Fatehpur News: हर साल गंगा की बाढ़ में कट जाती तीस बीघा खेती
Fatehpur News: गंगा के चेतावनी बिंदु के पार बहने से तराई वाले गांव में कटान शुरू हो चुकी है। किसानों की करीब 30 बीघा फसल हर साल गंगा और पांडु में समा जाती है। यमुना के जलस्तर में वृद्धि से स्थानीय ग्रामीणों में दहशत है, जिससे गांवों में पानी पहुँचने का खतरा पैदा हो गया है।

Fatehpur News: औंग, संवाददाता करीब सप्ताह भर से अधिक समय से गंगा के चेतावनी बिंदु के पार बहने के कारण क्षेत्र के तराई वाले गांव में कटान शुरू हो चुकी है। हर साल गंगा की जलधारा के उफान पर आने के साथ ही इसकी सहायक नदी पांडु की जलधारा में क्षेत्र के प्रभावित गांव के किसानों की करीब तीस बीघा फसल गंगा व पांडु में समा जाती है। जिससे स्थानीय ग्रामीण खासे हलकान हैं।
बाढ़ का प्रभाव
बीते दिनों से गंगा का जलस्तर स्थित तो है लेकिन गंगा चेतावनी बिंदु 99.86 मीटर से करीब 35 सेंमी ऊपर बह रही है। जिससे गंगा की तराई वाले बिंदकी फारम, सदनहा, कालीकुंडी में गंगा किनारे स्थित खेतों में कटान शुरू हो चुकी है। अब तक गंगा की जलधारा में उक्त गांव की करीब चार बीघा खेती योग्य भूमि समा चुकी है। किसान भोला निषाद, राजसजीवन निषाद, सर्वेश निषाद, योगेंद्र पाल आदि ने बताया कि हर साल गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ ही इसकी सहायक नदी पांडु भी उफान मारने लगती है। इसके बाद जलस्तर कम होने पर तेजी से पानी उतरने के दौरान खेती योग्य भूमि कटकर गंगा में समा जाती है। बताया कि एक अनुमान के अनुसार हर साल दोनो नदियों में जलस्तर बढ़ने व कम होने के दौरान करीब तीस बीघा खेती योग्य जमीन इसकी जलधारा में समा जाती है। वहीं क्षेत्रीय लेखपाल शुभम सिंह ने बताया कि बाढ़ प्रभावित गांवों के साथ ही जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है साथ ही कटान का भी आंकलन किया जा रहा है।
यमुना का जलस्तर बढ़ने से दहशत
जाफरगंज। यमुना का जलस्तर बीते दिनों से लगातार बढ़ता जा रहा है। जिससे तटवर्ती गांव के ग्रामीणों में दहशत दिखाई दे रही है, ग्रामीणों का कहना है कि यमुना का जलस्तर बढ़ने पर क्षेत्र के गंगौली, बिंदौर, सैमसी, ककोरा, गजयीपुर आदि गांव में यमुना का पानी पहुंच जाता है। वहीं मदुरैल नाले के उफान पर आने के कारण आवागमन भी बाधित हो जाता है जिससे खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।


