
दो माह बाद भी खनन अधिकारी का नाम नहीं खोल पाई पुलिस
Fatehpur News - फतेहपुर में अवैध परिवहन के मामले में अधिकारियों की संलिप्तता का खुलासा हुआ है। खनन अधिकारी का नाम अभी तक नहीं आया है, जबकि अन्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। मंत्री ने कहा कि जांच जारी है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
फतेहपुर। अवैध परिवहन के खेल में लोकेटरों संग अधिकारियों की गठजोड़ का खुलासा होने के बाद भी अब तक कई अधिकारी कार्रवाई से बचे हुए हैं। खनन अधिकारी पर पद नाम से हुए मुकदमें के दो माह बीत जाने के बाद भी अब तक पुलिस खनन अधिकारी का नाम खोल पाई है और न ही उनकी भूमिका तय कर पाई है। जबकि वैसे ही मुकदमें में रायबरेली के लालगंज थाने में नामजद हुई एआरटीओ फतेहपुर पुष्पांजलि मित्रा गौतम का पुलिस की प्रारंभिक जांच के बाद निलंबन हो चुका है। बता दें कि थरियांव थाने क्षेत्र में 11 नवंबर की रात एसटीएफ लखनऊ की टीम ने अवैध परिवहन के मामले में बड़ा खुलासा किया था।
ट्रक चालक और लोकेटर को मौके से गिरफ्तार किया था। लोकेटर धीरेंद्र सिंह, चालक विक्रम, एआरटीओ के गनर बबलू पटेल, खनन अधिकारी, इसके गनर राजू व लोकेटर मुकेश तिवारी के खिलाफ केस दर्ज कराया था। विवेचना सीओ थरियांव वीर सिंह को मिली थी। वह विवेचना कर रहे हैं। ढाबा संचालकों के नाम प्रकाश में आए हैं। जिसमें ढाबा संचालक देवांश और विकास पटेल को गिरफ्तार कर पुलिस जेल भेज चुकी है। रंगबाज ढाबा संचालक सहित कई नामजद फरार हैं। खनन अधिकारी के नाम को किसका संरक्षण खनन अधिकारी का अब तक की जांच में नाम सामने न आना अपने आप में पुलिस की कार्रवाई को सवाल खड़े करता है। एक जैसे मामले में ही एआरटीओ, पीटीओ का निलंबन और दूसरे अधिकारी को अब तक कार्रवाई से दूर रखना हैरान करने वाला है। चर्चा है कि खनन अधिकारी को कुछ नेताओं का संरक्षण प्राप्त है। जिसके चलते पुलिस भी नाम का खुलासा नहीं कर पा रही है। मंत्री बोले जांच जारी है कोई बचेगा नहीं प्रभारी मंत्री अजीत पाल ने खनन अधिकारी के सवाल पर कहा कि पुलिस अपना काम कर रही है। मामले की पूरी निगरानी शासन स्तर पर हो रही है। जो भी दोषी अधिकारी, कर्मचारी होंगे हमारी सरकार में बचेंगे नहीं। जीरो टारलेंस की नीति पर सरकार काम कर रही है।

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