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26 नवंबर, 2020|11:59|IST

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संस्कारों में ही निहित है वैदिक संस्कृति

वैदिक क्षेत्र में संस्कृति रक्षा सम्मेलन में भारतीय राजार्य सभा के महामंत्री महावीर शास्त्री ने कहा कि संस्कारों में ही वैदिक संस्कृति निहित है। संस्कारों से संस्कृति होकर देश की युवा पीढ़ी संस्कृति की रक्षा करती थी। मगर आज की युवा पीढ़ी पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव में आकर वैदिक संस्कृति को भूलती जा रही है। पाश्चात्य संस्कृतिक का ही परिणाम है कि वैदिक संस्कृति के प्रतीक चिन्ह चोटी और जनेऊ रखने वालों का मजाक बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति वेदों में निहित है। जब तक हमारे शिक्षण संस्थानों में वैदिक शिक्षा पद्धति लागू नहीं होगी तब तक संस्कृति की रक्षा संभव नहीं है। संदीप आर्य ने कहा कि देश की आजादी में 85 प्रतिशत योगदान आर्य समाजियों का रहा। आचार्य चंद्रदेव ने कहा कि हमारी संस्कृति की रक्षक गुरुकुल शिक्षा पद्धति थी। इसी पर अंगे्रजों ने कुठाराघात किया। जगदीश आर्य, सुधांशु, शिशुपाल, मुन्ना यादव, अजीत, संजय, जयदेव, रेशमा, उदिता आदि की उपस्थिति रही।