बोले फिरोजाबाद: मैदान में उगे हैं झाड़ और झाड़ी कैसे बनें क्रिकेट के खिलाड़ी
Firozabad News - सरकार खेलो इंडिया के तहत परिषदीय एवं राजकीय स्कूलों को खेल सामग्री के लिए धनराशि दे रही है, लेकिन अनुदानित कॉलेजों में छात्रों को सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। कॉलेजों में खेल शिक्षकों की कमी और जर्जर...
खेलो इंडिया के तहत सरकार परिषदीय एवं राजकीय स्कूलों को खेल सामग्री के लिए धनराशि दे रही है, लेकिन प्राथमिक एवं जूनियर हाईस्कूलों से पढ़कर निकलने वाले छात्र राजकीय स्कूलों से ज्यादा सहायता प्राप्त अनुदानित कॉलेजों में शिक्षा ग्रहण करने पहुंचते हैं, लेकिन सहायता प्राप्त अनुदानित कॉलेजों में सरकार के द्वारा अब शिक्षकों को वेतन ही दिया जा रहा है। कोई अन्य अनुदान न मिलने से यहां के बेहतर मैदान धीरे-धीरे जर्जर स्थिति में पहुंच रहे हैं। प्रबंध तंत्रों के अधिकार छिनने के बाद प्रबंध तंत्र भी इन मैदानों की व्यवस्थाओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। जबकि अगर देखा जाए तो सहायता प्राप्त कॉलेजों के पास खेल मैदान के लिए जमीन की कमी नहीं।
खेल के मैदान के रूप में यहां पर बड़े-बड़े मैदान हैं, लेकिन देखभाल नहीं हो पा रही है। खेलने के शौकीन छात्र इन कम संसाधनों में ही बेहतर करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन कई कॉलेजों में खेल शिक्षक नहीं होने से खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा है। हिन्दुस्तान के बोले फिरोजाबाद के तहत राष्ट्रीय श्रमिक उच्चतर माध्यमिक स्कूल में क्रिकेट के खिलाड़ियों से संवाद किया। इनमें कई खिलाड़ी जिला, मंडल तथा प्रदेश स्तर तक माध्यमिक शिक्षा विभाग की प्रतियोगिताओं में भी प्रतिभाग कर चुके हैं सिर्फ बगैर सुविधाओं के। हिन्दुस्तान के साथ संवाद में छात्रों ने कहा कि उन्हें कॉलेज में कोई भी खेल सुविधा नहीं मिल पाती है। थोड़े बहुत संसाधन हैं, जिनसे कॉलेज के आम शिक्षक ही उन्हें प्रशिक्षण देने का प्रयास करते हैं। छात्रों का कहना था कि अगर उन्हें भी बेहतर प्रशिक्षण तथा सुविधाएं मिलें तो वह भी खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ सकते हैं। कई छात्र स्कूल के खेल मैदान को दिखाते हुए कहते हैं कि पूरे मैदान में कहीं गड्ढे हैं तो कहीं पर कचरा है। बरसात होने पर पानी भर जाता है तो भी अभ्यास प्रभावित होता है। कई खेलों की सामग्री भी नहीं है। इस स्थिति में जो सामग्री है, उससे ही अभ्यास करना पड़ता है। ऊबड़-खाबड़ पिच पर अभ्यास करने के बाद जब टूर्नामेंट में अच्छी पिच पर खेलने जाते हैं तो कई बाहर खेल प्रदर्शन बेहतर नहीं हो पाता है। वहीं खेल शिक्षक के न होने से नई-नई तकनीक का भी ज्ञान नहीं होता है। छात्रों की मानें तो स्कूल-कॉलेज में खेल शिक्षक की नियुक्ति करनी चाहिए। देहात में मिनी स्टेडियम, शहर में जाना पड़ता है दूर सरकार देहात क्षेत्र में मिनी स्टेडियम खोल रही है, ताकि छात्र वहां पर खेल का प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें, लेकिन शहर में स्टेडियम शहर से काफी दूर बनाया गया है। इस स्थिति में कई बार खिलाड़ी स्टेडियम में भी नहीं पहुंच पाते हैं तो खेल स्टेडियम में भी सभी खेल के कोच नहीं है। इस स्थिति में अन्य खेलों के शौकीन छात्रों के समक्ष कई तरह की दिक्कतें भी खड़ी हो जाती हैं। आर्थिक अभाव में यह क्रिकेट एवं अन्य खेलों की प्राइवेट कोचिंग भी नहीं ले पाते हैं तथा इस स्थिति में इनकी खेल प्रतिभा भी उभरकर सामने नहीं आ पाती है। मन की बात हम शतरंज में प्रदेश स्तर तक खेलकर आए हैं। जिले एवं मंडल में भी हमने अच्छा प्रदर्शन किया। प्रदेश में हमें शतरंज में 12 वां स्थान मिला था। कॉलेज स्तर पर कोई खेल शिक्षक नहीं हैं। इस स्थिति में सरकार को हर जिले में कोच की व्यवस्था करते हुए शहर में ही प्रशिक्षण दिलाा चाहिए। - मुल्कराज सिंह हम मंडल स्तर तक खेलकर आए हैं। क्रिकेट खेलने के शौकीन हैं, लेकिन स्कूल में खेल की सुविधाएं नहीं हैं। खेल का मैदान भी सही नहीं है। जो संसाधन हैं, उनमें ही अभ्यास करते हैं। कम से कम स्कूल में खेल सुविधाएं बढ़ाने की तरफ सरकार को ध्यान देना चाहिए। - नवीन हम अपना अभ्यास सामान्य मैदान पर करते हैं। कॉलेज में खेल का मैदान ही नहीं है। बाहर जाने पर बेहतर मैदान एवं पिच पर प्रदर्शन करना पड़ता है। इस स्थिति में हमारा खेल प्रदर्शन भी कमजोर पड़ जाता है। सरकार को कॉलेजों में खेल के मैदान बनवाने की तरफ ध्यान देना चाहिए। - अनमोल हम क्रिकेट खेलने के शौकीन हैं, लेकिन कॉलेज में अच्छा मैदान नहीं है। फिरोजाबाद में स्टेडियम भी काफी दूर है, जहां पर अकेले अभिभावक नहीं जाने देते हैं। सरकार को कॉलेजों में खेल सामग्री की व्यवस्था करनी चाहिए। वहीं स्कूलों में खेल प्रशिक्षकों की तैनाती हो। - प्रवीन स्कूल-कॉलेजों में खेल के मैदानों को विकसित करना चाहिए। हमारे स्कूल में खेल का मैदान काफी अस्त-व्यस्त है, जिसे खेल का मैदान भी नहीं कहा जा सकता है। सरकार के द्वारा खेलो इंडिया पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन कॉलेजों में खेल के लिए व्यवस्थाएं भी नहीं हैं। - सनी हम यहां पर साथियों के साथ में अभ्यास करते हैं, लेकिन बेहतर खेल का मैदान भी नहीं है। बगैर नेट एवं मैदान के आखिर कैसे बेहतर प्रशिक्षण पा सकते हैं। अगर सरकार अभ्यास के लिए मैदान एवं बेहतर संसाधन मुहैया कराए तो खिलाड़ी भी बेहतर प्रदर्शन कर खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ सकते हैं। - सीटू ंकॉलेज में अभ्यास करने को अच्छा मैदान भी नहीं है। फिरोजाबाद में कहीं पर स्टेडियम भी नहीं है। अन्य कॉलेजों के मैदान में थोड़ा बहुत अभ्यास करते हैं। प्राइवेट स्तर पर क्रिकेट की कोचिंग काफी महंगी होती है। सरकारी स्तर पर शहर में कोचिंग की व्यवस्था नहीं है। - अर्जुन क्रिकेट के अभ्यास में काफी दिक्कत होती है। क्रिकेट के अभ्यास के लिए पिच अच्छी होनी चाहिए। किसी भी खिलाड़ी के आगे बढ़ने के लिए जरूरी है कि अभ्यास बेहतर हो, लेकिन यहां पर ऊबड़-खाबड़ मैदान में ही अभ्यास करने को मिलता है। इस स्थिति में आखिर प्रतिभा कैसे निखर पाएंगी। - आनंद

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