आंखों में लालिमा और जलन से परेशान लोग, ओपीडी में उमड़ी भीड़
Fatehpur News - फतेहपुर के जिला अस्पताल के नेत्र अस्पताल में कंजक्टिवाइटिस के मरीजों की संख्या में वृद्धि हो रही है। संक्रमण, लालिमा, खुजली और पानी आने की समस्या से पीड़ित मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। अधिकांश मरीज एलर्जिक कंजक्टिवाइटिस से प्रभावित हैं। धूल और परागकण इस संक्रमण के बढ़ने के मुख्य कारण हैं।

फतेहपुर। जिला अस्पताल परिसर स्थित नेत्र अस्पताल की ओपीडी में इन दिनों कंजक्टिवाइटिस पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ी हुई है। आंखों में संक्रमण, लालिमा, खुजली और पानी आने की शिकायत लेकर बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। डाक्टर मरीजों का उपचार करने के साथ संक्रमण से बचाव के उपाय भी बता रहे हैं। मदन मोहन मालवीय नेत्र अस्पताल में रोजाना करीब एक सैकड़ा मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं। इनमें 50 फीसदी से अधिक मरीज एलर्जिक कंजक्टिवाइटिस से पीड़ित पाए जा रहे हैं। डाक्टरों के मुताबिक मौसम में बदलाव, खेतों की मड़ाई के दौरान उड़ी धूल, परागकण और वातावरण में मौजूद एलर्जी कारक तत्व संक्रमण बढ़ाने की प्रमुख वजह हैं। डाक्टरों के अनुसार कई मरीज यह सवाल कर रहे हैं कि मड़ाई खत्म होने और बारिश होने के बाद भी कंजक्टिवाइटिस के मरीजों की संख्या कम क्यों नहीं हो रही। इस पर नेत्र रोग विशेषज्ञ का कहना है कि मड़ाई की धूल और परागकण बारिश के पानी के साथ कीचड़ में मिल जाते हैं। बाद में धूप निकलने पर यही धूल सूखकर वाहनों के टायरों और तेज हवा के साथ दोबारा उड़ती है और आंखों में पहुंचकर संक्रमण फैलाने का कारण बनती है। यही वजह है कि बारिश के बाद भी मरीजों की संख्या में कमी नहीं आ रही है。
प्रमुख लक्षण...
-आंखें लाल होना
-आंखों में जलन या चुभन
-आंसू अधिक निकलना
-किरकिरी महसूस होना
-आंखों में सूजन
आंकड़े...
100 मरीज रोजाना नेत्र ओपीडी में पहुंच रहे हैं
50 से अधिक कंजक्टिवाइटिस मरीज हैं.
40 फीसदी से अधिक एलर्जिक संक्रमण के मामले
कोट-
मड़ाई के बाद बारिश से धूल दब जरूर जाती है, लेकिन सूखने के बाद यही धूल दोबारा उड़ती है और आंखों में पहुंचकर एलर्जी पैदा करती है। मरीजों को धूल से बचाव और आंखों की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
डा. शैलेन्द्र, नेत्र रोग विशेषज्ञ
सामान्य प्रश्न
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