भाजपा के पुराने स्तंभ सरनाम सिंह गंगवार का निधन,

Newswrap हिन्दुस्तान, फर्रुखाबाद कन्नौज
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Farrukhabad-kannauj News - कायमगंज के पूर्व जनसंघ और भाजपा नेता सरनाम सिंह गंगवार का निधन हो गया। उनका जन्म 25 जनवरी 1929 को हुआ था। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया और राजनीति में भी सक्रिय रहे। गंगवार ने कई बार जिला अध्यक्ष पद संभाला और लोकतंत्र सेनानी के रूप में सम्मानित हुए। उनके निधन से शोक की लहर है।

भाजपा के पुराने स्तंभ सरनाम सिंह गंगवार का निधन,

कायमगंज, संवाददाता। जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के पुराने नेता तथा लोकतंत्र सेनानी सरनाम सिंह गंगवार का निधन हो गया। भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने इसे संगठन व समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। सरनाम सिंह गंगवार का जन्म 25 जनवरी 1929 को तहसील कायमगंज के ग्राम लहरा रजा कुलीपुर में हुआ था। उन्होंने बीए की शिक्षा कानपुर के बीएसएसडी कॉलेज से तथा एमए (हिंदी) की पढ़ाई डीएवी कॉलेज कानपुर से पूरी की। इसके बाद उन्होंने पीजी कॉलेज गंजडुंडवारा से बीएड किया।शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने शिक्षक के रूप में अपना जीवन समर्पित किया और डीएवी कॉलेज रजलामई में लंबे समय तक अध्यापन कार्य किया।

सेवा निवृत्ति के बाद भी वे सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे। राजनीतिक जीवन की शुरुआत उन्होंने वर्ष 1952 में जनसंघ से की। वर्ष 1955 में कायमगंज नगर अध्यक्ष बने। इसके बाद वे 1970 और 1971 में जनसंघ के जिला अध्यक्ष फर्रुखाबाद रहे। वर्ष 1976-77 में भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष बने और पार्टी संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1980 में भाजपा के गठन के समय उन्हें फर्रुखाबाद का जिला अध्यक्ष बनाया गया। उसी वर्ष उन्होंने कायमगंज विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़ा, हालांकि उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। इसके बाद 1985 में पुनः भाजपा जिला अध्यक्ष बने और वर्ष 1989 में फिर कायमगंज विधानसभा से चुनाव लड़ा। वर्ष 1990 से 2000 तक वे लगातार भाजपा के जिला अध्यक्ष रहे। भाजपा नेता ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या के बाद उन्होंने जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। सामाजिक क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। वे 1965 से 1980 तक ग्रामसभा लहरा रजा कुलीपुर के ग्राम प्रधान रहे। इसके अलावा 1978-79 में सहकारी चीनी मिल कायमगंज के डायरेक्टर के रूप में भी कार्य किया। वर्ष 1975 में आपातकाल के समय उन्होंने विरोध किया और डीआईआर तथा मीसा के तहत जेल भेजे गए। इस प्रकार वे अपने जीवन में कुल सात बार जेल गए और लोकतंत्र सेनानी के रूप में सम्मानित किए गए। सरनाम सिंह गंगवार अपने पीछे तीन पुत्र और एक पुत्री सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके निधन की सूचना मिलते ही भाजपा नेताओं, कार्यकर्ताओं और क्षेत्रीय लोगों में शोक की लहर दौड़ गई।

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