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27 अक्तूबर, 2020|5:44|IST

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दोआबा में स्वराज का बिगुल फूंकने आए थे बापू

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आजादी की जंग में दोआबा के योगदान को लेकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को यहां से लगाव था। जो पत्रकार पुरोधा गणेश शंकर विद्यार्थी की हत्या के बाद और भी गहरा हो गया। बाबू कहते थे कि धन्य है फतेहपुर की धरती जहां विद्यार्थी जी जैसे देशभक्तों ने जन्म लिया है। बापू दोआबा के पग दोआबा में दो पार पड़े थे। इक्यानवें साल पहले साइमन कमीशन का विरोध व स्वराज का संदेश लेकर जिले में आए थे। उसके पांच साल बाद रेलवे स्टेशन पर छुआछूत के कलंक को मिटाने का संदेश देते हुए इलाहाबाद निगल गए थे।

विदेशी कपड़ों की होली जलाने की शर्त रखी

अगस्त 1929 को महात्मा गांधी स्वराज आंदोलन को लेकर ट्रेन से इलाहाबाद जा रहे थे। जानकारी पर स्वतंत्रा संग्राम सेनानी शिवदत्त तिवारी समेत कांग्रेसी नेता महात्मा गांधी से मुलाकात करने रेलवे स्टेशन पर पहुंचे थे। स्वतंत्रा संग्राम सेनानी ने बापू के पीए सौकत अली से मिलने का संदेश भेजा था, तब बापू ने पूछा था कि क्या उन्होंने विदेशी कपड़ों की होली जलाई है। नहीं के जबाव पर बापू ने कहा कि जब विदेशी कपड़ों की होली जलाओं तो तब वह सबसे पहले बिंदकी पहुंचेंगे।

बापू को सौंपी थी चार हजार की थैली

विदेशी कपड़ों की होली जलाएं जाने का संदेश मिलने के बाद 20 नवंबर 1929 को महात्मा गांधी स्वराज का बिगुल फूंकने बिंदकी पहुंचे थे। उन्होंने बिदकी के बैलाही बाजार (रामलीला मैदान) में राष्ट्रध्वज फहराने के बाद करीब 13 हजार लोगों को संबोधित किया था। बापू ने मंच से लोगों से चंदा देने की अपील की थी। तब कांग्रेस कमेटी ने बाबू को चार हजार रुपए की थैली और महिलाओं ने गहने उतार कर बापू का भेंट किया था। महात्मा गांधी के बिंदकी से फतेहपुर पहुंचने पर हजारी लाल फाटक में बाबू बंशगोपाल समेत लोगों ने कांग्रेस कमेटी की ओर से अभिनंदन पत्र सौंपते हुए स्वागत किया था। ज्वालागंज रामलीला मैदान में महात्मा गांधी ने करीब दस हजार लोगों को संबोधित किया। यहां उन्होंने कांग्रेस से मिले अभिनंदन पत्र को पचास रुपए में मंच से नीलाम कर कर दिया।

छुआछूत का कलंक मिटाने का दिया था संदेश

करीब पांच साल बाद महात्मा गांधी 22 जुलाई 1934 को ट्रेन से इलाहाबाद जा रहे थे। कांग्रेस एवं हरिजन सेवक संघ के लोगों ने बापू का स्वागत करने स्टेशन पर पहुंचे थे। ट्रेन के आने पर लोगों ने बापू का स्टेशन पर भव्य स्वागत किया। गांधी जी ने माला हाथ में लेकर हरिजन सेवक संघ के पदाधिकारियों के गले में डालते हुए कहा था कि ‘अछूत व छुआछूत को मन से भगाओ, हरिजन को गले लगाओ ' का संदेश दिया था।

विद्यार्थी जी की शहादत से ईष्या होती है

पूर्व विधायक प्रेमदत्त तिवारी ने बताया कि मार्च 1931 को पत्रकार पुरोधा गणेश शंकर विद्यार्थी की हत्या पर महात्मा गांधी ने गहरा दुख जताया था। तब उन्होंने गणेश शंकर विद्यार्थी की शहादत से ईष्या होने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि विद्यार्थी जी मुझसे पहले देश के लिए शहीद हो गए। ऐसे शहीद की धरती धन्य है। जिसके बाद बापू को न सिर्फ फतेहपुर बल्कि उनके पैतृक गांव हथगाम से गहरा लगाव था।

30 किमी पैदल चल किया था अंतिम दर्शन

पूर्व विधायक प्रेमदत्त तिवारी ने बताया कि बापू की शहादत की जानकारी पर बड़ी संख्या में लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए दिल्ली कूच कर गए थे। वह भी ट्रेन से गए थे लेकिन ट्रेनें गाजियाबाद में रोक दी गई थी। जहां वह 30 किमी पैदल अंतिम संस्कार में पहुंच कर अंतिम दर्शन किया था।

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  • Web Title:Bapu came to blow Swaraj 39 s bugle in Doaba