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घपले के अंदेशे में स्टोर रूम और एई कक्ष सील

घपले के अंदेशे में स्टोर रूम और एई कक्ष सील

मुख्य विकास अधिकारी के नेतृत्व में गुरुवार को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नलकूप विभाग के स्टोर रूम और सहायक अभियंता कार्यालय को सील करा दिया। इस कार्रवाई से हड़कंप मच गया। मेंटीनेंस और वर्क आर्डर में घपलेबाजी के अंदेशे में यह कार्रवाई की गई है। जांच अभी चलती रहेगी। टीम में शामिल सदस्यों को कई महत्वपूर्ण तथ्य भी हाथ लगे हैं। इस पर विभागीय अधिकारियों पर शिकंजा कस सकता है। मुख्य विकास अधिकारी डा.राजेंद्र पेंसिया, डीआरडीए के सहायक अभियंता रमेश चंद्र श्रीवास्तव, जिला कार्यक्रम अधिकारी भारत प्रसाद के साथ अचानक नलकूप विभाग के दफ्तर में पहुंच गए। दफ्तर में पहुंचते ही सबसे पहले उपस्थिति पंजिका देखी गई तो यहां पर उन्हें कर्मचारी सरिता सिंह और शैलेंद्र सिंह गैर हाजिर मिले। टीम ने जाते ही विभिन्न प्रकार के रिकार्ड तलब कर लिए इसके साथ ही स्टोर रूम को सील कर दिया। इससे दफ्तर में मौजूद कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। जांच कमेटी के सदस्यों का सख्त रुख देखकर यहां पर अधिकारी भी सहम गए। जांच के दौरान सदस्यों ने कई अभिलेख देखे। किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो सके इसको देखते हुए सहायक अभियंता के कक्ष को भी सील करा दिया गया। टीम के सदस्यों ने वर्ष 2017 से 2019 के बीच मिले बजट के बारे में भी अधिकारियों से जानकारी की तो कोई जानकारी नहीं मिल सकी। मेंटीनेंस के अलावा तालाबों में पानी भरने के लिए कितना बबजट खर्च किया गया है इसका भी फिलहाल कोई रिकार्ड हासिल नहीं हो सका है। बताया जा रहा है कि टीम के सदस्यों ने मेंटीनेंस को लेकर विर्शेष रूप से फोकस किया। टीम के सदस्यों का पता लगा कि प्रति नलकूप 38 हजार की दर से साल में मेंटीनेंस का बजट आता है। जिले मेें करीब 300 नलकूप हैं इस हिसाब से करीब 1 करोड़ 14 लाख रुपए मेंटीनेंस की मद पर खर्च होने का अनुमान है। इसके रिकार्ड की भी जांच की जाएगी। तालाबों में पानी भरने को लेकर क्या गोलमाल किया गया यह भी जांच के दायरे में हैं। टीम के सदस्यों ने नए नलकूप स्थापित होने के बारे में पूरी जानकारी की।

बजट में गोलमाल का अंदेशा, जांच रहेगी जारी

नलकूप विभाग को आवंटित बजट में गोलामाल का भी अंदेशा है। बताया जा रहा है कि गोलमाल को लेकर एक माननीय ने मुख्य विकास अधिकारी से शिकायत की थी। इसके बाद ही आनन फानन में टीम गठित की गई। टीम की जांच जारी रहेगी। पिछले दिनों दिशा की बैठक के दौरान ही खुद अधिशासी अभियंता ने स्पष्ट किया था कि 250 न लकूप चालू हालत में हैं। इस हिसाब से इन नलकूपों को मेंटीनेस के लिए हर वर्ष धनराशि मिलत होगी। मेंटीनेंस को लेकर हेर फेर का मामला भी शिकायत में प्रमुखत: से उठाया गया था। इसके अलावा गैर जिले की फ र्मो को को ठेका दिए जाने का मामला भी जांच के दायरे में हैं। इसमें भी टीम के सदस्यों को महत्वपूर्ण तथ्य मिले हैं। वर्क आर्डर 40 हजार रुपए तक ही जारी किए जाने की बात कही जा रही है। इस मामले में भी नियम कानूनों को दर किनार किए जाने के मामले में भी शिकायत पर जांच आगे बढ़ेगी और इसमें कई अफसरों की गर्दनें फंस सकती हैं।

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