3.58 करोड़ से बदलेगा नारखी के मंदिरों का स्वरूप, होगा सौंदर्यीकरण
Firozabad News - फिरोजाबाद के नारखी विकासखंड के प्राचीन मंदिरों के सौंदर्यीकरण और पर्यटन विकास के लिए प्रदेश सरकार ने 3.58 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। इनमें श्री शिव मंदिर, राधाकृष्ण मंदिर और शिव मंदिर गढ़ी हंसराम शामिल हैं। इससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और क्षेत्र धार्मिक पर्यटन का नया केंद्र बनेगा।

फिरोजाबाद। नारखी विकासखंड के प्राचीन एवं आस्था के केंद्र माने जाने वाले मंदिरों को अब एक नया रूप मिलने जा रहा है। प्रदेश सरकार और पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने इन मंदिरों के सौंदर्यीकरण और पर्यटन विकास के लिए 3.58 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। जिला पंचायत अध्यक्षा हर्षिता सुमित प्रताप सिंह ने प्रस्तावों को पर्यटन विभाग को भेजा था जिनको मंजूरी देते हुए यह राशि स्वीकृत की है। जिला पंचायत अध्यक्षा हर्षिता सुमित प्रताप सिंह ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत श्री शिव मंदिर आसलपुर के लिए 1.22 करोड़ रुपये, राधाकृष्ण मंदिर बड़ा गांव के लिए 1.49 करोड़ रुपये और शिव मंदिर गढ़ी हंसराम के लिए 85.88 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
नारखी क्षेत्र के मंदिर धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं और यहां पर वर्षभर श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहता है। विभिन्न अवसरों पर धार्मिक आयोजन भी होते हैं, जिनमें दूर-दराज से भक्त शामिल होते हैं। लेकिन लंबे समय से ये मंदिर जीर्ण-शीर्ण अवस्था में थे और यहाँ पर आवश्यक पर्यटन सुविधाओं का अभाव था। उन्होंने बताया कि स्वीकृत धनराशि से मंदिरों का सौंदर्यीकरण, भव्य प्रवेश द्वार, मल्टीपर्पज हाल, शौचालय, आंतरिक फ्लोरिंग, पार्क, पर्यटन कियोस्क, स्टोन बेंच, साइनेज, म्यूरल वॉल तथा आवश्यकतानुसार सड़क निर्माण जैसे कार्य कराए जाएंगे। मंदिरों के लिए पहली किश्त शासन से जारी:सुमित पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के प्रतिनिधि सुमित प्रताप सिंह ने बताया कि शासन ने तीनों मंदिरों के लिए प्रथम किश्त के रूप में कुल 2.40 करोड़ रुपये की धनराशि जारी कर दी है, जिसमें श्री शिव मंदिर आसलपुर के लिए 80 लाख, श्री राधाकृष्ण मंदिर बड़ा गांव के लिए 1 करोड़ तथा शिव मंदिर गढ़ी हंसराम के लिए 60 लाख रुपये शामिल हैं। उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कॉर्पोरेशन लिमिटेड को इन मंदिरों में पर्यटन विकास कार्य कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही जल्द ही कार्य शुरू करा दिया जाएगा। इस कदम से न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं को सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि यह क्षेत्र धार्मिक पर्यटन के एक नए केंद्र के रूप में विकसित होगा, जिससे स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा।
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