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3 दिसंबर, 2020|7:06|IST

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महिला स्वयं सहायता समूहो को रोजगार से जोड़ने की पहल

महिला स्वयं सहायता समूहो को रोजगार से जोड़ने की पहल

राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत महिला स्वयं सहायता समूह को रोजगार से जोड़ने की पहल की गई है। इसमें महिला सदस्यों को घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने को प्रोत्साहित किया गया। स्वयं सहायता समूह बनाए जाने के तौर तरीकों के बारे में भी जानकारी दी गई। विकास भवन में सभागार में आयोजित सेमिनार में महिला समूहों की सदस्यों को जागरूक करने का काम किया गया। जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने महिला समूहों के सदस्यों का उत्साहवर्धन किया। कहा कि वे सभी लोग घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए काम करें। मुख्य विकास अधिकारी डॉ.राजेंद्र पैंसिया ने कहा कि दस से पंद्रह गरीब महिलाएं मिलकर एक स्वयं सहायता समूह बना सकती है। इसमें साप्ताहिक बैठक, बचत, बैठक में आंतरिक लेन देन,ऋण की समय पर वापसी और खातावही का रख रखाव किया जाता है। सिर्फ बैठक के दौरान ही समूह के सारे वित्तीय लेन देन होते हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष नए पदाधिकारियों का चुनाव होना चाहिए। समूह चाहे तो पदाधिकारियों को उनके कार्य व्यवहार के आधार पर आगामी वर्ष के लिए कार्यकाल बढ़ा सकता है। प्रत्येक तीन माह में समूह का आंकिक अंकेक्षण और एक साल में बाहरी अंकेक्षण होना चाहिए। जिला विकास अधिकारी दुर्गा दत्त शुक्ला ने कहा कि समूह के माध्यम से दूसरों पर निर्भरता कम होगी। अपनी समस्या का समाधान भी स्वयं करना होगा। उन्होंने कहा कि पदाधिकारियों को पहले स्वयं नियम का पालन करना चाहिए। बिना किसी पक्षपात के नियम का पालन करें। परियोजना निदेशक राजमणि वर्मा ने स्वयं सहायता समूह के पंच सूत्र बताए। यह भी बताया कि स्वयं सहायता समूहो से सामूहिक शक्ति आती है और निर्णय लेने का मौका मिलता है। उन्होंने अगरबत्ती, मोमबत्ती समेत विभिन्न घरेलू उद्योग समूह के माध्यम से किए जाने की सलाह दी। जिला कृषि अधिकारी डॉ.राकेश कुमार सिंह के अलावा बैंक के अधिकारी भी इस दौरान मौजूद रहे।

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  • Web Title:Initiative to connect women self-help groups with employment