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लोको दरगाह के इफ्तार में मजहबी व दलीय सीमाएं टूटीं

लोको दरगाह के इफ्तार में मजहबी व दलीय सीमाएं टूटीं

मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना, हिंदी हैं हम वतन है हिन्दोस्तां हमारा । लोको दरगाह पर रमजान के रोजा इफ्तार में कुछ ऐसा ही हमारा हिन्दोस्तां दिखाई दिया। दरगाह कमेटी की ओर से सोलहवीं शरीफ पर आयोजित सामूहिक रोजा इफ्तार में मजहबी व दलीय सीमाएं टूटती नजर आइं। सभी ने एक ही दस्तरख्वान पर बैठकर मगरिव की अजान होते ही खजूर से खुदा का शुक्र अदा कर रोजा खोला और मुल्क व शहर में अमन और भाईचारे के लिए दुआ की। दरगाह शाहबुददीन औलिया एक बार फिर भाईचारे की मिसाल बनीं। मौका था सामूहिक रोजा इफ्तार का। इफ्तार में जहां पंजाब से गुरजीत सिंह, सिमरन कौर, जसवंत सिंह अदि ने पहुंचकर रोजा इफ्तार पार्टी में शिरकत की तो वहीं शहर से सभी धर्मो के मानने वाले इफ्तार में शामिल हुए। दरगाह की ओर से इफ्तार में कई सियासी दल के लोग पहुंचे। इफ्तार में बड़ी संख्या में महिला रोजेदारों ने शिरकत की और खुदा का शुक्र कर रोजा इफ्तार किया। इस मौके पर सज्जादानशीन मोहम्मद शाह व नायब सज्जादानशीन शाह मोहम्मद वसीम ने मुल्क व शहर के लिए दुआ की। इस मौके पर कासिम साबरी, सलीम अहमद, आकिल खान, हाजी वसीमुज्जमा खां, सलमान कबीर, दाउद अहमद, शोएव खान आदि मौजूद रहे।

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  • Web Title:Religious