समय से पहले प्रसूताओं की छुट्टी पड़ सकती है भारी
फतेहपुर में सरकारी और निजी अस्पतालों में सामान्य प्रसव के बाद प्रसूताओं को निर्धारित समय से पहले छुट्टी देने का मामला बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि मां और नवजात को 24 से 48 घंटे तक डॉक्टर की निगरानी में रहना चाहिए। समय से पहले छुट्टी मिलने पर जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है।

फतेहपुर, संवाददाता। सरकारी और निजी अस्पतालों से सामान्य प्रसव के बाद प्रसूताओं को निर्धारित समय से पहले छुट्टी दिए जाने का मामला चिंता का विषय बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में प्रसूता और नवजात को कम से कम 24 से 48 घंटे तक डॉक्टर की निगरानी में रखा जाना चाहिए, जिससे प्रसव के बाद जटिलताओं की समय रहते पहचान कर इलाज किया जा सके। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शिवानी बाजपेयी ने बताया कि सामान्य प्रसव के बाद शुरुआती 24 घंटे बेहद संवेदनशील होते हैं। इस दौरान अधिक रक्तस्राव, संक्रमण, ब्लड प्रेशर असंतुलन, नवजात को सांस लेने में दिक्कत या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं सामने आ सकती हैं।
समय से पहले छुट्टी मिलने पर ऐसी स्थितियों में तत्काल चिकित्सकीय सहायता न मिलने से मां और शिशु दोनों की जान खतरे में पड़ सकती है। जिला महिला अस्पताल पहुंची कुछ महिलाओं के परिजनों ने भी बताया कि कई निजी अस्पतालों में प्रसव के कुछ घंटों बाद ही डिस्चार्ज कर दिया जाता है। उनका कहना है कि अस्पताल प्रबंधन बेड खाली कराने और अधिक मरीज लेने के उद्देश्य से ऐसा कर रहा है। वहीं मामले में एसीएमओ डॉ. पीके सिंह का कहना है कि प्रसव के बाद प्रसूता और नवजात की स्थिति पूरी तरह सामान्य होने और चिकित्सकीय परीक्षण के बाद ही छुट्टी दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि शासन की गाइड लाइन के अनुसार सामान्य प्रसव में 24 से 48 घंटे तक निगरानी जरूरी है। फिलहाल अभी तक ऐसी शिकायत विभाग के पास नहीं आई है, यदि कहीं निर्धारित समय से पहले छुट्टी दिए जाने की शिकायत मिलती है तो जांच कर सम्बन्धित पर कार्रवाई की जाएगी।
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