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17 सितम्बर, 2020|9:33|IST

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70 परिवारों के सूख रहे गलों को युवाओं ने किया तर

70 परिवारों के सूख रहे गलों को युवाओं ने किया तर

मलवां ब्लाक के पनई गांव में स्थित करीब 70 परिवारों की दलित बस्ती के लिए यंगिस्तान ने जो करके दिखाया है, वह शायद जिला प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों को आईना दिखाने को पर्याप्त है। इस बस्ती में न कोई हैंडपम्प हैं और न ही पेयजल के लिए कोई अन्य साधन। ऐसे में यहां के लोग सुबह शाम करीब चार सौ मीटर दूर लगे हैंडपम्पों से पानी ढोने को मजबूर थे। गांव के ही छह युवकों ने यहां के लोगों की समस्या को देख खुद के चंदे से बस्ती में एक सबमर्सिबल पम्प लगवा दिया। जिसकी सराहना बस्ती के लोगों समेत क्षेत्र के लोग करते नहीं थक रहे हैं।

45 हजार रुपए से लगा पम्प

गांव के कुलदीप मौर्या, पंकज गुप्ता, राजन प्रजापति, विजय मौर्या, संदीप मौर्या मैथा शरीफ ने दलित बस्ती के लोगों की पेयजल की समस्या को दूर करने का बीड़ा उठाया। पहले तो यह जनप्रतिनिधियों के चौखट के चक्कर लगाए लेकिन निराशा ही हाथ लगी। लेकिन युवाओं ने हार नहीं मानी और खुद चंदा एकत्र करने में जुट गए। इस सराहनीय काम में उन्हें सफलता मिली और 45 हजार रुपए की लागत से बस्ती में एक सबमर्सिबल लगवा कर अपना वादा पूरा किया तो बस्ती के लोगों ने बलइयां लेने से नहीं चूके।

सांसद से मिले आश्वासन के बाद निराशा

युवाओं की टोली ने बस्ती में पेयजल समस्या को दूर करने के लिए हैंडपम्प लगवाने के लिए सांसद एवं केन्द्रीय राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति से मिलकर मांग रखी। कोरोना संकट काल के पूर्व सांसद ने युवाओं को दो हैंडपम्प देने का आश्वासन तो दे दिया लेकिन इधर कोरोना संक्रमण के बीच सांसद की निधि पूरी वापस हो जाने के कारण उन्होंने भी हाथ खड़े कर दिए। जिससे युवाओं ने अपने जिम्मे ही समस्या को दूर करने की ठान ली।

पम्प चलने का समय निर्धारित

बस्ती में सबमर्सिबल पम्प लग जाने के बाद अब उसकी देखरेख एवं आवश्यकतानुसार चलाने को लेकर भी युवाओं ने ध्यान दिया। बस्ती के राम प्रताप कोरी के घर के सामने स्थापित पम्प का स्विच बोर्ड लगाया गया है। जिसमें सुबह शाम पम्प चलाने की समय सारिणी का पम्पलेट चस्पा किया गया है। उसी समय पर बस्ती के लोग एकत्र होकर पानी भरते हैं।

खुशी से झूमें बस्ती के लोग

वर्षो से पेयजल की समस्या से जूझ रहे बस्ती के लोगों को युवाओं द्वारा दिए गए सबमर्सिबल पम्प की सौगात पर बस्ती के लोगों ने खुशी का इजहार किया है। इनका कहना रहा कि जो काम शासन प्रशासन नहीं कर सका वह काम गांव के युवाओं ने कर दिखाया है। चुनाव के समय नेता वोट लेने के लिए तो गांव आते हैं लेकिन पेयजल की समस्या को लेकर कभी किसी ने गम्भीरता नहीं दिखाई। हमारे लिए तो यही युवा ही सहारा बने। जिनकी जितनी सराहना की जाए कम है।

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  • Web Title:Youths dry up the wounds of 70 families