अवैध संबंध के विरोध में हुई हत्या में तीन को उम्रकैद
Fatehpur News - फतेहपुर में करीब सत्रह साल पहले दिनदहाड़े हसीब की हत्या के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। घटना 14 दिसंबर 2009 को हुई थी जब हसीब को चार आरोपियों ने रोककर बेरहमी से पीटा और गोली मारकर हत्या कर दी थी।

फतेहपुर। करीब सत्रह साल पहले दुकानदार की पत्नी से अवैध संबंध के विरोध में थरियांव थाने के आमापुर चौराहे पर दिनदहाड़े हुई हत्या के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट-एक अशोक कुमार सष्तम की अदालत ने फैसला सुनाया है। कोर्ट ने तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा और 20-20 हजार रुपये जुर्माना अदा करने का आदेश दिया है। सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मौत हो चुकी है। शासकीय अधिवक्ता महेन्द्र सिंह ने बताया कि थरियांव थाने के हसवा कस्बा निवासी हसीब उर्फ फतेहमुहम्मद महोई गांव बारात गया था। 14 दिसंबर 2009 को हसीब चार पहिया वाहन से बारात से लौट रहा था।
जैसे ही वह आमापुर चौराहा के पास पहुंचा, तभी बाबी उर्फ इजहार, मुहम्मद अनवार उर्फ दीपू, हैदर उर्फ मुन्ने और डा.अनवार ने वाहन रोक कर हसीब को बाहर निकाल लिया। आरोपियों ने हसीब पर दोस्त की पत्नी से अवैध संबंध होने की बात कहते हुए बेरहमी से मारा पीटा और फिर हैदर उर्फ मुन्ने की लाइसेंसी दोनाली बंदूक से हसीब पर ताबड़तोड़ कई फायर कर मौके पर मौत के घाट उतार दिया। मृतक के चचेरे भाई रसीद उर्फ लाल मोहम्मद ने चारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजते हुए सभी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान आरोपी डा.अनवार की मृत्य हो गई। बाबी उर्फ इजहार, मुहम्मद अनवार उर्फ दीपू, हैदर उर्फ मुन्ने की शुरू हुई सुनवाई के दौरान प्रत्यक्षदर्शी गवाहों समेत सात लोगों ने गवाही दर्ज कराई। जिस अभियोजन व बचाव पक्ष के वकील ने जिरह कर अपनी दलीलें पेश की। शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि प्रस्तुत किए गए साक्ष्य, अभियोजक की दलीलें और गवाहों के बयान के आधार पर अदालत ने तीनों आरोपियों को घटना के लिए दोषी ठहराते हुए फैसला सुनाया है। शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि चौराहे पर दिनदहाड़े हुई घटना के दौरान लोगों ने हसीब की हत्या होते देखा था। मुकदमें में चार प्रत्यक्षदर्शी गवाह थे। उन्होंने अदालत में बेकाबी से गवाही देते हुए बिंदुवार घटना की जानकारी दी। बताया कि पहले आरोपियों ने हसीब को मारापीटा और बाद में बाबी उर्फ इजहार ने हैदर उर्फ मुन्ने की लाइसेंसी बंदूक से हसीब की गोली मार कर हत्या कर दी। प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के गवाही के कारण आरोपियों की सजा दिलाने में कामयाबी मिली। शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि आर्म्स एक्ट के मामले में बाबी उर्फ इजहार को कोर्ट ने दोषी ठहराया है। जिसमें अदालत ने तीन साल की सजा और दो हजार रुपये जुर्माना अदा करने का आदेश दिया है। अ
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