
विवेचक कर रहे मिलान, मुकदमो में बढ़ेंगे नाम
Fatehpur News - फतेहपुर में एसटीएफ ने अवैध परिवहन के मामले में जांच शुरू की है, जिसमें अधिकारियों और लोकेटरों की सांठगांठ का खुलासा हुआ है। दोनों मुकदमों में एआरटीओ और खनिज विभाग के अधिकारियों की संलिप्तता के साक्ष्य मिल रहे हैं। मोबाइल कॉल डिटेल और सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच की जा रही है।
फतेहपुर। अवैध परिवहन के मामले में एसटीएफ द्वारा रायबरेली के लालगंज और जिले के थरियांव थाने में दर्ज कराए गए मुकदमें की विवेचना में विवेचकों को एक जैसे साक्ष्य मिल रहे हैं। जिन अधिकारियों का नाम वहां के मुकदमें में हैं उनकी साठगांठ यहां के लोकेटरों से भी थी। बांदा से लेकर लखनऊ तक एंट्री के बल पर धड़ल्ले से अवैध परिवहन होता रहा। सूत्रों का दावा है कि दोनों मुकदमों में एआरटीओ और खनिज विभाग के अधिकारियों, बाबूओं के साथ लोकेटरों के नाम बढ़ेंगे। एसटीएफ को अधिकारियों की लोकेटरों से सांठगांठ के साक्ष्य मिल रहे हैं। एसटीएफ की निगरानी में हो रही विवेचना में विवेचक भी फूंक फूंक कर कदम कर रहे हैं।
सूत्रों का दावा है कि अधिकारियों और कर्मचारियों के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) खंगाली जा रही है। किन-किन नंबरों पर नियमित बातचीत होती थी, किस समय और किस लोकेशन से कॉल किए गए इन सभी तथ्यों की तकनीकी जांच कराई जा रही है। इसके साथ ही व्हाट्सएप चैट, इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर हुए संपर्कों की भी जांच की जा रही है। शुरुआती जांच में सामने ही आया था कि लोकेटरों और दलालों की अधिकारियों से सीधी साठगांठ थी। ओवरलोड वाहनों की सूचना, चेकिंग प्वाइंट की जानकारी और कार्रवाई से पहले अलर्ट देने जैसे इनपुट इन्हीं माध्यमों से साझा किए जाते थे। इसी आधार पर लोकेटर सक्रिय रहते थे और वाहन चालकों से तयशुदा रकम वसूल की जाती थी। एसटीएफ इन डिजिटल साक्ष्यों को और पुख्ता करने में जुटी है। एआरटीओ पुष्पांजलि मित्रा गौतम के निलंबन के बाद खनिज विभाग एसटीएफ की रडार में है। सोमवार को एक जांच टीम खनिज दफ्तर तक पहुंची थी। दफ्तर के अंदर तक गई और फिर कुछ देर बाद बाहर निकल आई थी। टीम में तीन लोग शामिल थे। चर्चा थी कि एसटीएफ की टीम है। हालांकि अधिकारी ने इस बात की पुष्टि नहीं की है।

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