बोले फिरोजाबाद: रासायनिक रंग से बचें, हर्बल से खेलें होली
Firozabad News - होली का त्योहार रंगों का पर्व है, लेकिन रासायनिक रंग त्वचा और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं। हर्बल रंगों का उपयोग करने की सलाह दी जा रही है, जो एलर्जी और जलन से बचाते हैं। लोगों ने गुलाल का उपयोग बढ़ाया है। हर्बल रंग न केवल सुरक्षित हैं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहतर हैं।
होली का पर्व रंगों के त्योहार के नाम से जाना जाता है। महिलाएं, पुरुष और बच्चे एक दूसरे पर अबीर, गुलाल के संग रंग की बौछार करते हैं। रासायनिक वाले रंग त्वचा में जख्म, एलर्जी, आंखों में जाने से जलन एवं पेट में जाने से घाव तक पैदा कर देते हैं। त्वचा रोग विशेषज्ञ भी इनसे दूरी बनाए रखने की सलाह देते हैं। इन सबसे बचाव करने के लिए हर्बल रंग सबसे अच्छे और उपयुक्त माने जाते हैं। कीमत की बात करें तो हर्बल रंग 30 रुपये से लेकर 100 रुपये प्रति दस ग्राम और सस्ते रंग 20 रुपये से लेकर 50 रुपये प्रति दस ग्राम में मिल रहे हैं।
पिछले कुछ वर्षों से लोगों ने रंगों की अपेक्षा गुलाल से होली खेलना शुरू किया है। जिससे वर्तमान में रंगों की बिक्री 25 प्रतिशत एवं गुलाल की बिक्री 75 प्रतिशत हो गई है। जिले में आगरा, कानपुर, दिल्ली, जयपुर आदि से गुलाल और रंग आता है। सस्ते गुलाल में अरारोट की मात्रा अधिक और महंगे में कम होती है। अरारोट से बनने वाला गुलाल 60 से 150 रुपये किलोग्राम के दाम में उपलब्ध है। जबकि फूलों से बनने वाला गुलाल 300 से 450 रुपये किलो तक में उपलब्ध है। होली पर सबसे अधिक मांग जयपुरिया खुशबूदार गुलाल की रहती है। इसके अलावा पानी में मिलाया जाने वाला हरा एवं लाल रंग की पैकिंग में 20 रुपये की डिब्बी से लेकर 300 रुपये की पैकिंग में मिलता है। आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान के बोले फिरोजाबाद में छात्रों ने कहा कि रासायनिक रंगों से दूर रहकर त्वचा और स्वास्थ्य की रक्षा करें। हर्बल रंग न केवल एलर्जी से बचाते हैं बल्कि फूलों और जड़ी-बूटियों से बने होने के कारण पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। शिक्षिकाओं का कहना है कि हर्बल रंगों में लेड ऑक्साइड नहीं होता, जो आंखों और त्वचा को एलर्जी से बचाता है। इसके साथ ही यह रंग टॉक्सिक नहीं होते और पानी में आसानी से घुल जाते हैं। जिससे पर्यावरण सुरक्षित रहता है। इसलिए सभी लोग इस होली पर जात-पात से ऊपर उठकर प्रेम, भाईचारे और सुरक्षा के साथ रंगोत्सव मनाएं। मन की बात हर्बल (प्राकृतिक) रंगों से होली खेलना त्वचा, बालों और पर्यावरण के लिए बेहद सुरक्षित और फायदेमंद है। यह रंग रसायनों से मुक्त होते हैं और त्वचा को एलर्जी एवं जलन से बचाते हैं। - डॉ.पूजा सिकेरा हर्बल रंग त्वचा पर कोमल होते हैं और किसी प्रकार की क्षति एवं जलन नहीं पहुंचाते हैं। नेचुरल होने के कारण ये बालों को नुकसान नहीं पहुंचाते और त्वचा को नमी प्रदान करते हैं। - डॉ.नंदनी यादव केमिकल मुक्त रंग त्वचा और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं। फूलों, हल्दी और चंदन से बने प्राकृतिक रंग सुरक्षित होते हैं। आसानी से धुल जाते हैं और खुशियों एवं भाईचारे का संदेश फैलाते हैं। - राशि रंगों का त्योहार होली लोग बड़े धूमधाम से मनाते हैं। इस दिन लोग एक दूसरे को रंग, गुलाल और अबीर लगाते हैं लेकिन बाजार में कई रंग केमिकल युक्त होते हैं, जो सेहत को खराब कर सकते हैं। - डोलू इस बार में भी खूब होली खेलूंगी पर सावधानी पूर्वक। केमिकल युक्त रंगों से स्वयं दूरी रख दूसरे लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करूंगी। उन्हें बताऊंगी कि केमिकल युक्त रंगों का उपयोग कतई न करें। - अद्धिका रासायनिक रंगों से होली खेलते समय लोगों को त्वचा से संबंधित परेशानी होती हुई देखी है। इसलिए सभी लोग इस बार होली पर रासायनिक रंगों से दूरी बनाते हुए हर्बल रंगों का उपयोग करें। - सैय्यद हिफजा हसन स्कूल में शिक्षकों ने हम सभी को हर्बल रंगों से ही होली खेलने के लिए प्रेरित किया है। इसलिए या तो बाजार से हर्बल रंग खरीदकर लाएंगे या फिर मां के सहयोग से घर पर ही बनाकर होली त्योहार मनाएंगे। - गार्गी होली का पर्व कई रिश्तों के बीच कड़वाहट को दूर करके बहार लाता है। इसलिए हम सभी लोगों को इस बार का भी ध्यान रखना होगा कि सेलिब्रेट करते समय किसी को परेशानियों का सामना करना पड़े। - खुशी
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