1400 मेडिकल स्टोर बंद, हड़ताल बनी मरीजों के लिए सजा
Farrukhabad-kannauj News - हिन्दुस्तान पड़ताल1400 मेडिकल स्टोर बंद, हड़ताल बनी मरीजों के लिए सजा जन औषधि केंद्रों ने दी राहत, शटर डाउन होने से दवा को भटकते रहे मरीज आनलाइन

फर्रुखाबाद, संवाददाता। आनलाइन दवा बिक्री के विरोध में दवा कारोबारियों ने बुधवार को हड़ताल की। कैमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर जनपद में करीब 1400 मेडिकल स्टोर बंद रहे। दोपहर को जरूर दवा दुकानों के शटर उठ गए। सुबह से ही मरीज और तीमारदार दवा को भटकते दिखे। प्राइवेट नर्सिंग होम में जरूर हड़ताल ज्यादा प्रभावी नहीं दिखाई पड़ी। नर्सिंग होम में संचालित मेडिकल स्टोरों में मरीजों के लिए दवा मिलती रही। हड़ताली कैमिस्टों का आरोप है कि आनलाइन कंपनियां बिना डॉक्टर के पर्चे और फार्मासिस्ट के दवाएं बेच रहे हैं। इससे लोगों की जान खतरे में है। कैमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर कैमिस्टों ने सुबह से ही शहर में निगरानी बढ़ा दी। जत्थों के रूप में पहुंचे कैमिस्टों ने जहां कहीं भी दुकाने खुली मिलेंगी उसे बंद कराया। हालांकि दोपहर तक तो बंदी प्रभावी रही मगर तीन बजे के बाद धीरे धीरे दवा दुकानों के शटर उठते दिखाई पड़े। ग्रामीण क्षेत्रों के मेडिकल स्टोर सुबह जरूर बंद रहे। मगर मरीजों और तीमारदारों को राहत देने के लिए एजेंट स्टोर से दवा निकालकर मरीजों तक पहुंचाने का काम किया गया। वैसे कैमिस्ट एसोसिएशन के महासचिव मनोज मिश्रा का कहना था कि दोपहर तक जनपद में शत प्रतिशत हड़ताल सफल रही。
जनपद में रोजाना दो करोड़ का कारोबार
फर्रुखाबाद। जनपद में कुल 1400 मेडिकल स्टोर हैं इनमें 1200 मेडिकल स्टोर सक्रिय हैं। अनुमानित तौर पर रोजाना दो करोड़ रुपये का कारोबार होता है। एक दिन की हड़ताल से दो करोड़ रुपये के कारोबार को नुकसान पहुंचा। शहर क्षेत्र में जिन अस्पतालों और क्लीनिक में मेडिकल स्टोर संचालित नहीं हैं उनमें भर्ती मरीजों के सामने जरूर दवा की समस्या आयी। तीमारदार भी भटकते रहे। निजी अस्पतालों में संचालित मेडिकल स्टेार में चोरी छुपके मरीजों को दवा देकर राहत देने का काम किया। कई स्थानों पर तीमारदार पर्चा लेकर एक दुकान से दूसरी दुकान पर भटकते रहे। राजेपुर से दवा का पर्चा लेकर शहर आये रघुवीर का कहना था कि बेटे का बुखार उतर नहीं रहा है। डॉक्टर ने दवाएं लिखी हैं। सुबह से दवा दुकानों के लिए घूम रहे हैं मगर दुकाने बंद हैं।
यह है कैमिस्टों की प्रमुख मांगे
अवैध व आनलाइन दवा विक्री के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो।
बिना वैध एवं सत्यापित ई-प्रिसक्रिप्शन के दवाओं की बिक्री और होम डिलीवरी प्रतिबंधित हो।
ऑनलाइन प्लेटफार्म से अपनायी जा रही अत्यधिक छूट और नीति पर रोक लगे।
मरीजों का हेल्थ डाटा आनलाइन कंपनियों के पास जा रहा है इसका दुरुपयोग रोकने को कानून बने।
जन औषधि केंद्रों से मिली मरीजों को राहत
फर्रुखाबाद। कैमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर बुधवार को हुई हड़ताल से जन औषधि केंद्र दूर रहे। जन औषधि केंद्रों से मरीजों को राहत मिली। कई मरीज और तीमादार भटकते हुये जन औषधि केंद्रों पर पहुंचे। यहां पर दवाएं लीं। जनपद में कुल 12 जन औषधि केंद्र संचालित हैं। इसमें अधिकतर शहर क्षेत्र में ही हैं। यहां पर सस्ती दवाएं मिलती हैं। जन औषधि केंद्र संचालकों का कहना था कि सामान्य दिनों में पर्चे कम आते हैं। हड़ताल की वजह से आज ज्यादा ही लोग दवा लेने आये हैं। बुखार की दवा के अलावा एंटी बायटिक, बीपी, शुगर की दवा लेने वाले ज्यादा लोग थे।
मार्जिन के खेल में पिस रहे मरीज
फर्रुखाबाद। कई दवाओं पर एमआरपी और खरीद रेट में भारी अंतर है। दस रुपये में मिलने वाली दवा का एमआरपी 40 से 50 रुपये प्रिंट है। कैमिस्ट इसी मार्जिन पर खेलते हैं। जबकि आनलाइन कंपनियां कम मार्जिन पर दवाएं बेचती हैं। विशेषज्ञों की माने तो कई बार जेनरिक दवा के बजाय महंगा ब्रांडेड दवाएं लिखते है।
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