राम मंदिर निर्माण से पहले आरोपियों की हैसियत का होगा आकलन, जेवर से लेकर घर के बर्तन तक गिने जाएंगे
राम मंदिर दान चोरी मामले में एसआईटी की जांच जारी है। पुलिस ने भी अपनी जांच को तेज कर दिया है। अब इस मामले में विजिलेंस की तर्ज पर जांच की जाएगी। मंदिर निर्माण से पहले की आरोपियों की पूरी हैसियत का आंकलन होगा। इस दौरान जेवर से लेकर घर के बर्तन तक का आकलन होगा।

Ram Mandir News: राम मंदिर में चढ़ावे की हेराफेरी कर काली कमाई करने वालों की संपत्तियों की जांच विजिलेंस की तर्ज पर बढ़ेगी। एसआईटी और पुलिस ने आरोपितों व संदिग्धों की आय और व्यय का बीते दो वर्षों का ब्योरा जुटाना शुरू किया है। साथ ही अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण से पहले की उनकी हैसियत का आकलन भी होगा। जेवर, कीमती वस्तुओं, इलेक्ट्रानिक उपकरणों के साथ ही घर की साज-सज्जा में हुए खर्च से लेकर बर्तन तक हर वस्तु की कीमत आंकी जाएगी। कुल आय के बदले किए गए खर्चों का पूरा ब्योरा जुटाया जाएगा। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत हेराफेरी की रकम से जुटाई गईं संपत्तियों को जब्त किए जाने की तैयारी है।
चढ़ावे में हेराफेरी के मामले की जांच का दायरा बढ़ने के साथ ही गिरफ्तार आठ आरोपितों, संदेह के घेरे में आए ट्रस्ट के पदाधिकारियों, स्टेट बैंक आफ इंडिया के अधिकारियों-कर्मियों के साथ ही आउटसोर्स कर्मचारियों के साथ ही उनके रिश्तेदारों के पैन व आधार कार्ड भी जुटाए जा रहे हैं। बीते वर्षों में खरीदी गईं संपत्तियों की जांच के साथ ही उनमें किए गए निवेश के स्रोत तलाशे जा सकें। कई बेनामी संपत्तियां भी पुलिस के निशाने पर हैं, जिन्हें लेकर जानकारियां जुटाई जा रही हैं। जांच का दायरा अब अयोध्या के अलावा कई अन्य शहरों तक पहुंचेगा।
टीम गठन की तैयारी
दूसरे शहरों में भी निवेश के तथ्य सामने आए हैं। सूत्रों का कहना है कि इनकी पड़ताल के लिए अलग टीम के गठन की भी तैयारी है। मामले में संदेह के घेरे में आए तीन बैंककर्मियों और उनके करीबी रिश्तेदारों के बैंक खातों की जानकारी भी जुटाई जा रही है। खासकर हेराफेरी की रकम की बंदरबांट में मुख्य भूमिका निभाने के आरोपी अविनाश शुक्ला और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी रहे आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव की आय और व्यय की जांच तेज की गई है।
अयोध्याकांड पर आरएसएस की भी नजर
चढ़ावा प्रकरण में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ भी बारीक नजर बनाए हुए है। क्षेत्र प्रचारकों के जरिए भी स्थिति पर नजर है। कहा जा रहा है कि अब तक के घटनाक्रम पर एक रिपोर्ट संघ मुख्यालय भेजी गई है। इसमें चंपत राय को निर्दोष बताया गया है। दरअसल मंदिर प्रबंधन की व्यवस्था श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तीर्थ ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के जिम्मे थी। उनके नेतृत्व में ही पूरी व्यवस्था का संचालन होता था। चंपत राय लंबे समय से विश्व हिन्दू परिषद के अलग-अलग पदों पर कार्यरत हैं। उनके कार्य व्यवहार से सभी परिचित हैं। चढ़ावा चोरी में चंपत राय की भूमिका भले ही न हो, लेकिन नेतृत्व करने के नाते सवाल उठ रहे हैं। प्रारंभिक रिपोर्ट में घटना का सिलसिलेवार ब्योरा दिया गया है। चंपत राय, अनिल मिश्रा, गोपाल राव की मंदिर में भूमिका का भी उल्लेख है। चंपत राय की भूमिका पर किसी भी तरह के सवाल नहीं उठाए गए हैं बल्कि व्यवस्थागत कमियों के कारण चंपत राय की भूमिका सवालों के कठघरे में हो गई। चढ़ावे में चोरी का मामला जून के पहले सप्ताह में सामने आया। कहा जा रहा है कि सिक्कों से भरा बैग बाहर मिलने के बाद ट्रस्ट सतर्क हुआ और अपने स्तर से जांच शुरू कर दी। यह भी सही है कि चंपत राय एफआईआर कराने के बजाय पुलिस के साथ खुद पैसों की बरामदगी में निकल गए। बड़ी मात्रा में पैसे बरामद हुए तो एसआईटी जांच के लिए शासन को पत्र लिखा।


