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अभद्रता पर डॉक्टरों ने ठप कर दी इमरजेंसी

अभद्रता पर डॉक्टरों ने ठप कर दी इमरजेंसी

1 / 2लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी में मंगलवार की रात एक मरीज के इलाज को लेकर हंगामा खड़ा हो गया। गुस्साए लोग डॉक्टर से भिड़ गए। गाली गलौज के बीच जान से मारने की धमकी दी। मरीज को रेफर कराकर ऑक्सीजन के मॉस्क और...

अभद्रता पर डॉक्टरों ने ठप कर दी इमरजेंसी

2 / 2लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी में मंगलवार की रात एक मरीज के इलाज को लेकर हंगामा खड़ा हो गया। गुस्साए लोग डॉक्टर से भिड़ गए। गाली गलौज के बीच जान से मारने की धमकी दी। मरीज को रेफर कराकर ऑक्सीजन के मॉस्क और...

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लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी में मंगलवार की रात एक मरीज के इलाज को लेकर हंगामा खड़ा हो गया। गुस्साए लोग डॉक्टर से भिड़ गए। गाली गलौज के बीच जान से मारने की धमकी दी। मरीज को रेफर कराकर ऑक्सीजन के मॉस्क और पाइप उखाड़कर साथ ले गए। डॉक्टर ने इसको लेकर चार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। हंगामे के बीच डॉक्टर ने इमरजेंसी में मरीज नहीं देखे। करीब पांच घंटे तक सेवाएं बाधित रहीं। पुलिस ने दो लोगों को अपनी निगरानी में ले लिया है। नगर पंचायत कमालगंज के अंबेडकर नगर मोहल्ला निवासी आकाश पुत्र राजकिशोर को मंगलवार की रात दस बजे के बाद शक्ति अपने अन्य लोगों के साथ हालत खराब होने पर उसे इलाज के लिए लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी में लेकर पहुंचे। डॉ.प्रशांत कुमार सिंह ने आकाश का इलाज किया और उसकी हालत को देखते हुए रेफर कर दिया। इस बीच वह अपने कक्ष में चले गए। मरीज के इलाज को लेकर साथ आए लोग गुस्से में आ गए। कक्ष में पहुंचकर डॉक्टर से इलाज को लेकर तल्ख लहजे में बातचीत करने लगे। इस पर यहां बात बढ़ गई और विवाद खड़ा हो गया। डॉक्टर का कहना है कि शक्ति व उनके साथ आए लोगों ने मुझे गाली गलौज किया। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी। पूरी तरह से यह लोग अभद्रता पर उतर आए। बाद में मरीज को अस्पताल से ले गए। इसमें ऑक्सीन के मॉस्क तथा पाइप उखाड़कर ले गए। हालांकि फार्मासिस्ट सुधाकांत और वार्ड व्वाय ने हंगामा कर रहे लोगों को समझाने का प्रयास किया तो वह नहीं माने। इमरजेंसी में डॉक्टर के साथ हुए व्यवहार की जानकारी अन्य डॉक्टरों को हुई। कुछ ही देर में सीएमएस डा.एसपी सिंह, बीके दुबे, राजेश तिवारी, दीपक तिवारी, श्रेय खंडूजा आदि डाक्टर पहुंच गए। डॉक्टर प्रशांत ने कहा कि ऐसे हालातों में वह काम नहीं कर सकते हैं। मरीज को सांस लेने में दिक्कत थी। उसकी हालत ठीक नहीं थी। बेवजह दबाव बनाया गया। डॉ.प्रशांत ने इमरजेंसी में डयूटी करने से हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद 10.45 बजे से इमरजेंसी में मरीजोंे को नहीं देखा गया। सुबह 4 बजे एक बालिका बीमार हालत में पहुंची तो उसका इलाज हुआ। हालांकि सीएमएस डा.एसपी सिंह का कहना है कि डॉक्टरों ने क ोई हड़ताल नहीं की। घटना को लेकर डॉक्टर प्रशांत परेशान थे इसलिए उन्होंने मरीज नहीं देखे। वहीं पुलिस ने बढ़ रहे विरोध को देखते हुए डॉक्टर की तहरीर पर शक्ति, सोनू ठाकुर, बब्बा दुबे व एक अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस ने रात में ही छापा मारकर बब्बा समेत दो लोगों को निगरानी में ले लिया है। बब्बा ने बताया कि हम लोग आकाश के इलाज के लिए वहां गए थे। डॉक्टर अपने कक्ष में थे। जब उनसे इलाज के लिए कहा गया तो इस बीच हमारे साथी ने डॉक्टर को सांसद पीए का परिचय दे दिया। इस पर डॉक्टर भड़क गए। बोले वहीं जाकर इलाज करा लो। इसी पर बात बढ़ गई। कोई इतनी बड़ी बात नहीं थी जो कि इस तरह से एफआईआर दर्ज कराई जाती।

आए दिन के हंगामे से डॉक्टर गुस्से में

रात दस बजे के बाद जब डॉक्टर प्रशांत कुमार सिंह ने इमरजेंसी में कुछ लोगों द्वारा हंगामा किए जाने की खबर अन्य डॉक्टरों को दी तो ऐसे में साथी डॉक्टर गुस्से में आ गए। कहा कि आए दिन यदि मरीज के तीमारदार इस तरह का व्यवहार करेंगे तो कैसे काम चलेगा। करीब रात दो बजे तक सीएमएस की मौजूदगी में डाक्टर इसको लेकर बात करते रहे। हालांकि रात में ही जानकारी पाकर शहर कोतवाल संजय मिश्रा पुलिस बल के साथ अस्पताल में पहुंच गए और कार्रवाई का भरोसा दिया। मरीज को किस प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया है इसको लेकर उन्होने जानकारी दी। डॉक्टर से कौन लोग उलझ रहे थे पता चलते ही ऐसे लोगों को गिरफ्तार करने के लिए छापे मारे। पुलिस इसलिए सक्रिय हुई कि कहीं डॉक्टर फिर कोई संकट खड़ा न करें। इसी के चलते आनन फानन में मुकदमा दर्ज हुआ और दो लोगों को निगरानी में लिया गया।

रात से सुबह तक इमरजेंसी में रहा इलाज का संकट

रात दस बजे के बाद जब इमरजेंसी में हंगामा हो गया तो ऐसे में डॉ.प्रशांत के हाथ खड़े कर देने से 10.45 बजे के बाद से इमरजेंसी में मरीज देखने का कार्य बंद हो गया। इमरजेंसी का दरवाजा भी बंद कर दिया गया। इस बीच कई मरीज आए और लौटकर चले गए। सुबह चार बजे के बाद जब एक बालिका की हालत बिगड़ी और उसे इलाज के लिए यहां लाया गया तो डॉ.प्रशांत और बाल रोग विशेषज्ञ राजेश तिवारी ने उसका इलाज किया। इसके बाद फिर कोई मरीज नहीं देखा गया। सुबह 8.30 बजे डॉ.शिखर ने इमरजेंसी में मरीजों को देखा। इस बीच यहां आधा दर्जन से अधिक मरीजों की लाइन लग गई। करीब एकघंटे बाद डॉ.अभिषेक चतुर्वेदी भी इमरजेसंी में पहुंचे और मरीजों को देखा। इसके बाद वह रक्तदान शिविर में चले गए तो ऐसे में यहां फिर दिक्कतें आईं। बाद में वह बैठे और मरीजों को देखा। सुबह 11.30 बजे के बाद इमरजेंसी सुचारू रूप से चालू हो सकी। हालांकि सीएमएस का कहना है कि कोई हड़ताल नहंी हुई है। डाक्टर अपने कार्य में थे इसलिए समय लग गया। जो मरीज आए उन सबको देख गया।

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