Hindi NewsUttar-pradesh NewsFatehpur NewsFire Incident at Firecracker Market Raises Questions on Administrative Failures in Fatehpur
कालेज से अनुमति न सहमति,बारूद के ढेर से सजा कैम्पस

कालेज से अनुमति न सहमति,बारूद के ढेर से सजा कैम्पस

संक्षेप:

Fatehpur News - फतेहपुर के एमजी कालेज मैदान में पटाखा मंडी में आग लगने से प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं। व्यापारी और स्थानीय लोग सुरक्षा के अभाव और प्राइवेट ठेकेदारों की कार्यशैली पर चिंता जता रहे हैं। हादसे...

Oct 19, 2025 11:25 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, फतेहपुर
share Share
Follow Us on

फतेहपुर। एमजी कालेज मैदान स्थित पटाखा मंडी में लगी आग के बाद पूरा प्रशासनिक सिस्टम सवालों के घेरे में हैं। कालेज से बगैर अनुमति या सहमति के जबरन कैम्पस बारूद का ढेर सजा दिया गया। करीब चार लाख की आबादी वाले शहर में सिर्फ एक स्थान पर पटाखा मंडी लगा दी गई। वहीं नगर पालिका खुद पटाखा मंडी की व्यवस्था करने में सक्षम है, फिर किसके दबाव में प्राइवेट के हाथों में व्यवस्था सौंप कर हादसे को न्योता दिया गया। हादसे के बाद व्यापारी, दुकानदार और राजनैतिक दल अफसरों की कार्यशैली और व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। हादसे को लेकर हर कोई स्तब्ध है, लोगों का कहना है कि शनिवार शाम पटाखा मंडी में दुकानें स्थापित होना शुरू हुई थी।

LiveHindustan को अपना पसंदीदा Google न्यूज़ सोर्स बनाएं – यहां क्लिक करें।

ग्राहकों की संख्या भी कम थी, रविवार शाम या सोमवार को खरीददारों की भारी भीड़ जुटती, ऐसे में तब हादसा होता को मंजर अति भयावह होता। व्यापारी नेताओं प्रदीप गर्ग का कहना है कि शहर की आबादी बढ़ रही है। सुरक्षा और आमजन की सुविधा के लिहाज से उन्होंने बैठक में राधानगर लखनऊ बाईपास समेत तीन अलग अलग स्थानों में पटाखा मंडी स्थापित किए जाने का सुझाव दिया लेकिन उस पर गौर नहीं किया गया। वहीं शहर के वर्मा चौराहा निवासी रामकिशोर शुक्ल का कहना है कि पूर्व के वर्षों में नगर पालिका परिषद नवीन मार्केट के पीछे पटाखा मंडी स्थापित कराती थी, कभी कोई हादसा या अव्यवस्था नहीं हुई लेकिन अब इस व्यवस्था को प्राइवेट लोगों के हाथों सौंप दिया गया। प्राइवेट लोग व्यवस्थाओं पर फोकस न करके सिर्फ कमाई पर ध्यान देते हैं। इस व्यवस्था को बदलने की जरूरत है। वहीं एमजी कालेज के प्राचार्य डा.बृजेन्द्र सिंह ने बताया कि पांच साल पहले फायर ब्रिगेड ने पटाखा मंडी लगाने के लिए अनुमति मांगी, जिसका उन्होंने विरोध किया था, लेकिन बाद में प्रशासन के दबाव में सिर्फ एक साल के लिए कैम्पस में दुकानें सजा दी। उसे परम्परा बना कर हर बार जबरन दुकानें लगाई जाती है। बताया कि कालेज की ओर से उन्होंने कभी भी पटाखा मंडी लगाने के लिए किसी प्रकार की लिखित अनुमित या सहमति नहीं दी है। वह मामले में लिखापढ़ी कर पटाखा मंडी स्थापित किए जाने का विरोध करेंगे। एडीएम अविनाश त्रिपाठी का कहना है कि इस केस में दुकानदारों के नुकसान की भरपाई की व्यवस्था नहीं है, कोई दुकानदार बीमा कराए हैं तो उसे लाभ मिलेगा। फायर ब्रिगेड के करीब होने के कारण बड़ा हादसा टालने में मदद मिली, दूर होने पर स्थिति भयावह हो सकती थी। पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने और फायर ब्रिगेड की लापरवाही से हादसा हुआ है। गनीमत हैं कि कोई जनहानि नहीं हुई लेकिन कई परिवार हादसे के बाद तबाह हो गए। कई दुकानदारों ने कर्ज लेकर अस्थाई दुकानें लगा रही है। हादसे के बाद उनके घरों में मातम परसा है। प्रशासन दुकानदारों के हुए नुकसान की भरपाई कराएं। प्रदीप गर्ग, राष्ट्रीय अध्यक्ष,आदर्श व्यापार मंडल पटाखा मंडी की क्षमता के अनुसार फायर बिग्रेड द्वारा इसका पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे। साथ ही पटाखा की दुकानों को पूरा करने वाले मानक बालू पानी का ड्रम के भी पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। प्रशासन द्वारा मानकों का ध्यान न देते हुए लापरवाही दिखाई जबकि इस प्रकार के बाजारों के लिए फायर विभाग जिम्मेंदार होता है। जिसका कार्यालय सामने होने के बावजूद हादसा हो गया। राजेंद्र त्रिवेदी, प्रदेश उपाध्यक्ष-उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल पटाखा मंडी में होने वाला हादसा प्रशासन की बड़ी चूक के कारण घटित हो गया। प्रशासन को लाइसेंस के एवज में दुकानदारों को सुविधाएं दी जानी चाहिए। इसके बावजूद सुविधाओं का टोटा रहा। यदि व्यवस्थाएं पर्याप्त की जाती तो इतनी बड़ी क्षति होने से रोका जा सकता था। छोटे व्यापारियों के होने वाले नुकसान के एवज में उन्हे मुआवजा देना चाहिए जिससे उनके होने वाले नुकसान की भरपाई हो सके। किशन मेहरोत्रा, संस्थापक-उद्योग व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश फायर विभाग व ठेकेदार की मिलीभगत के कारण इतना बड़ा हादसा हो गया। फायर बिग्रेड द्वारा पटाखा मंडी में पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई थी। वहीं नगर पालिका के स्थान पर माफिया बने ठेकेदार द्वारा एक से दूसरी दुकान की पर्याप्त दूरी भी नहीं दी गई। यदि दुकानों में दूरी होती तो शायद इतना बड़ा हादसा न हो पाता। प्रशासनिक लापरवाही के कारण कर्ज लेकर काम करने वाले छोटे व्यापारियों का नुकसान हो गया, जिनके लिए मुआवजे की मंाग की जाएगी। रविप्रकाश दुबे, प्रदेश अध्यक्ष-जिला उद्योग व्यापार मंडल