भारत की प्राचीन परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर है 'ध्यान'
Fatehpur News - फतेहपुर में महर्षि विद्या मन्दिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल में रविवार को अंतर्राष्ट्रीय ध्यान दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बच्चों और शिक्षकों ने ध्यान योग में भाग लिया। प्रधानाचार्य प्रमोद कुमार त्रिपाठी ने बताया कि यह ध्यान भारत की प्राचीन परंपरा का हिस्सा है और इसे हर साल 21 दिसंबर को मनाने की घोषणा की गई है।

फतेहपुर। शहर के महर्षि विद्या मन्दिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल में रविवार को अंतर्राष्ट्रीय ध्यान दिवस का आयोजन किया गया। विश्व शान्ति आन्दोलन के तत्वाधान में आयोजित कार्यक्रम में जहां ध्यान की महत्ता पर बल दिया गया वहीं बच्चों एवं शिक्षकों ने ध्यान योग में शामिल भी हुए। कार्यक्रम का शुभारम्भ वैदिक गुरु परंपरा पूजन से संपन्न हुआ। प्रधानाचार्य प्रमोद कुमार त्रिपाठी ने बताया कि जिस भावातीत ध्यान का प्रारम्भ पूज्य महर्षि महेश योगी जी ने 70 वर्ष पूर्व किया था। उसके फलस्वरूप यूएन महासभा ने भी छह दिसम्बर वर्ष 2024 को सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करके वैश्विक शान्ति और सदभाव के लिए हर वर्ष 21 दिसम्बर को विश्व ध्यान दिवस मानाने की घोषणा की है, जो हर्ष का विषय है।
कहा कि ध्यान भारत की प्राचीन परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है। ये एक ऐसी तकनीक है जो व्यक्तिगत जीवन में शरीर, मन और आत्मा का समन्वय कर सामाजिक और राष्ट्र जीवन में भी सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह करती है। आज समय की आवश्यकता है कि महर्षि जी द्वारा प्रदत्त सहज, सरल, स्वाभाविक और प्रयासहीन भावातीत ध्यान की पद्धति का हम नियमित अभ्यास कर जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में दक्षता प्राप्त कर स्वयं स्वस्थ, निरोगी व समृद्ध बने तथा सम्पूर्ण राष्ट्र को इसके लाभ से परिचित कराएं। कार्यक्रम के सामूहिक भावातीत ध्यान के अभ्यास में करीब 15 सौ से अधिक बच्चों ने प्रतिभाग किया।

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