थे।

भतीजे संग जर्रार ने दी मुखाग्नि
लावारिस अंतिम संस्कार कमेटी के सचिव जर्रार अहमद ने बताया कि चिकित्सक परिवार ने समाज की सेवा लंबे समय तक की। उन्होंने और दिल्ली से बुलाए उनके भतीजे ने मिलकर जलेसर रोड स्थित श्मशान घाट पर उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान डा.जियारुद्दीन, फिरोज अली, आसिफ खान, मुन्ना समेत मुस्लिम समाज के लोग मौजूद रहे।

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  • Web Title:Muslims give face to Hindu doctor