खतरों के बीच चल रहे अस्पताल, नहीं है फायर के पुख्ता इंतजाम

Feb 09, 2026 10:04 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, फतेहपुर
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Fatehpur News - फतेहपुर में निजी अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा के मानकों का उल्लंघन हो रहा है। जिले में 500 से अधिक निजी अस्पताल हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग केवल 76 का रिकॉर्ड रखता है। अधिकांश अस्पतालों में अग्निशामक उपकरण अनुपयुक्त हैं। आपातकालीन निकास का अभाव मरीजों की जान को खतरे में डाल रहा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई नहीं कर रहा है।

खतरों के बीच चल रहे अस्पताल, नहीं है फायर के पुख्ता इंतजाम

फतेहपुर। जिले में संचालित निजी अस्पतालों में मनमानी सिर चढ़ कर बोल रही है। जिले हर गांव, गली, नुक्कड में करीब पांच सौ से अधिक निजी अस्पताल चल रहे हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग की लिखापढ़ी में 76 अस्पतालों में ही मरीजों के सेहत ठीक कर रहे है। इसमें भी अधिकतर में फायर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं है। नतीजन यहां इलाज कराने वाले मरीजों पर खतरा मड़रा रहा है। जनपद के निजी अस्पतालों में अग्निशमन उपाय नाकाफी हैं। इक्का-दुक्का अस्पतालों को छोड़ दिया जाए तो इनके वार्डों में फायर सिलेंडर दिखाई नहीं देते। गलियों के अंदर तंग रास्ते हैं और कई अस्पतालों तक फायर ब्रिगेड पहुंचने की व्यवस्था नहीं है।

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ऐसे में कभी किसी घटना के वक्त मुसीबत हो सकती है। इस अस्पतालों को ज्यादातर शटर के अन्दर संचालित किए जा रहे हैं। बता दें कि जनपद के कुल 59 निजी अस्पतालों ने अग्निशमन विभाग से एनओसी ले रखी है, जबकि सीएमओ कार्यालय के कागजों में मौजूदा समय में 76 निजी अस्पताल संचालित हो रहे हैं। निजी अस्पतालों ने अग्नि सुरक्षा के मानकों को ताक पर रख दिया है तो उसके लिए काफी हद तक अग्निशमन विभाग जिम्मेदार है। विभाग इस मामले में दोहरी नीति अपनाता है। विभाग के लोग बराबर मानकों को परखने के नाम पर अस्पतालों में आवाजाही रखते हैं और दूसरे तरीकों से इसका लाभ भी उठाते हैं। शायद यही वजह है जो अभी तक एक भी अस्पताल के खिलाफ विभाग ने कार्रवाई नहीं की। अधिकारी दूसरे तरीके से बचाव करते हैं। हालत यह है कि बेखबर सिस्टम के बीच मरीज लुट रहे हैं। शहर के आबू नगर के पुराने मुगल मार्ग पर संकरी गली में स्थित दो नर्सिंग होम्स की पड़ताल की गई तो यहां शटर के अन्दर संचालित हो रहे एक अस्पताल में अग्निशमन के दो सिलेंडर टंगे मिले। जिसमें एक सिलेंडर नवंबर में ही एक्सपायर हो चुका था। दूसरे नर्सिंग होम में चार सिलेंडर थे, जिसमें दो स्टोर रूम और दो में धूल चढ़ी थी। निजी अस्पतालों में नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है, जिसमें आपातकालीन निकास (एग्जिट गेट) न होना एक गंभीर लापरवाही है। यह स्थिति मरीजों की जान को जोखिम में डाल रही है, विशेष रूप से आग लगने जैसी आपातकालीन स्थितियों में। ऐसे अस्पतालों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच और कार्यवाही नहीं की जा रही है। अधिकांश निजी अस्पतालों में मरीजों के लिए पर्याप्त निकास मार्ग नहीं हैं। जबकि नियमानुसार अस्पतालों में आग से बचने के लिए उचित निकास द्वार होना अनिवार्य है। अधिकारियों से बात पर वह कहते हैं कि जिले में कोई ऐसा अस्पताल नहीं है जो उनकी कार्रवाई की सीधी जद में हो। नियमानुसार पंद्रह मीटर ऊंचाई या पांच सौ वर्ग मीटर जगह वाले अस्पतालों को विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना होता है। ऐसे अस्पतालों में वह लोग चेकिंग और संबंधित कार्रवाई कर सकते हैं। जिले में सभी अस्पताल छोटे हैं और इस श्रेणी में नहीं आते। वह लोग उन्हें सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह ही दे सकते हैं, कार्रवाई का अधिकार उनके पास नहीं है।

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