बोले फिरोजाबाद: पोषण बांट रहीं, फिर भी हो रही उपेक्षा
Firozabad News - गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने कई सालों से मेहनत की है, लेकिन शासन की उपेक्षा का सामना कर रही हैं। शैक्षिक योग्यता के बावजूद उन्हें उच्च कार्यों का बोझ दिया जाता है। मानदेय में वृद्धि और सरकारी कर्मचारी का दर्जा मिलने की मांग को लेकर प्रदर्शन की चेतावनी दी गई है।
गर्भवती, धात्री के साथ ही नवजात के पोषण तक सभी कामों की देखरेख की जिम्मेदारी बीते कई सालों से आंगनबाड़ी कार्यकत्री पूरी कर्मठता से निभा रही है। बावजूद इसके शासन स्तर से उनकी लगातार उपेक्षा की जा रही है। जिले में 2045 आंगनबाड़ी कार्यकत्री और सहायिकाएं तैनात हैं लेकिन विभागीय उपेक्षा के चलते उनका कार्य से मोहभंग हो रहा है। आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान के बोले फिरोजाबाद के संवाद में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का दर्द छलक उठा। उनका कहना है कि भर्ती के समय मांगी गई शैक्षिक योग्यता कक्षा 8 एवं 10 थी, बावजूद इसके उच्च शैक्षणिक स्तर के कार्य कराए जा रहे हैं।
बीएलओ, टीकाकरण, पल्स पोलियो अभियान सहित विभिन्न कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। इतना हीं नहीं विभागीय अधिकारी छोटी-छोटी गलती या फिर चूक होने पर सेवा समाप्ति एवं मानदेय रोकने की चेतावनी तक दे रहे हैं। जब विभागीय अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर उत्थान के लिए मांग की जाती है तो कहीं कोई सुनवाई नहीं होती है। विकास भवन से मिली रिपोर्ट के अनुसार जिले में कुल 2540 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें 661 से अधिक शहरी क्षेत्र वहीं अन्य ग्रामीण क्षेत्र में संचालित हो रहे हैं। सरकार इन केंद्रों पर तो सुविधाएं लगातार बढ़ा रही है लेकिन कार्यकत्री और सहायिकाओं की सुविधाओं की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जबकि समय-समय पर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों द्वारा जिला स्तर से लेकर प्रदेश स्तर पर धरना प्रदर्शन कर आवाज उठाई, इसके बावजूद किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंग सका। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने एक स्वर में कहा कि अब जल्द मांगें पूरी नहीं हुई तो आठ मार्च से धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। मातृत्व ग्राफ बढ़ा, फिर भी उपेक्षा:कार्यकत्रियों का कहना है कि पोषण, स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा, टीकाकरण, मातृ-शिशु देखभाल सहित केंद्र एवं प्रदेश सरकार की योजनाओं का प्रचार प्रसार किया जा रहा। इसके बावजूद उन्हें अब तक पूर्णकालिक सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिल सका है। पूर्व में भी कई बार अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सीएम की घोषणा का भी नहीं असर:लगातार मांगों को लेकर प्रदर्शन करने के बाद वर्ष 2025 के सितंबर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मानदेय बढ़ाने और उच्च गुणवत्ता का मोबाइल देने की घोषणा की गई थी, लेकिन अब तक उस पर कोई अमल नहीं हुआ है। जिससे सभी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों में भारी रोष व्याप्त है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो वे लखनऊ में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन करने को विवश होंगी। सेवानिवृत्ति के बाद कोई सहारा नहीं स्वास्थ्य कर्मियों की तरह ही आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने भी कोरोना जैसी महामारी में विभाग के कंधे से कंधा मिलाकर जान की परवाह किए बगैर काम किया। सेवानिवृत्ति के बाद कोई सहारा नहीं मिला। इसलिए जो कार्यकत्री सेवानिवृत्ति हो गई हैं, उन्हें ग्रेच्युटी और पेंशन भी दी जाए। सेवानिवृत्ति की सीमा भी 65 वर्ष की जाए। अभी सेवा समाप्ति के बाद कोई सरकारी लाभ न मिलने से कार्यकत्रियों को परिवार का भरण पोषण करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अभिन्न अंग तो कर्मचारी का दर्जा क्यों नहीं लंबे समय से कार्यकत्रियां सरकार से मांग कर रही हैं कि उन्हें सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। इस पर उनका साफ कहना है कि विभागीय बैठकों के दौरान अधिकारी कार्यकर्ताओं को विभाग का अभिन्न अंग की संज्ञा दे रहे हैं तो फिर कर्मचारी का दर्जा देने में किस प्रकार की परेशानी हो रही है। जो मानदेय निर्धारित किया गया है वह भी सीमित है। हैरत की बात है कि मानदेय भी समय पर जारी नहीं किया जाता है। जिससे कई बार कार्यकत्रियों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। हमारी पीड़ा शासन द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को जो मोबाइल फोन उपलब्ध कराए गए हैं। उनकी हालत खराब है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की बहुत परेशानी रहती है। जिससे कई बार डेटा अपलोड करने में दिक्कत होती है। कई बार इसको लेकर शिकायत की गई है। - लक्ष्मी यादव आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों द्वारा घर-घर सर्वे कर शासन के अभियान पहुंचा रहे हैं। बावजूद इसके मांगों की ओर से ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऐसा नहीं है कि हम सभी कार्यकत्रियों द्वारा समय पर ज्ञापन भी सौंपे जाते हैं लेकिन सुनवाई कहीं होती है। आखिर हम कार्य कैसे करें। - अनीता विभागीय बैठकों के दौरान अधिकारी कार्यकर्ताओं को विभाग का अभिन्न अंग की संज्ञा दे रहे हैं तो फिर कर्मचारी का दर्जा देने में किस प्रकार की परेशानी हो रही है। जो मानदेय निर्धारित किया गया है वह भी सीमित है। मानदेय भी समय पर जारी नहीं किया जाता है। - विनीता स्वास्थ्य कर्मियों की तरह ही आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने भी कोरोना जैसी महामारी में विभाग के कंधे से कंधा मिलाकर जान की परवाह किए बगैर काम किया। सेवानिवृत्ति के बाद कोई सहारा नहीं मिला। इसलिए जो कार्यकत्री सेवानिवृत्ति हो गई हैं, उन्हें ग्रेच्युटी और पेंशन भी दी जाए। - संतोषी कोरोना काल में हम लोगों ने जान की परवाह किए बगैर कार्य किया, ऐसे में सेवानिवृत्त होने वाली कार्यकत्रियों को मानदेय बढ़ोत्तरी के साथ ही भविष्य निधि, ग्रेच्युटी और महंगाई भत्ता आदि की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएं। हमारी मांगें भी पूरी की जाएं। - प्रवाशा पूरी कर्मठता से कार्य करने के बाद भी विभागीय अधिकारी छोटी सी चूक होने पर सेवा समाप्ति व मानदेय रोकने की धमकी देते हैं। विभागीय कार्य की जिम्मेदारी हम लोगों निभा रहे हैं। इसके बाद चुनाव में भी बीएलओ समेत अन्य कार्य दिए जा रहे हैं जो कि गलत हैं। - पुष्पा सभी विभागों के कर्मचारियों की हर साल वेतन बढ़ोतरी होती है लेकिन हम लोगों की ओर किसी का ध्यान नहीं जाता है। इससे परेशानी हो रही है। हर माह नए अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में हम लोगों को लगाया जाता है, जबकि वह विभागीय कार्य भी नहीं है। - सीमा देवी लगातार मांगों को लेकर प्रदर्शन करने के बाद वर्ष 2025 के सितंबर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मानदेय बढ़ाने और उच्च गुणवत्ता का मोबाइल देने की घोषणा की गई थी, लेकिन अब तक उस पर कोई अमल नहीं हुआ है। जिससे सभी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों में भारी रोष व्याप्त है। - मिथिलेश
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