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24 सितम्बर, 2020|8:46|IST

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अनलॉक में पड़ने वाले त्योहारों पर टिकी व्यापारियों की उम्मीद

अनलॉक में पड़ने वाले त्योहारों पर टिकी व्यापारियों की उम्मीद

कोरोना काल की मार से उबरने के लिए व्यापारियों की निगाह सहालग और त्योहारों पर टिकी हुई है। उन्हें उम्मीद है कि पितृपक्ष के बाद बाजारों में ग्राहकों की चहल पहल तेज होगी। नवरात्र पूजा और अन्य त्योहारों को लेकर लोग खरीददारी करेंगे। खास कर सहालग के मुहूर्त कम होने के कारण लोग पहले ही खरीददारी करने के लिए बाजार पहुंचेंगे। जिसे लेकर व्यापारियों ने तैयारी तेज कर दी है।

कोरोनाकाल में गल गई जमापूंजी,आगे टिकी उम्मदी

कपड़ा व्यवसाई राजकुमार रस्तोगी का कहना है कि लॉक डाउन के बाद से व्यापार अपनी रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। जिससे लगता है कि त्योहार पर व्यापार पूर्व की तरह से नहीं होगा हालांकि तैयारियां शुरू कर दी है। इसके साथ ही सहालग के लिए लोगों ने पहले ही सारी तैयारियां कर ली थी इसका भी प्रभाव पड़ेगा। उधर रेडीमेड व्यवसाई बल्लभ रस्तोगी का कहना है कि बाजार खुलने के बाद कोविड काल के दौरान बैंक आदि का रुपया अदा करने के बाद पूंजी ही नहीं बची तो तैयारियां क्या करें, जो पहले की तैयारियां की गई वही सामान बेचा जा रहा है।

नो प्राफिट नो लाॅस पर है कारोबार

सर्राफा कारोबारी राजेश गुप्ता का कहना है कि वर्तमान में नो प्राफिट नो लास में काम चल रहा है। एक दिन अच्छी दुकानदारी होने के बाद तीन दिनों तक ग्राहकों का इंतजार करना पड़ता है। हालांकि सहालग से उम्मीदें तो है लेकिन पूर्व में कैंसिल होने वाली सहालग के चलते लोगों द्वारा की गई तैयारियों की वजह से खास असर नहीं पड़ेगा। इसी प्रकार पप्पन रस्तोगी का कहना है कि पूर्व की अपेक्षा बाजार पूरी तरह से खुल जाने से काम तो कुछ बढ़ा है लेकिन इस बीच महंगाई की मार झेल रहे लोगों से दुकानदारी होने की अधिक उम्मीदें नही है।

मार्केट को लेकर असमंजश कैसे करें तैयारी

फर्नीचर व्यवसाई सोनू गुप्ता ने बताया कि लॉक डाउन के बाद अनलॉक होने पर हालांकि पूर्व की अपेक्षा कुछ दुकानदारी बढ़ी है। लेकिन कोई खास असर नहीं पड़ा, करीब पांच माह कारोबार पूरी तरह से बंद होने के कारण जमापूंजी भी करीब-करीब समाप्त हो चुकी है जिसके चलते तैयारियां बड़े स्तर पर नहीं की जा रही। उधर परवेज खान का कहना है कि सहालग के साथ त्योहारी सीजन होने से फर्नीचर के कारोबार पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा जिसके चलते अभी तैयारियों में तेजी नहीं लाई गई है। हालांकि सहालग से उम्मीदें तो है लेकिन सशर्त आयोजन का असर पड़ेगा।

सहालग हैं आखिरी उम्मीद

इलेक्ट्रानिक व्यवसाई मो. अंजुम का कहना है कि कोविड काल के पहले सहालग की तैयारियां की जा चुकी थी। इसी बीच अचानक कोरोना संक्रमण को देखते हुए लॉकडाउन किए जाने के बाद सभी तैयारियां धरी की धरी रह गई हालांकि इस दौरान लोगों ने भी शादियों की खरीददारी की थी जो शादियां रद्द होने से सामान उनके पास ही रखा है जिसके चलते सोच समझकर तैयारियां की जा रही है। अविनाश का कहना था कि पूर्व की अपेक्षा इस सहालग से एक बार फिर दुकानदारी बढ़ने की उम्मीदें जागी है हालांकि इस समय दुकानदारी अधिक नहीं बची है।

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  • Web Title:Expect merchants resting on unlocked festivals