Fatehpur News: सोशल मीडिया और रील के बीच गांवों में जिंदा है गुड़िया की परंपरा

हिन्दुस्तान, फतेहपुर
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Fatehpur News: फतेहपुर में नागपंचमी पर गुड़िया पीटने की परंपरा का जश्न मनाया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की भीड़ थी और मेले में झूले, खिलौने और मिठाई की दुकानों की चहल-पहल थी। हसवा क्षेत्र में बच्चियों ने गुड़िया सड़क पर फेंकी, जिसे लड़कों ने डंडों से पीटा। विषखोर बाबा मंदिर में भी विशाल मेला लगा।

सोशल मीडिया और रील के बीच गांवों में जिंदा है गुड़िया की परंपरा
सोशल मीडिया और रील के बीच गांवों में जिंदा है गुड़िया की परंपरा

Fatehpur News: फतेहपुर। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और रील के दौर में भी गांवों में अभी नागपंचमी पर गुड़िया पीटने जैसी परपंराए जिंदा हैं। सोमवार को जिले भर में गुड़िया पर्व को लेकर उत्साह देखने को मिला। ग्रामीण इलाकों में दोपहर बाद कजरी गीतों संग पेड़ों पर पड़े झूलों के बीच गुड़िया का पर्व उत्साह से मनाया गया। सोमवार सुबह से ही शिवालयों और नाग देवता के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। नागपंचमी के साथ वर्षों पुरानी गुड़िया पीटने की परंपरा भी निभाई गई।

गांवों में श्रद्धालुओं की भीड़

खखरेरु क्षेत्र के हकीमपुर खंतवा, कोट, कुल्ली, रहमतपुर, घरवासीपुर समेत आसपास के गांवों में सुबह से मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। रहमतपुर गांव में नागपंचमी पर लगने वाला सदियों पुराना मेला भी सजा। झूले, खिलौने और मिठाई की दुकानें लगीं। महिलाएं बच्चों के साथ मेले में पहुंचीं। गुड़ की गर्मागर्म जलेबी की खुशबू से पूरा मेला गुलजार रहा और बच्चों की चहल-पहल देखते ही बनी। ग्रामीणों के मुताबिक मेला आपसी भाईचारे और शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ।

गुड़िया पीटने की परंपरा

हसवा क्षेत्र में नागपंचमी पर गुड़िया पीटने की पुरानी परंपरा देखने को मिली। बस स्टॉप से आगे विद्यालय के सामने बच्चियां अपने हाथों से बनाई गई गुड़िया लेकर पहुंचीं। उन्होंने गुड़िया सड़क पर फेंकीं, जिसके बाद पहले से मौजूद बच्चों ने डंडों से उनकी पिटाई की। इस दौरान बच्चों के अभिभावक भी मौजूद रहे और उनका उत्साह बढ़ाते रहे। ग्रामीणों ने बताया कि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और नागपंचमी की शाम इसे विशेष रुप से निभाया जाता है। बिलंदा, केशवपुर, फैजुल्लापुर, शंकरपुर वीर बुधनपुर, रसूलपुर भभैचा, चकमियापुर, मिचकी, फरीदपुर, अंबापुर, बरई खुर्द, खलीलपुर सुल्तानपुर, मोहम्मदपुर नवादा और अब्दुल्लापुर घूरी समेत कई गांवों में भी लड़कियों ने गुड़िया सड़क पर फेंकी और लड़कों ने डंडों से उसे पीटा।

विषखोर बाबा मंदिर में लगा मेला

हसवा ब्लाक के छिछनी गांव में प्रसिद्ध विषखोर बाबा मंदिर में नागपंचमी के मौके पर विशाल मेले का आयोजन हुआ। यहां सैकड़ों वर्षों से मेला लगता है। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में दूध और पीले सरसों चढ़ाए जाते हैं। मंदिर में इकट्ठा हुए सरसों को पुजारी अपने हाथों से वहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को देते हैं। उन सरसों को लाकर लोग घरों में छिड़कते हैं। ऐसा करने से घर में सांप का खतरा नहीं रहता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

✦नागपंचमी पर गुड़िया पीटने की परंपरा कितने समय से चली आ रही है?−
यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है।
Hindustan | Bureau

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