मैं अब एसआईआर से मुक्ति पा जाऊंगा.....
Fatehpur News - बिंदकी के अलियाबाद प्राथमिक स्कूल में शिक्षामित्र अखिलेश कुमार ने काम के दबाव में आकर आत्महत्या कर ली। सुसाइड नोट में उन्होंने बताया कि उनकी बेटी की शादी आठ मार्च को है, लेकिन एसआईआर के कारण उन्हें छुट्टी नहीं मिल रही थी। परिवार ने अधिकारियों पर दबाव डालने का आरोप लगाया है।

बिंदकी। अलियाबाद प्राथमिक स्कूल में फांसी लगा जान देने वाले शिक्षामित्र एसआईआर के काम के चलते किस कदर दबाव में थे, यह उनके शव से बरामद हुए सुसाइड नोट से पता चलता है। सुसाइड नोट में शिक्षामित्र बीएलओ ने साफ लिखा है कि बेटी की शादी आठ मार्च को है, घर का अकेला हूं, लेकिन एसआईआर के चलते उनको छुट्टी नहीं मिल पा रही है। बेटी की शादी के कार्य अधूरे हैं। अब मैं एसआईआर से मुक्ति पा जाऊंगा। अलियाबाद निवासी शिक्षामित्र अखिलेश कुमार के परिजन एसआईआर के दबाव के चलते ही जान देने के आरोप लगा रहे थे। अधिकारी समझाने में जुटे थे।
इस बीच उनकी शर्ट की जेब से मिले सुसाइड नोट ने परिजनों के आरोपों को सच कर दिया है। सुसाइड नोट में लिखा है कि एसआईआर 2026 जीवन मुक्ति। अखिलेश लिखते हैं कि वह काम से झुब्ध हो गए हैं। इस कार्य के लिये मैंने अपने अधिकारी एसडीएम और बीईओ साहब के चक्कर काटे और कहा कि पुत्री का विवाह है, किसी और की ड्यूटी लगा दी जाए, लेकिन कोई अधिकारी कर्मचारी सुनने को तैयार नहीं था। आठ मार्च को कार्यक्रम (बेटी की शादी) है। इतना कार्य होने के बाद भी मैं बीएलओ का कार्य भी निरंतर कर रहा हूं। मेरे घर के कार्य अधूरे रह गए हैं। वह सुसाइड नोट में आगे लिखते हैं कि मैं अकेला व्यक्ति कितना कार्य कर सकता हूं। इससे मैं परेशान होकर जान देने को राजी हो गया हूं। मेरे परिवार की जिम्मेदारी मेरे मरने के बाद चुनाव आयोग करे। मैं अब एसआईआर से मुक्ति पा जाऊंगा। आखरी में बीएलओ अखिलेश कुमार भाग संख्या 206 प्रा. वि. अलियाबाद बिंदकी लिखा हुआ है। सीएचसी से परिजन शव लेकर गांव लेकर जाने लगे तो पुलिस ने रोकने की कोशिश की, जिस पर परिजनों ने हंगामा कर दिया और शव पैदल लेकर ही चल पड़े। जिसके बाद पुलिस को हटना पड़ा। गांव पहुंच कर भी पुलिस शव को कब्जे लेकर पोस्टमार्टम के लिये भेजना चाह रही है, लेकिन परिजन मुकदमें की मांग पर अड़े हैं। मृतक के भाई भूपेश कुमार ने कहा कि जिन लोगों के दबाव में बीएलओ की जान गई है, पहले उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो, 20 लाख का मुआवजा दिया जाए और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी इसके बाद ही शव उठाने दिया जाएगा। रात करीब नौ बजे परिजन मुआवजे और नौकरी की मांग पर शव उठाने के लिये तैयार हो गए। अधिकारियों ने बीस लाख मुआवजा और पत्नी को एक माह के अंदर कस्तूरबा गांधी विद्यालय में नौकरी दिये जाने का आश्वासन दिया। जिसके बाद परिजन राजी हो गए। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया।
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