बोले फिरोजाबाद: अपने अधिकारों के लिए बैंक कर्मी हुए मुखर

Feb 12, 2026 11:50 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, फिरोजाबाद
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Firozabad News - बैंक कर्मचारी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर मुखर हैं। केंद्र सरकार कोरे आश्वासन दे रही है, जिससे कर्मचारियों में रोष पनप रहा है। सरकार ने बैंकों का निजीकरण किया है, जिसका विरोध किया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

बोले फिरोजाबाद: अपने अधिकारों के लिए बैंक कर्मी हुए मुखर

बैंक कर्मचारी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर मुखर हैं। केंद्र सरकार निस्तारित करने के बजाय कोरे आश्वासन देकर टालमटोल करती आ रही है। जिसे लेकर अब कर्मचारियों में रोष पनपने लगा है। आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान के बोले फिरोजाबाद के संवाद में बैंक कर्मचारियों ने कहा कि अब अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। केंद्र सरकार के चार नए लेबर कोड हैं, जो कोड 29 पुराने श्रम कानूनों की जगह ले लेंगे। कर्मचारियों के अधिकारों में कटौती होगी। सरकार ने बैंकों, एलआईसी और जीआईसी में निजीकरण एवं विनिवेश कर दिया है। निजीकरण का विरोध सामाजिक सुरक्षा, नौकरी की स्थिरता और आम जनना के वित्तीय समावेशन पर नकारात्मक प्रभाव के आधार पर किया जा रहा है, क्योंकि निजीकरण से मुनाफाखोरी बढ़ेगी और ग्रामीण बैंकिंग सेवाओं में कमी आएगी।

बैंकों में स्टाफ के अभाव में लंबे समय से अत्यधिक कार्य का दबाव और कार्य जीवन संतुलन के अभाव से जूझ रहा है। इन्हें लेकर इससे पहले भी धरना-प्रदर्शन, रैली और ट्विटर अभियान के माध्यम से अपनी मांगों को पूरा कराने का आग्रह किया, लेकिन सरकार अपनी जिद पर अड़ी हुई है। पदाधिकारियों का कहना है, कि बैंकों, एलआईसी और जीआईसी में निजीकरण एवं विनिवेश बंद कर देना चाहिए। आईडीबीआई बैंक को बेचने के निर्णय को वापस लेना चाहिए। बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई वृद्धि वापस लो। सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियों को एक इकाई में विलय करना चाहिए। पर्याप्त भर्तियां सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि कर्मचारी पर कार्य का अधिक बोझ नहीं रहे। युवाओं को स्थाई रोजगार मिल सकेगा। आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा बंद होनी चाहिए और मजदूरों का शोषण रोकना चाहिए। एनपीएस समाप्त करते हुए ओवीएस बहाल कर युवाओं का भविष्य सुरक्षित करो। फिक्स्ड टर्म एम्लॉयमेंट योजना को वापस लेना चाहिए। कॉरपोरेट्स से बकाया, डूबे कर्ज की वसूली के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए। साथ ही आम ग्राहकों के लिए बैंकों में सेवा शुल्क कम करना चाहिए। कर्मचारियों ने एक स्वर में कहा कि यदि केंद्र सरकार ने जल्द से जल्द मांगें पूरी नहीं की तो आंदोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। डिजिटल बैंकिंग सेवाएं रहीं जारी हड़ताल के दौरान सिर्फ बैंक काउंटर बंद रहे। बाकी ग्राहक सेवाएं बिना रुकावट के चलती रहीं। डिजिटल बैंकिंग जैसे इंटरनेट बैकिंग, मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई, कार्ड पेमेंट आदि सही तरीके से काम करते रहे। इस दौरान क्लियरिंग और सेटलमेंट सिस्टम (चेक, ट्रांजेक्शन) प्रभावित नहीं रहे। सरकारी कामकाज से जुड़ी बैंकिंग सेवाएं भी जारी रही। ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में सेवा देने वाले बैंक प्रतिनिधि के माध्यम से सेवाएं चलती रहीं। बैकों में हड़ताल से मायूस लौटे ग्राहक केंद्रीय नेतृत्व के आह्वान पर गुरुवार को पंजाब नेशनल बैंक के अलावा सेंट्रल बैंक, पंजाब सिंध बैंक, कैनरा बैंक, इंडियन बैंक सहित आंशिक बैंकों में पूरी तरह से हड़ताल रही। जिसकी जानकारी के अभाव में कई लोग बैंकों में पहुंचे लेकिन बैंकों में हड़ताल के चलते उन्हें मायूस होकर वापस लौटना पड़ा। सुहागनगर पंजाब नेशनल बैंक में पहुंची शिल्पी का कहना है कि पैसों की बहुत आवश्यकता है, इसलिए बैंक से निकालने के लिए आईं। बोले बैंककर्मी केंद्र सरकार बैंकों के निजीकरण पर अधिक जोर दे रही है। इसी क्रम में आईडीबीआई बैंक को बेचने का निर्णय लिया है। सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियों को एक इकाई में विलय नहीं किया जा रहा है। आउटसोर्सिंग एवं ठेका पर कर्मचारी रखे जा रहे हैं। साथ ही फिक्स्ड टर्म एम्प्लायमेंट योजना लागू कर दी है। - रामप्रताप सरकार ने बैंकों, एलआईसी और जीआईसी में निजीकरण एवं विनिवेश कर दिया है। निजीकरण का विरोध सामाजिक सुरक्षा, नौकरी की स्थिरता और आम जनना के वित्तीय समावेशन पर नकारात्मक प्रभाव के आधार पर किया जा रहा है, क्योंकि निजीकरण से मुनाफाखोरी बढ़ेगी और ग्रामीण बैंकिंग सेवाओं में कमी आएगी। - आकाश बैंकों सहित अन्य सरकारी कार्यालयों में स्टाफ के अभाव में लंबे समय से अत्यधिक कार्य का दबाव और कार्य जीवन संतुलन के अभाव से जूझ रहा है। इनको लेकर इससे पहले भी धरना-प्रदर्शन, रैली और ट्विटर अभियान के माध्यम से अपनी मांगों को पूरा कराने का आग्रह किया, लेकिन सरकार अपनी जिद पर अड़ी हुई है। - मोहम्मद जैद बैंकों, एलआईसी और जीआईसी में निजीकरण एवं विनिवेश बंद कर देना चाहिए। आईडीबीआई बैंक को बेचने का निर्णय वापस लेना चाहिए। बीमा क्षेत्र में सौ प्रतिशत एफडीआई वृद्धि वापस लो। सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियों को एक इकाई में विलय करना चाहिए। पर्याप्त भर्तियां सुनिश्चित करनी चाहिए। - धर्मेंद्र कुमार आउटसोर्सिंग एवं ठेका प्रथा बंद होनी चाहिए और मजदूरों का शोषण रोकना चाहिए। एनपीएस समाप्त करते हुए ओवीएस बहाल कर युवाओं का भविष्य सुरक्षित करो। फिक्स्ड टर्म एम्लॉयमेंट योजना को वापस लेना चाहिए। कॉरपोरेट्स से बकाया, डूबे कर्ज की वसूली के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए। - अशोक माहेश्वरी बैंकों का निजीकरण बंद किया जाए। आईडीबीआई बैंक को बेचने के निर्णय को वापस लेना चाहिए। सभी बैंकों में पर्याप्त मात्रा में भर्तियां निकाली जाएं, ताकि अन्य कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्य का बोझ नहीं रहे। फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट योजना वापस लेनी चाहिए। आम ग्राहकों के लिए सेवा शुल्क कम करना चाहिए। - रविकांत

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