DA Image
26 नवंबर, 2020|4:15|IST

अगली स्टोरी

जो गांव अति जोखिम में शामिल नहीं, वहीं हुआ बीमार

जो गांव अति जोखिम में शामिल नहीं, वहीं हुआ बीमार

जिले में मलेरिया अति जोखिम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तमाम गांवों को चिन्हित करने का काम किया था। सम्बन्धित गांवों में निरोधात्मक कार्रवाई भी कई थी। लेकिन चौंकाने वाला एक मामले सामने आया है कि जो गांव स्वास्थ्य विभाग द्वारा बनाई गई अति जोखिम की लिस्ट में शामिल ही नहीं था वहीं सबसे अधिक संक्रामक बीमारी फैली।

जनपद के कुल पांच स्वास्थ्य केंद्र विजयीपुर, हथगाम, धाता और देवमई सहित पांच केन्द्रों अन्तर्गत स्वास्थ्य विभाग ने कई गांव ऐसे चिन्हित किए थे जहां मलेरिया व डेंगू के रोगियों के बढ़ने की प्रबल संभावना थी। इन चिन्हित गांवों में डीडीटी 50 फीसदी का अवशेषी कीटनाशक छिड़काव कार्यक्रम भी किया गया। देवमई ब्लाक के कई गांव बीमारी की चपेट में आए लेकिन गौरतलब है कि बहरौली गांव जो मलवां ब्लाक में है उसका नाम इस अति जोखिम वाली लिस्ट में ही नहीं था। जबकि सबसे अधिक डेंगू के मरीज इसी गांव में निकले। बता दें कि पिछले दिनों गांव में फैली बीमारी के चलते डेंगू के 18 केस सामने आए। इतना ही नहीं गांव में कई मरीज मलेरिया के भी निकले। स्वास्थ्य विभाग भी इस गांव में फैली बीमारी के बाद हैरान है। जबकि पूर्व में बीमारी से ग्रस्त गांवों का अध्ययन कर लिस्ट बनाई गई थी। बताया जा रहा है कि लिस्ट में शामिल गांवों के ग्रामीणों को साफ-सफाई में रहने के लिए जागरूक भी किया जा रहा है। मलेरिया मच्छर पैदा होने का कोई एक कारण नहीं बल्कि कई हैं। जिसमें टायर, खाली डब्बे, गड्ढों में भरा गंदा बरसात का पानी भी इनका मुख्य स्त्रोत हैं। जिस कारण एपिडेमिक जैसी स्थिति कभी भी सामने आ सकती है।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:The village which is not involved in extreme risk became ill there