अंधविश्वास की बेड़ियों में जकड़ा बचपन.. सूखा रोग पर भारी पड़ रहा झाड़-फूंक का खेल

Apr 07, 2026 11:59 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, फतेहपुर
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अंधविश्वास की बेड़ियों में जकड़ा बचपन.. सूखा रोग पर भारी पड़ रहा झाड़-फूंक का खेल

फतेहपुर, संवाददाता। दोआबा में मासूमों की सेहत और अंधविश्वास के बीच जंग छिड़ी हुई है। सूखा रोग (रिकेट्स) से पीड़ित बच्चों के लिए आधुनिक चिकित्सा के बजाय ताबीज और भभूत का सहारा लेना उनके जीवन पर भारी पड़ रहा है। जिला अस्पताल के विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर इलाज न मिलने और घरेलू टोटकों के चक्कर में बच्चों की स्थिति गंभीर हो रही है, जिससे उनके बचने की संभावना कम हो जाती है।अस्पताल से ज्यादा बाबाओं पर भरोसाजिला अस्पताल की बाल रोग ओपीडी में तैनात डॉ. मूलचन्द्रा के अनुसार, हर दिन ओपीडी में दो से से बच्चे सूखा रोग से पीड़ित आ रहे हैं।

चिंताजनक पहलू यह है कि परिजन पहले झोलाछाप र ताबीज वाले बाबाओं के पास चक्कर काटते हैं। जब बच्चा निढाल हो जाता है और हड्डियां टेढ़ी होने लगती हैं, तब उसे अस्पताल लाया जाता है। शुक्रवार को भी ऐसे ही चार गंभीर बच्चे पहुंचे, जिन्हें भर्ती करने की सलाह दी गई, लेकिन परिजन उन्हें वापस घर ले गए जो कि उनके जीवन के साथ बड़ा खिलवाड़ है।ताबीज,भभूत से नहीं, पोषण से सुधरेगी सेहतएनआरसी में तैनात डॉ. रघुनाथ सिंह ने बताया कि कई मामलों में देखा गया है कि लोग जड़ी-बूटी की घुट्टी या भभूत के जरिए इलाज का दावा करने वाले ठगों के जाल में फंस जाते हैं। यह कोई दैवीय प्रकोप नहीं बल्कि शरीर में विटामिन और खनिजों की कमी है। जब तक लोग झोलाछाप के चक्कर में रहेंगे, तब तक बच्चों की हालत बिगड़ती रहेगी।क्या है सूखा रोग और क्यों होता है?एनआरसी प्रभारी के अनुसार, सूखा रोग मुख्य रूप से विटामिन डी, कैल्शियम और फास्फेट की कमी के कारण होता है।1-लक्षित आयु: 6 माह से 3 वर्ष तक के बच्चे।2-प्रमुख लक्षण: हड्डियों का कमजोर होकर टेढ़ा हो जाना, पसलियों का उभरना और शारीरिक विकास रुक जाना।3- मुख्य कारण: कुपोषण और धूप की कमी।सावधान! देरी पड़ सकती है भारीडॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि सूखा रोग लाइलाज नहीं है। यदि शुरुआती लक्षणों में ही बच्चे को अस्पताल लाया जाए, तो केवल सिरप और सही खान-पान से वह पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है। लेकिन अंधविश्वास के कारण होने वाली देरी बच्चों को एनआरसी (पोषण पुनर्वास केंद्र) में भर्ती करने की नौबत ला देती है।

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