
लोकेटरों की तलाश में तीन टीमें रवाना, दबिश तेज
Fatehpur News - फतेहपुर में एसटीएफ की सख्ती के कारण लोकेटरों की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। पुलिस ने लोकेटरों के खिलाफ मुकदमे की जांच तेज कर दी है और तीन टीमें दबिश देने निकली हैं। आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस प्रयासरत है। कई आरोपी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।
फतेहपुर। एसटीएफ की सख्ती और मामले में शासन की नजर होने से लोकेटरों की उल्टी गिनती शुरु हो गई है। सदर कोतवाली में लोकेटरों के खिलाफ दर्ज हुए मुकदमें की विवेचना अचानक से तेज हो गई है। लोकेटरों को पकड़ने के लिये पुलिस की तीन टीमें रवाना है। संबंधित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। पुलिस ने लोकेटरों के उपलब्ध नंबरों का सीडीआर निकलवाया है वहीं व्हाट्सएप डाटा के लिये मेटा को मेल भेजी गई है। दूसरी ओर मुकदमें लोकेटरों की जिन गाड़ियों का जिक्र है। उनकी ब्योरा एआरटीओ दफ्तर से निकलवाने के बाद उनके मालिकों और चालकों की तलाश में पुलिस ने छापेमारी शुरु की है।
बता दें कि बीते 11 नवंबर की रात एसटीएफ लखनऊ की टीम ने थरियांव थाने में अवैध परिवहन और एंट्री के सिंडीकेट का खुलासा करते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें एक लोकेटर और ट्रक चालक को एसटीएफ ने पकड़ कर पुलिस के हवाले किया था। दोनों को जेल भेजने की कार्रवाई की गई थी। इस मुकदमें में आरटीओ का चालक, खनन अधिकारी, खनन अधिकारी का गनर राजू और लोकेटर मुकेश तिवारी नामजद हैं। इसके बाद बीते 23 नवंबर को खनन निरीक्षक बीपेंद्र राजभर ने बहुआ निवासी पार्थ ढाबा के संचालक देवांश, बेरागढ़ीवा के रामू यादव और उसके सहयोगी, रायबरेली निवासी कपिल तिवारी सहित 12 लोकेटरों की कार नंबर के आधार पर मुकदमा दर्ज कराया था। कई दिनों से रुकी पड़ी विवेचना ने एसटीएफ की फटकार के बाद रफ्तार पकड़ ली है। सूत्रों का दावा है आरोपित ढाबा संचालक देवांश पुलिस की रडार में है। पुलिस की एक टीम उसके ठिकाने के करीब है। जल्द गिरफ्तारी हो सकती है। अन्य नामजद आरोपी भी फरार हैं। आरोपियों के नाते रिश्तेदारों के यहां पुलिस टीमें पहुंच जानकारी जुटा रही हैं। कोतवाल तारकेश्वर राय ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिये प्रयास जारी हैं। टीमें रवाना है। जल्द गिरफ्तारी की जाएगी। बेरागढ़ीवा के रील बाज ढाबा संचालक ने दर्ज मुकदमें में नाम प्रकाश में आने की आशंका पर फिर से लखनऊ में डेरा डाल दिया है। वहां वह अवने सजातीय सत्ताधारी नेताओं की शरण में बचत का रास्ता तलाश करने में जुटा हुआ। आम चर्चा है कि उसके ढाबा में एआरटीओ, पुलिस, खनिज की अलग-अलग रेट में एंट्री होती थी। एसटीएफ की कार्रवाई बाद ढाबा संचालक भूमिगत हो गया था। कई दिनों बाद लखनऊ से लौट कर आया था। लेकिन कोतवाली में लोकेटरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद और अब विवेचना के तेज होने से फिर से वह भूमिगत हो गया है।

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