भीषण गर्मी में हिंसक हुए आवारा कुत्ते, दोआबा में बढ़े हमले
फतेहपुर में भीषण गर्मी के बीच कुत्तों के काटने के मामले बढ़ रहे हैं। जनवरी से अब तक कुत्तों ने 9340 लोगों को काटा है। जिला अस्पताल में रोजाना 40 से 45 मरीज एंटी रैबीज वैक्सीन लगवा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, तापमान बढ़ने के साथ कुत्तों के हमलों में भी वृद्धि हो रही है।
फतेहपुर, हिन्दुस्तान टीम। जिले में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच कुत्तों के काटने के मामले बढ़ रहे हैं। शहर से लेकर गांव तक रोजाना कुत्ते कई लोगों पर हमला कर रहे हैं। जनवरी से अब तक कुत्ते नौ हजार तीन सौ चालीस लोगों को काट चुके हैं। हालात यह हैं कि जिला अस्पताल समेत सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में रोजाना बड़ी संख्या में कुत्ता काटने के शिकार लोग एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल में रोजाना औसतन 40 से 45 मरीजों को एंटी रैबीज की डोज दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक तापमान बढ़ने के साथ ऐसे मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। कुत्तों के बढ़ते हमलों को देख सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को इन्हें पकड़कर डॉग शेल्टर होम भेजने का आदेश दिया था। लेकिन प्रशासन इस पर कार्रवाई नहीं कर रहा है。
ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में तेजी
ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में भी कुत्ता काटने के मामलों में तेजी आई है। सीएचसी खखरेरू में रोजाना 20 से 25 मरीज पहुंच रहे हैं, जहां 325 डोज उपलब्ध है। पीएचसी गोपालगंज में बुधवार को 21 मरीज पहुंचे, जिनमें दो बंदर काटने के थे। यहां 600 वायल दवा उपलब्ध है। पीएचसी कोराई में छह मरीजों को डोज लगी, जबकि 250 वायल स्टाक में हैं। सीएचसी जहानाबाद में प्रतिमाह 150 से 170 मरीज एंटी रैबीज डोज लगवा रहे हैं। अमौली सीएचसी में रोजाना 15 से 20 मरीज पहुंच रहे हैं। हथगाम सीएचसी में दोपहर तक 38 लोगों को वैक्सीन लगाई गई, जबकि यहां रोज करीब 50 मरीज पहुंचते हैं। पीएचसी देवमई में रोजाना 8 से 10 मरीज आ रहे हैं।
विजयीपुर व छिवलहा की स्थिति चिंताजनक
पीएचसी विजयीपुर में स्टाक लगभग खत्म होने की स्थिति में है। फिलहाल इमरजेंसी के लिए 10 डोज शेष हैं। वहीं छिवलहा नवीन स्वास्थ्य केंद्र में फ्रिज न होने के कारण वैक्सीन भंडारण व्यवस्था प्रभावित है। यहां के मरीजों को कई बार इंतजार करना पड़ता है या उन्हें हथगाम सीएचसी भेजा जाता है। जिससे प्रभावित लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
नगर पालिका पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि आवारा कुत्तों की नसबंदी और पकड़ने की कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित है। मोहल्लों और बाजारों में झुंड बनाकर घूम रहे कुत्तों से लोगों में दहशत का माहौल है। जरा सी चूक हो जाए तो कुत्ते अपना शिकार बना लेते हैं। कई बार बच्चों को अकेले स्कूल भेजने में भी भय लगता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कृपया अपने अनुभव को रेट करें
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


