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29 सितम्बर, 2020|4:16|IST

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अब जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी

अब जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी

पूर्व विधायक उर्मिला राजपूत को भूमाफिया घोषित करने के बाद जिला प्रशासन ने अब उन जिम्मेदारों के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी कर ली है जिनके समय में दस्तावेजों में हेर फेर किया गया। संदिग्ध परिस्थितियों के बाद भी तत्कालीन तहसीलदार ने वसीयत को लेकर जो आदेश जारी किए उस पर उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। शहर के अमीन खां निवासी नाहर सिंह राजपूत ने वक्फ संपत्ति को लेकर जिलाधिकारी से शिकायत की थी।

इसमें एसडीएम सदर ने जांच में पाया कि वक्फ सैयद मोहम्मद मेहंदी अली खां उर्फ अच्छे साहब खल्फ जनवा दूल्हा साहब साकिन कस्बा शमसाबाद की ओर से वक्फनामा किया गया था। वक्फ नामा में स्पष्ट था कि मुतवल्ली सैयद हैदर सुल्तान होगा और उसके बाद उनका छोटा लड़का सैयद सफदर सुल्तान मुतवल्ली होगा। चकबंदी के दौरान आकार पत्र 45 के अभिलेखों में हेराफेरी करते हुए वक्फ का नाम हटा दिया गया और भूमि सफदर अली के नाम दर्ज कर दी गई। तहसीलदार सदर ने 4 जून 1991 के अपने आदेश में अपंजीकृत वसीयत के आधार पर विवादित भूमि सैयद सफदर सुल्तान के नाम से खारिज करके चीनीग्रान निवासी अजादाद जैदी के नाम दर्ज कर दी। यही नहीं वर्ष 2004 में तत्कालीन तहसीलदार ने एक अपंजीकृत वसीयत के आधार पर उर्मिला राजपूत के पक्ष में दर्ज कर दिया। वसीयत में कई संदिग्ध परिस्थितियां आने के बाद तत्कालीन तहसीलदार ने जो आदेश पारित किए वह गंभीर प्रश्न है। प्रशासन की ओर से इस पर भी गंभीरता से कार्रवाई का मन बनाया गया है। प्रशासन को जो मजबूत आधार मिला है उसमें आजादार जैदी की मृत्यु 7 अप्रैल 2004 को हुई। जबकि वसीयत 6 अप्रैल 2004 को लिखी जानी बताई गई। एक और आधार मिला इसमें वसीयतकर्ता अजादार जैदी मुस्लिम वर्ग से संबंधित हैं जबकि उर्मिला राजपूत हिंंदू धर्म से संंबंधित हैं। ऐसे में जिलाधिकारी ने भी अपने आदेश में भी माना कि वसीयत को तत्कालीन तहसीलदार के द्वारा सिद्ध माना गया है जो कि न्याय की दृष्टि से कतई नहीं था। इस पूरे मामले में तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान करा ली गई है। उनके खिलाफ भी शासन को रिपोर्ट जाएगी।

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  • Web Title:Now preparations for action against responsible officers