DA Image
हिंदी न्यूज़   ›   उत्तर प्रदेश  ›  फतेहपुर  ›  43 साल,दो हजार हेक्ट.जमीन,19 हजार किसान,परिणाम शून्य
फतेहपुर

43 साल,दो हजार हेक्ट.जमीन,19 हजार किसान,परिणाम शून्य

हिन्दुस्तान टीम,फतेहपुरPublished By: Newswrap
Thu, 17 Jun 2021 05:51 AM
43 साल,दो हजार हेक्ट.जमीन,19 हजार किसान,परिणाम शून्य

फतेहपुर। कार्यालय संवाददाता

कटान के कहर से तबाह हुए सैकड़ों परिवारों में न्याय की उम्मीद धुंधली होती जा रही है। पड़ोसी जिले के कब्जे में गई करीब दो हजार हेक्टयर जमीन की वापसी को लेकर 43 साल से लड़ रहे करीब 19 हजार किसान थक हार गए है। जनप्रतिनिधियों की शून्यता और अफसरों की हीलाहवाली फांकाकसी से जूझ रहे परिवारों पर भारी पड़ रही है। दोनों जिलों के अफसरों की खींचतान,असहयोग और सुरक्षा कारणों की वजह से आज भी परिणाम शून्य हैं।

दोनों जनपदों ने पैमाइश से खड़े किए हाथ

राजस्व परिषद द्वारा डीएम फतहेपुर और बांदा को आदेश जारी कर संयुक्त रूप से पैमाइश कराने का आदेश जारी किया था। गत वर्ष सदर फतेहपुर व पैलानी के नायब तहसीलदार की मौजूदगी में टीमें पैमाइश के लिए पहुंची थी लेकिन लौमर (बांदा) के किसानों के विरोध के कारण अफसरों को बैरंग लौटना पड़ा था। एक माह बाद दोबारा टीम पैमाइश को पहुंची लेकिन किसानों ने विरोध कर पैमाइश रोक दी थी। हालात को भांपते हुए अफसरों ने विवादित जमीन की पैमाइश कराने से हाथ खड़े कर दिए।

सर्वे इकाई से सर्वे कराने को भेजा प्रस्ताव

विवादित जमीन की पैमाइश में आ रही अड़चनों के कारण दोनों जनपदों ने सर्वे इकाई के माध्यम से मामले का निपटारा कराने का निर्णय लिया है। डीएम फतेहपुर और डीएम बांदा ने राजस्व परिषद को लिखापढ़ी करते हुए जमीन पैमाइश में आ रहीं कठनाईयों से अवगत कराया है। उन्होंने एसडीएम सदर फतेहपुर ने कोर्राकनक और एसडीएम पैलानी ने लौमर गांव की रिपोर्ट के आधार पर सर्वे इकाई से विवादित जमीन का निपटारा कराने का प्रस्ताव बोर्ड को भेजा है। जो अभी तक शासन द्वारा निर्णय नहीं लेने के कारण लंबित हैं।

अधर में लटक सकता है मामला

विवादित जमीन का मामला एक बार फिर लटक सकता है। दोनों जनपदों द्वारा राजस्व परिषद को भेजे गए प्रस्ताव को बोर्ड शासन को भेजेगा। जिसके उपरांत शासन द्वारा अधिसूचना जारी की जाएगी। इसके बाद ही मामला सर्वे इकाई को हस्तांतरित होगा। क्योकि छह माह बाद सूबे में विधान सभा चुनाव प्रस्तावित हैं, ऐसे में कैबिनेट की बैठक में मामला पहुंचना मुश्किल भरा है। जिसके कारण मामला अधर में पड़ने की संभावना जताई जा सकती है।

क्या है पूरा मामला..

यमुना नदी में हर साल बाढ़ में कोर्राकनक गांव के आसपास तेजी से कटान हो रहा है। साल दर साल में आबादी व 13 हजार बीघा जमीन कटान पड़ोसी जनपद में चली गई है। जिस पर बांदा जिले के लौमर के ग्रामीणों का कब्जा है। जमीन पर मालिकाना हक के लिए 43 साल से मामला कोर्ट, अफसरों और शासन की चौखट में लंबित है। जिसके कारण अभी भी किसान अपनी जमीन से वंचित है।

संबंधित खबरें