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25 जनवरी, 2020|4:38|IST

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सड़कों को गड्ढामुक्त करने की खुलने लगी पोल

भारी भरकम बजट खर्च कर गड्ढा मुक्त की गई सड़कों की असलियत अब जांच में सामने आने लगी है। सीडीओ अपूर्वा दुबे की ओर से गठित की गई जिला स्तरीय अफसरों की टीम की जांच पड़ताल में कई सड़कों की दुर्दशा उजागर हुई है। अब तक जिन अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट सीडीओ कार्यालय को उपलब्ध कराई है उसमें कई तरह की अनियमितताएं हैं। इससे यह भी लग रहा है कि शासन की ओर से जारी की गई धनराशि का दुरुपयोग किया गया है।

मुख्य विकास अधिकारी ने वर्ष 2017-18 में अवमुक्त हुई धनराशि से सड़कों के गड्ढामुक्त किए जाने को लेकर किए गए कार्यो की जांच के निर्देश दिए थे। इसमें पीडब्लूडी समेत विभिन्न विभागों के इंजीनियरों के अलावा जिला स्तरीय अधिकारियों को भी लगाया गया है। कुल 73 सड़कों की जांच होनी है। अब तक आधा दर्जन से अधिक सड़कों की जांच हो चुकी है। इसमें जो स्थिति है। उससे साफ है कि सड़कों के निर्माण को लेकर सिर्फ खानापूरी की गई है। कई सड़कें तो ऐसी हैं जिनके गड्ढे एक सप्ताह बाद ही खुल गए। इस तरह से अधिकारियों की रिपोर्ट ने यह भी उजागर किया है कि निर्माण इकाई क ी ओर से सड़कों के निर्माण को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई गई। जिन जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ पीडब्लूडी के जेई अथवा एई लगे हैं वे अपनी रिपोर्ट में बारिश को हथियार बनाए हुए हैं। कुछ अधिकारियो ने बारिश की वजह से सड़कें खराब होने का भी जिक्र किया है। अभी बड़ी संख्या में जिला स्तरीय अफसरों की रिपोर्ट आनी शेष है। पूरी रिपोर्ट आने के बाद सही स्थिति का पता लग सकेगा।

73 जिला स्तरीय अधिकारियों की टीम कर रही जांच

सड़कों को गड्ढामुक्त करने के कार्य की जांच 73 अधिकारी कर रहे हैं। इनके साथ विभिन्न विभागों के एई अथवा जेई को लगाया गया है। जांच रिपोर्ट को लेकर पहले ही निर्देशित किया गया था कि इसमें बारीकी से जांच की जरूरत है। सर्वाधिक धनराशि व्यय वाली गड्ढामुक्त सड़कों पर विशेष तौर पर अधिकारियों को लगाया गया है। इन सड़कों को लेकर अधिकारियों को काफी शिकायतें मिल रही हैं।