नहाय खाय के साथ छठ पूजा की आज से शुरुआत

नहाय खाय के साथ छठ पूजा की आज से शुरुआत

संक्षेप:

Fatehpur News - -पूर्वांचल और बिहार के लोगों में छठ पर्व पर दिख रहा उत्साह -पूर्वांचल और बिहार के लोगों में छठ पर्व पर दिख रहा उत्साह-पूर्वांचल और बिहार के लोगों में

Oct 25, 2025 05:53 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, फतेहपुर
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फतेहपुर, संवाददाता। छठ महोत्सव पर अपने जिले में भी पूर्वांचल की लोक संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। आज यानि शनिवार से नहाय खाय के साथ चार दिवसीय छठ पर्व का अनुष्ठान शुरू हो रहा है। इनके घरों में दीपावली से कम उत्साह नहीं है। शहर में पूर्वांचल और बिहार के करीब आधा सैकड़ा लोग अलग अलग स्थानों में रहते हैं जो विभिन्न क्षेत्रों में या तो काम कर रहे हैं या फिर यहां पर स्थायी रूप से रहने लगे हैं। पीएसी कालोनी, रेलवे कालोनी समेत विभिन्न स्थानों में परिवार रहते हैं। छठ पर्व को मनाने को पूर्वांचल और बिहार के लोग दीपावली के बाद से ही बेचैन रहते हैं।

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पीएसी में जो लोग बिहार और पूर्वांचल के रहते हैं उनके घर परिवार में इस पर्व को लेकर बच्चों से लेकर बुजुर्गो में खासा उत्साह दिखाई पड़ रहा है। शनिवार से चार दिवसीय अनुष्ठान का प्रारंभ हो जाएगा। पहले दिन नहाय खाय का अनुष्ठान होगा। पहले दिन नहाय-खाय तो दूसरे दिन खरना राधानगर में रह रहे दीपक दुबे ने बताया कि पहले दिन घर को पूरी तरह स्वच्छ किया जाता है और फिर नहाने के बाद शुद्ध शाकाहारी तरीके से भोजन व पकवान बनाया जाता है। जिसमें लौकी की सब्जी, दाल चावल जरूर बनाया जाता है। दूसरे दिन वृती महिलाएं शाम को खीर रोटी प्रसाद के रूप में लेती हैं। जिसे खरना कहा जाता है। तीसरे दिन यानि कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन जो अस्त होते हुए सूर्य को अर्ध्य पूजा पाठ के साथ ही चौथे दिन उगते सूरज को अर्ध्य देकर पूजा की जाती है। शनिवार: नहाय खाय 25 अक्तूबर को नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय छठ महापर्व शुरू हो जाएगा। इस दिन छठ व्रती नियम-धर्म से सात्विक भोजन बनाकर प्रसाद स्वरूप ग्रहण करेंगी। छठी मइया को ध्यान कर छठ पूजा 2025 का संकल्प नहाय-खाय पर ही लेने का विधान है। इनसेट रविवार: खरना खरना के दिन छठ व्रती पूरी निष्ठा से छठी मइया को खीर का प्रसाद बनाकर भोग लगाती हैं। लोहंडा का यह प्रसाद घर-परिवार और पास-पड़ोस में जनमानस को ग्रहण कराने का विधान है। इनसेट सोमवार: अस्ताचलगामी सूर्य को दिया जाएगा अर्घ्य 27 अक्तूबर को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पण किया जाएगा। इस दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर छठ व्रती अपने परिवार की सुख-समृद्धि और संतति वृद्धि की कामना आदित्य देव से करते हैं। इनसेट मंगलवार: उदयगामी सूर्य को देंगे अर्घ्य 28 अक्तूबर को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाना है। भागवान भाष्कर के उगते स्वरूप का दर्शन कर छठ व्रती खुशहाली की कामना करती हैं। प्रसाद घाट पर ही ग्रहण कर छठ व्रती चार दिवसीय छठ पर्व का अनुष्ठान समाप्त करती हैं।