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31 अक्तूबर, 2020|7:44|IST

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सीरत कमेटी में 68 सदस्सीय कमेटी पर खड़ा हुआ नया विवाद

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सीरत कमेटी विवाद थमता नहीं दिख रहा है। आपसी सहमति से मनोनीत किए गए सीरत कमेटी के सदर और सेक्रेटरी ने बुधवार को हसीन गुट की 68 सदस्सीय कमेटी पर मुहर लगा दी है। इस पर नफीस गुट को बड़ा झटका लगा है। नफीस गुट ने घोषणा की है अगर हसीन के द्वारा बनाए गए लोग कमेटी में शामिल होते हैं तो उनके द्वारा बनाए गए सदस्य भी शामिल होंगे। सीरत कमेटी में नई कमेटी के गठन को लेकर पिछले दस माह से विवाद चला आ रहा है। सदर और सेक्रेटरी को लेकर कमेटी दो धड़ों में वंट गई थी। एक गुट का नेतृत्व मुहम्मद हसीन कर रहे थे दूसरे गुट की अगुआई हाजी नफीस अहमद कर रहे थे। इस बीच दोनो गुटों ने कमेटी में कई नए चेहरों को शामिल किया था। अब यह नए चेहरे कमेटी में मुश्किल बनकर सामने आ रहे हैं।

बुधवार को नवनियुक्त सदर सलीम हैदर और सेक्रेटरी कारी मुख्तार अहमद कादरी ने एक पत्र जारी कर अवगत कराया है कि मुहम्मद हसीन के संयोजन और कारी शाह फसीह मुजीवी व काजी मुताहिर अली की सरपरस्ती में जो 68 सदस्सीय कमेटी बनाई गई है उसको बहाल किया जाता है। पत्र द्वारा अवगत कराया गया है कि मौलाना शमशाबाद चतुर्वेदी ने भी इस पर मुहर लगाई है। इस बाबत जब पूर्व सेक्रेटरी हाजी नफीस अहमद से बात की गई तो उन्होंने बताया कि 51 सदस्सीय पुरानी कमेटी ही मान्य रहेगी। अगर 68 सदस्सीय कमेटी बनाई जाती है तो उनके द्वारा बनाए गए सदस्यों को शामिल किया जाए। अगर ऐसा नहीं होता है तो सदर और सेक्रेटरी को वह नहीं मानते हैं। वह अपनी नई कमेटी बनाएंगे। कमेटी के संयोजक मुहम्मद हसीन ने बताया कि उन्होंने जो 68 सदस्सीय कमेटी बनाई थी उसमें सभी शामिल थे। विवाद तो सेक्रेटरी और सदर बनाने की लेकर हुआ था इसमे सदस्यों का कोई मसला नहीं था। अब उसको नए विवाद की ओर मोड़ा जा रहा है।

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  • Web Title:New controversy erupted on 68-member committee in Serat Committee