आलू सड़कों पर फेंकने की बजाय व्यवसायिक उपयोग को नीति बने
Farrukhabad-kannauj News - फर्रुखाबाद में आलू की मंदी के चलते शीतगृहों से आलू सड़कों पर फेंका जा रहा है, जिससे संक्रमण का खतरा है। आलू विपणन संघ के निदेशक ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सुझाव दिया है कि आलू के व्यावसायिक उपयोग के लिए नीति बनाई जाए। इससे जैविक खाद बनाकर कृषि उपज में वृद्धि और आमदनी में सुधार होगा।

फर्रुखाबाद, संवाददाता। जनपद में मंदी के समय शीतगृहों से आलू सड़कों पर फेंक दिया जाता है इससे संक्रमण का भी खतरा बन जाता है। इसको लेकर यदि सड़कों पर आलू फेंकने की बजाय उसके व्यवसायिक उपयोग की नीति बने तो यह एक बेहतर विकल्प हो सकता है। आलू विपणन संघ के निदेशक अशोक कटियार ने इसको लेकर प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि जनपद में 110 से अधिक कोल्ड स्टोरेज हैं और सैकड़ों मीट्रिक टन आलू का भंडारण होता है। शीतगृह से जब आलू निकलने की बारी आती है तो मंदी की स्थिति में आलू किसान कोल्ड स्टोरेज में छोड़ देते हैं और यही आलू सड़कों पर फेंक दिया जाता है।
उन्होने कहा कि इससे शीतगृहों के आस पास लोगों को दुर्गंध से परेशानी होती है और संक्रमण भी फैलने का खतरा बना रहता है। यदि नीति बनाकर सभी कोल्ड स्टोरेज से इस कचरे से जैविक खाद बनायी जाने लगे तो कृषि उपज में काफी फायदा होगा। अतिरिक्त आमदनी भी होगी और लोगों को बदबू से भी निजात मिलेगी। इस आलू को सलाद, स्टार्च, चिप्स, कार्बोहाईड्रेट, दवाइयों आदि में प्रयुक्त किया जा सकता है। अनुसंधान कर इस आलू का समुचित उपयोग किए जाने को नीति बनाये जाने की जरूरत है।
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