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फतेहपुर

खुद को ठगा महसूस कर रहे 2582 शिक्षामित्र

हिन्दुस्तान टीम,फतेहपुरPublished By: Newswrap
Thu, 17 Jun 2021 05:52 AM
खुद को ठगा महसूस कर रहे 2582 शिक्षामित्र

फतेहपुर। संवाददाता

बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित परिषदीय विद्यालयों में तैनात शिक्षामित्र खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। शिक्षामित्रों को 11 माह के मानदेय पर 12 माह काम करना पड़ रहा है। जिसे शिक्षामित्र न्याय संगत न होना करार दे रहे हैं। शिक्षामित्र संघ व शिक्षक संगठनों द्वारा प्रशासन से लेकर शासन स्तर तक ज्ञापन भेज कर 12 माह के मानदेय की मांग की जा चुकी है। बावजूद अभी तक कोई समाधान नहीं उन्हें नहीं मिल सका है।

शिक्षामित्र कहते हैं कि वह काम करने में पीछे नहीं हैं लेकिन सरकार वेतन देने में भेदभाव कर रही है। जबकि विभाग की मानें तो जून माह में परिषदीय स्कूलों में अवकाश रहता है। इसलिए मानदेय नहीं दिया जाता है। यह सिलसिला 1999 से चला आ रहा है। लेकिन कोविड काल में जून में शिक्षामित्रों से ई-पाठशाला समेत अन्य कार्य शिक्षामित्रों द्वारा कराया जा रहा है। लेकिन उसके लिए शासन से मानदेय देने के लिए कोई आदेश नहीं आया है। दोआबा में कुल 2586 शिक्षामित्र हैं। पंचायत निर्वाचन में तीन शिक्षा मित्रों की कोरोना संक्रमण से मृत्यु हो गई थी। जबकि कई शिक्षामित्र कोरोना संक्रमित भी हुए थे।

क्या बोले संगठन पदाधिकारी....

जरुरत पड़ी तो होगा संघर्ष

शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष विजय सिंह गौर ने बताया कि शिक्षामित्रों को 12 माह का मानदेय मिलना ही चाहिए। इसके लिए मुख्यमंत्री के जन्म दिवस पर जनपद से काफी संख्या में ट्वीट किए गए। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में जिन शिक्षामित्रों की पंचायत चुनाव ड्यूटी के दौरान संक्रमण से मौत हुई है। उनके परिजनों के माध्यम से शासन द्वारा दी जाने वाली अनुग्रह राशि के लिए आनलाइन आवेदन करा दिया गया है। लेकिन संगठन की मांग है कि आर्थिक मदद के साथ साथ परिवार के एक सदस्य को नौकरी भी दी जाए। इसके लिए प्रदेश पदाधिकारियों के नेतृत्व में शासन को मांग पत्र प्रेषित किया जा चुका है। जरूरत पड़ी तो हक पाने के लिए संघर्ष भी किया जाएगा।

शिक्षामित्रों के साथ है संगठन

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के महामंत्री विजय कुमार त्रिपाठी ने कहा कि संगठन शिक्षामित्रों के साथ है। उनका हक दिलाए जाने के लिए प्रयास किया जा रहा है। शासन से 12 माह के मानदेय के लिए मांग की जा चुकी है। पंचायत चुनाव ड्यूटी के दौरान दिवंगत शिक्षामित्रों के साथ साथ बीमार हुए शिक्षामित्रों के बारे में भी शासन को न्याय करना चाहिए। कम मानदेय में शिक्षामित्र आर्थिक स्थिति से जूझ रहे हैं।

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