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तहसील मुख्यालय के अस्पताल में इमरजेंसी सेवाएं नहीं

तहसील मुख्यालय के अस्पताल में इमरजेंसी सेवाएं नहीं

1 / 3तहसील मुख्यालय के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अमृतपुर में दोपहर बाद इलाज की कोई व्यवस्था नहंी है। मरीजों को दस किलोमीटर दूर या फिर जिला मुख्यालय के अस्पताल में जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। जांचों के...

तहसील मुख्यालय के अस्पताल में इमरजेंसी सेवाएं नहीं

2 / 3तहसील मुख्यालय के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अमृतपुर में दोपहर बाद इलाज की कोई व्यवस्था नहंी है। मरीजों को दस किलोमीटर दूर या फिर जिला मुख्यालय के अस्पताल में जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। जांचों के...

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3 / 3तहसील मुख्यालय के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अमृतपुर में दोपहर बाद इलाज की कोई व्यवस्था नहंी है। मरीजों को दस किलोमीटर दूर या फिर जिला मुख्यालय के अस्पताल में जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। जांचों के...

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तहसील मुख्यालय के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अमृतपुर में दोपहर बाद इलाज की कोई व्यवस्था नहंी है। मरीजों को दस किलोमीटर दूर या फिर जिला मुख्यालय के अस्पताल में जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। जांचों के लिए भी यहां पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। ऐसे में स्वास्थ्य केंद्र का इलाके के लोगों को कोई खास लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते यहां के लोग दवा लेने के लिए भटक रहे हैं। शुक्रवार सुबह 11 बजे जब यहां की हकीकत देखी गई तो इंचार्ज डा. गौरव वर्मा के अलावा फार्मासिस्ट राघवेंद्र सिंह मरीजों को देख रहे थे । इस अस्पताल में करीब एक सैकड़ा मरीज हर रोज इलाज को आते हैं। इसमें कटरी के गांव से भी लोग बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। यहां मलेरिया, लीवर और शुगर की जांच तो होती है लेकिन टायफाइड, सीवीसी की जांच नही होती। इसके अलावा एक्सरा भी नहीं हो पाता है इस सबके लिए यहां के लोगों को दस किलोमीटर दूर राजेपुर सीएचसी जाना पड़ता है। यदि वहां भी दिक्कत होती है तो करीब बीस किलोमीटर दूर लोहिया अस्पताल जाना पड़ता है। इस तरह से तहसील मुख्यालय के अस्पताल में मरीजों का इलाज किया जाता है। यहां ओपीडी सुबह 8 से 2 बजे तक चलती है। इसके बाद स्वास्थ्य सेवाएं इमरजेंसी के रूप में नहीं हैं।

वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के इंचार्ज डा. गौरव वर्मा कहना है कि गर्मी के इस मौसम में बुखार और खुजली के मरीज आ रहे हैं। अस्पताल में दवाइयों का पर्याप्त इंतजाम है। सभी मरीजों को देखकर दवाइयां दी जा रही हैं। उन्होंने बताया कि जो व्यवस्थाएं हैं उससे मरीजों को देखकर दवाइयंा दी जा रही है। इमरजेंसी नहीं खुलती हैं जबकि प्रसव केंद्र 24 घंटे खुलता है। इमरजेंसी में कोई मरीज आता हैं तो उसे राजेपुर सीएचसी पर भेजा जाता है।

महिला डाक्टर की भी नहीं है तैनाती

अस्पताल में प्रसव केंद्र भी है। एएनएम नीलम और आरती यहां की व्यवस्थाओं पर नजर रखती हैं। यदि कोई महिला गंभीर हो जाती है तो उसे राजेपुर सीएचसी भेज दिया जाता है। महीने में करीब 40 प्रसवयहां होते हैं। जो एएनएम पर ही निर्भर रहते हैं। काफी समय से अस्पताल में महिला डाक्टर की तैनाती नहीं है। जबकि इसको लेकर मांग भी हो चुकी है। ऐसे में एएनएम ही आने वाली महिलाओं का इलाज करती हैं।

अस्पताल में साफ सफाई की व्यवस्था भी टीक नहीं

अस्पताल में साफ सफाई की व्यवस्था के लिए कर्मचारी की तैनाती नहीं है। स्वास्थ्य कर्मी अपने स्तर से सफाई कर्मी का इंतजाम किए हुए हैं। यही हाल महिला वार्ड का है। अस्पताल में मरीजों को जो ग्लूकोज की बोतलें आदि लगाई जाती हैँ उनको भी अस्पताल परिसर में ही फेंक दिया जाता है जिससे यहां बड़ा खतरा रहता है। इसके लिए स्वास्थ्य कर्मी भी गंभीर नहीं हो रहे हैं। फार्मासिस्ट राघवेंद्र का कहना है कि लंबे समय से सफाई कर्मी की व्यवस्था नहीं है लेकिन इसके बाद भी सफाई व्यवस्था ठीक रहे। इसका प्रयास हो रहा है। इसके लिए अलग से कर्मचारी काम कर रहा है।

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