
धर्म और अध्यात्म का अदभुत संगम है मेला श्री रामनगरिया
Farrukhabad-kannauj News - फर्रुखाबाद में 3 जनवरी से माघ महीने का पहला स्नान शुरू हो रहा है। श्री रामनगरिया मेले में एक माह का कल्पवास आरंभ होगा, जिसमें 20,000 से अधिक श्रद्धालु गंगा तट पर पहुँच चुके हैं। प्रशासन ने सभी तैयारियाँ पूरी कर ली हैं। यहाँ धर्म और अध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।
फर्रुखाबाद, कार्यालय संवाददाता। माघ महीने का पहला स्नान 3 जनवरी से शुरू होगा। इसके साथ ही मेला श्री रामनगरिया में एक माह का कल्पवास शुरू हो जायेगा। जप तप के संगम में हर तरफ अध्यात्म की खुशबू बिखरने लगी है। मेला श्री रामनगरिया में धर्म और अध्यात्म का अदभुत संगम देखने को मिल रहा है। बीस हजार से अधिक लोग कल्पवास करने के लिए गंगा तीरे पहुंच गये हैं। प्रशासन की ओर से भी सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं। शाहजहांपुर, हरदोई, सीतापुर, लखीमपुर, मैनपुरी, एटा, इटावा, कासगंज, पीलीभीत आदि जिलों से आस्थावान एक माह का कल्पवास करने के लिए गंगातट पर पहुंच गये हैं।
पाचंालघाट का माघ मेला काफी पुराना है। वर्ष 1950 के आस पास गंगा तट पर माघ महीने में कुछ दिनों का साधु संत प्रवास करने लगे थे। वर्ष 1956 में श्रद्धालुओं ने गंगातट पर पूर्व विधायक महरम सिंह के आह्वान पर माघ माह में मां गंगा के तट पर मड़ैया डालीं और पूरे माह का कल्पवास आरंभ किया था। इस प्रकार मेले का धीरे धीरे विस्तार हुआ। जिसने आज विशाल रूप ले लिया है। वर्ष 1963 में जिला परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष कालीचरन टंडन की ओर से यहां पर कल्पवासियों की सहायतार्थ एक औषधालय और पुलिस अधीक्षक की ओर से सुरक्षा के लिए एक चौकी की व्यवस्था करायी गयी थी। वर्ष 1965 में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, शिक्षकों, महिलाओं तथा कल्पवास करने वाले साधु संतों के सम्मेलन में तुसौर गांव निवासी स्वाती श्रद्धानंद के प्रस्ताव पर इस मेले का नाम मेला श्री रामनगरिया रखा गया। जो आज इस मेले का प्रचलित प्रसिद्ध नाम हो गया है। धीरे धीरे मेले में कल्पवासियों की संख्या बढ़ने लगी। वर्ष 1970 में गंगा पर पुल का निर्माण हो जाने के बाद कल्पवासियों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुयी। गंगातट पर अपनी अपनी सुविधा के अनुसार माघ माह में कल्पवास के लिए श्रद्धालु बढ़ने लगे और उनके परिजनो ने भी मेले में भगा लेना शुरू किया। वर्ष 1985 के आते आते कल्पवासियों में भारी बढ़ोत्तरी होकर संख्या हजारों में पहुंंच गयी। वर्ष 1986 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने मेला श्री रामनगरिया में आयोजित सूरजमुखी गोष्ठी का उद्घाटन किया था और मेला रामनगरिया को हर साल चार लाख रुपया देने की घोषणा की थी । आज मेले की भव्यता देखते ही बन रही है। एक माह का कल्पवास करने के लिए कई श्रद्धालु अपने परिवारों के साथ आ रहे हैं। हर तरफ पांचालघाट पर अध्यात्म की खुशबू बिखरी हुयी है। सुबह शाम जहां श्रद्धालु गंगा आरती कर रहे हैं तो वहीं दिन भर गंगा मां की आराधना में लीन रहते हैं। साधु संतो के क्षेत्र भी यहंा बन चुके हैं। जहां भक्त पहुंचकर उनसे आशीर्वाद ले रहे हैं। सात स्थानों पर की गयी है पार्किंग की व्यवस्था फर्रुखाबाद। मेला श्री रामनगरिया को देखते हुये सात स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था की गयी है जिससे कि श्रद्धालुओं को आने जाने में दिक्कत न हो। मुख्य मार्ग वाहनों के आवागमन के लिए खुला रहेगा। बेवर की ओर से आने वाले वाहनों की पार्किंग मसेनी चौराहा के निकट और नगर की ओर से आने वाले वाहनों की पार्किंग व्यवस्था पराग डेयरी के निकट क रायी जायेगी। नौगवां कैंट की ओर से आने वाले वाहनों की पार्किंग व्यवस्था की जिम्मेदारी फतेहगढ़ के प्रभारी निरीक्षक संभालेंगे। विशेष पर्वो पर अत्यधिक भीड़ होने पर जमापुर मोड़ के बेरियर पर वाहनों को रोककर बरेली, बदायूं एवं हरदोई की ओर से मेले में आने वाले वाहनों को काफी पीछे रोककर पार्क कराने की जिम्मेदारी राजेपुर थानाध्यक्ष संभालेंगे। पांचालघाट चौकी इंचार्ज पैंटून पुल जाने वाले रास्ते पर व्यवस्था संभालेंगे। पार्किंग स्थल पर बड़े बड़े बैनर लगाये जायेगे जिससे कि श्रद्धालुओं को इधर उधर भटकना न पड़े। आठ स्थानों पर लगाए गए बैरियर फर्रुखाबाद। मेले में भीड़ एवं वाहनों को नियंत्रित करने के लिए आठ बेरियर लगाये जायेंगे। प्रत्येक बेरियर पर एक उपनिरीक्षक, दो आरक्षी, एक यातायात आरक्षी, चार होमगार्ड की डयूटी लगायी जायेगी। जो प्रत्येक समय उपस्थित रहकर भीड़ को नियंत्रित करेंगे और वाहनों की चेकिंग कर पार्क करायेंगे जिससे कि किसी भी दशा में मार्ग पर यातायात अवरुद्ध न होने पाये। विशेष पर्वो पर सीओ, इंस्पेक्टर, थानाध्यक्ष अपने अपने क्षेत्रों में भ्रमणशील रहकर चेकिंंग करेंगे। पुल के आस पास मार्ग पर क ोई भी वाहन खड़ा नहीं होगा।

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